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राजस्थान में 65 फ़ीसदी से अधिक मतदान | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
राजस्थान विधानसभा की सभी 200 सीटों के लिए गुरुवार को हुए मतदान में 65 फ़ीसदी से अधिक मतदान होने का अनुमान है. हिंसा की कुछ छोटी-मोटी वारदातों को छोड़कर मतदान आमतौर पर शांतिपूर्ण रहा. हालांकि शुरुआत धीमी थी लेकिन मतदान केंद्रों पर दोपहर बाद मतदाताओं की कतार लंबी होती गई. शाम पाँच बजे मतदान ख़त्म होने के बाद भी कई केंद्रों पर लोग वोट डालने के लिए खड़े रहे. राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी विनोद जुत्शी ने बताया कि मतदान की समीक्षा के बाद अगर ज़रुरत महसूस हुई तो पुनर्मतदान का फ़ैसला लिया जाएगा. छिटपुट हिंसा बीबीसी के राजस्थान संवाददाता नायारण बारेठ के मुताबिक मतदान के दौरान कई जगह से इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) के ख़राब होने की भी ख़बरे मिली हैं. राजधानी जयपुर के सिविल लाइंस इलाक़े के मतदान केंद्र पर वोट डालने पहुँचे राज्यपाल एसके सिंह को ईवीएम के ख़राब होने के कारण मतदान के लिए काफ़ी लंबा इंतज़ार करना पड़ा. समाचार एजेंसी यूएनआई को राज्य के गृह सचिव एसएन थानवी ने बताया कि करौली ज़िले में गूजर और मीणा समुदाय के बीच हुई झड़प और फ़ायरिंग में एक व्यक्ति घायल हो गया. उधर, नाथद्वारा विधानसभा क्षेत्र के नीदच गाँव में दो राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं के बीच हुई झड़प में सात लोग घायल हो गए. इनमें से तीन की हालत गंभीर हैं. डॉक्टरों ने उन्हें उदयपुर अस्पताल भेज दिया है.
वहीं नागौर ज़िले के देगाना विधानसभा क्षेत्र के संसारी गाँव में भी दो राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं के बीच हुई झड़प में तीन लोग घायल हो गए. तीन करोड़ मतदाता राजस्थान में क़रीब 3.62 करोड़ मतदाता हैं. जिसमें 1.72 करोड़ महिलाएँ हैं. कांग्रेस ने सभी 200 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे जबकि भाजपा 193 और बहुजन समाज पार्टी 199 सीटों पर चुनाव मैदान में थी. भारतीय जनता पार्टी इन विधानसभा चुनावों में वसुंधरा राजे के नेतृत्व में चुनाव मैदान में उतरी है. लेकिन विपक्षी कांग्रेस ने किसी भी नेता को भावी मुख्यमंत्री के रूप में पेश नहीं किया है. वर्ष 1998 से 2003 तक कांग्रेस राज्य में सत्ता में रही और अशोक गहलोत मुख्यमंत्री रहे. इस बार भी उन्हें ही कांग्रेस की ओर से मुख्यमंत्री पद का प्रमुख दावेदार माना जा रहा है. राज्य में विधानसभा की 200 सीटें हैं. पिछली बार भाजपा ने इनमें से 120 सीटों पर क़ब्ज़ा जमाया था जबकि कांग्रेस को महज़ 56 सीटों पर संतोष करना पड़ा था. इस बार यहाँ के विधानसभा चुनाव में महँगाई, चरमपंथ, विकास और भ्रष्टाचार जैसे बड़े मुद्दे थे. |
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