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राजस्थान में मुख्यमंत्री पद के दावेदार | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारतीय जनता पार्टी इन विधानसभा चुनावों में वसुंधरा राजे के नेतृत्व में चुनाव मैदान में उतर रही है. लेकिन विपक्षी कांग्रेस ने किसी भी नेता को भावी मुख्यमंत्री के रूप में पेश नहीं किया है. वर्ष 1998 से 2003 तक कांग्रेस सत्ता में रही और अशोक गहलोत मुख्यमंत्री रहे और इस बार भी उन्हें ही कांग्रेस की ओर से मुख्यमंत्री पद का प्रमुख दावेदार माना जा रहा है. राज्य में विधानसभा की 200 सीटें हैं और पिछली बार भाजपा ने इनमें से 120 सीटों पर क़ब्ज़ा किया था जबकि कांग्रेस को महज 56 सीटों पर संतोष करना पड़ा था. वसुंधरा राजे इस बार सतारूढ़ भाजपा वसुंधरा राजे के नेतृत्व में पिछले पाँच साल के कामकाज और विकास को मुद्दा बनाकर चुनाव मैदान में उतर रही है. वसुंधरा राजे दिवंगत भाजपा नेता ‘राजमाता’ विजय राजे सिंधिया की बेटी हैं. राजस्थान के धौलपुर राजघराने में ब्याही वसुंधरा राजे ने अपना राजनीतिक जीवन भाजपा की युवा शाखा से शुरु किया था. वो 1985 में राजस्थान विधानसभा के लिए धौलपुर सीट से चुनी गईं और 1989 में लोक सभा के लिए झालावाड़ से चुनी गईं. उसके बाद वो 1991, 1996, 1998 और 1999 में लगातार झालावाड़ से लोक सभा चुनाव जीतीं. उन्हें 1998 में केंद्र सरकार में विदेश राज्यमंत्री बनाया गया और फिर वे केंद्र में कार्मिक लोक शिकायत तथा पेंशन मंत्रालय में राज्यमंत्री भी रहीं. 8 दिसंबर, 2003 को उन्होंने राजस्थान का मुख्यमंत्री पद संभाला और इस बार भी पार्टी उनके नेतृत्व में चुनाव मैदान में है. लेकिन इन पाँच वर्षों में मुख्यमंत्री का विवादों ने पीछा नहीं छोड़ा है. ऐसे अनेक अवसर आए जब जनता और पुलिस के बीच संघर्ष हुआ और कई लोग गोलीबारी मे मारे गए. राजस्थान ने अपने इतिहास का सबसे गंभीर जातिगत तनाव इस समय देखा गया जब गूजर सड़कों पर उतर आए और अपनी बिरादरी के लिए जनजाति का दर्जा मांगने लगे. इस आंदोलन के दौरान रेलें रुकीं, सड़कें जाम हुईं और जनजीवन पटरी से उतर गया था. अशोक गहलोत कांग्रेस ने राजस्थान में किसी को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार नहीं घोषित किया है लेकिन अशोक गहलोत इस दौड़ में सबसे आगे हैं. वर्ष 1998 के विधानसभा चुनावों में उन्होंने पार्टी का नेतृत्व किया था और उन चुनावों में जीत के बाद उन्होंने मुख्यमंत्री पद सँभाला था. कांग्रेस इस बार सरकार के ख़िलाफ़ भ्रष्टाचार, फ़िजूल खर्च और सामाजिक तानेबाने को छिन्न-भिन्न करने जैसे मुद्दों पर वोट मांग रही है. अशोक गहलोत जोधपुर के कृषि से जुड़े एक परिवार से हैं. उन्होंने अर्थशास्त्र में एमए किया और फिर एलएलबी की पढ़ाई की. उन्होंने अलग-अलग समय पर कांग्रेस पार्टी और सरकार में विभिन्न प्रशासनिक पदों पर काम किया है. वो 1980 में पहली बार संसद में जोधपुर से चुने गए और फिर 1984 में दोबारा वहीं से निर्वाचित हुए. राजस्थान विधानसभा में वे सरदारपुर चुनाव क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं. उन्हें पहली बार 1985 में राजस्थान प्रदेश काँग्रेस समिति का अध्यक्ष बनाया गया. वो पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी की सरकार में 1982 में केंद्र में पर्यटन उपमंत्री बने और फिर पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गाँधी की सरकार में 1984-85 में भी इस पद पर रहे. राजस्थान में 1989 में उन्होंने गृह मंत्रालय का कार्यभार संभाला. पूर्व प्रधानमंत्री नरसिंह राव की सरकार में केंद्रीय कपड़ा राज्यमंत्री रहे. इसके बाद 1994 और 1997 में उन्हें दोबारा राजस्थान में काँग्रेस पार्टी का अध्यक्ष बनाया गया. 1998 के विधानसभा चुनावों में जीत के बाद उन्होंने मुख्यमंत्री पद संभाला था. |
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