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'सच्चाई और ईमानदारी की राजनीति करता हूँ' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
दिल्ली विधानसभा चुनावों में अत्यंत धनी उम्मीदवार के रुप में सामने आए बसपा के कंवर सिंह तंवर कहते हैं कि वो ईमानदारी और सच्चाई की राजनीति करते हैं. तंवर कहते हैं कि उनके पास भगवान का दिया बहुत कुछ है और वो पैसे कमाने के लिए राजनीति में नहीं आए हैं, वो आए हैं सिर्फ़ सेवा करने के लिए. तंवर ने चुनाव के लिए दायर हलफ़नामे में अपनी संपत्ति का ब्यौरा दिया है और बताया है कि उनके पास डेढ़ सौ करोड़ की संपत्ति है और कई गाड़ियां हैं. इस बारे में वो कहते हैं, ‘‘ मैंने पूरी ईमानदारी से अपनी संपत्ति का ब्यौरा दिया है. मैं आयकर देता हूं इसमें ग़लत क्या है. आप मुझे बताइए कि मेरे इलाक़े का स्थानीय विधायक कहता है कि उनके पास साठ हज़ार रुपए हैं जबकि वो विदेशी गाड़ी में घूमते हैं.कौन विश्वास करेगा उनकी बात पर.’’ तंवर कहते हैं कि लोग हलफ़नामा दायर कर झूठ बोल रहे हैं जबकि उन्होंने सच कहा है और इसीलिए लोग उनका समर्थन कर रहे हैं. छत्तरपुर के इलाके़ में कई अवैध कालोनियां हैं और इन कालोनियों का मुद्दा दिल्ली में अहम रहा है. पिछले दिनों क़रीब 1600 कालोनियों को वैधता का सर्टिफ़िकेट मिला लेकिन इसमें इस इलाक़े की कालोनियां नहीं थीं. तंवर कहते हैं, ‘‘ बीजेपी की सरकार में भी कालोनी रेगुलराइज़ नहीं हुई. कांग्रेस दस साल से सरकार में हैं उन्होंने भी रेगुलराइज़ नहीं की. अभी भी प्रोविज़नल सर्टिफ़िकेट मिला है. वो भी इस इलाक़े को नहीं मिला है. लोग तंग हैं उन्हें घर चाहिए. ग़रीबों को रोज़ी रोटी चाहिए. ’’ कंवर सिंह तंवर ग्रामीण परिवेश में रहने वाले लोगों में से है और पैसे की उन्हें चिंता नहीं है. शायद इसीलिए वो बिल्कुल साफ कहते हैं कि अगर वो विधायक बने तो उन्हें विधायक कोष का बजट मिलने से पहले ही वो सारे काम करवा देंगे. उनकी इस बात को इलाक़े के लोग भी मानते हैं और शायद इसी कारण स्थानीय विधायक कांग्रेस के बलराम सिंह तंवर की सभाओं से अधिक भीड़ बसपा के इस उम्मीदवार की सभाओं में होती है. वो कहते हैं, ‘‘ मैं विधायक बनना नहीं चाहता. मेरे पास इज्ज़त विधायकों से अधिक है लेकिन अधिकारियों से काम करवाना ज़रुरी है. जो ज़मीन से उठ कर आता है वही ग़रीबों के काम करता है. इसीलिए मैं राजनीति में आया हूं ताकि लोगों का अधिक से अधिक काम करवा सकूं. ’’ तंवर कहते हैं कि राजनीति में ईमानदार लोग नहीं आ रहे हैं और उन्होंने एक उदाहरण पेश किया है अपनी संपत्ति का पूरा ब्यौरा देकर जो उनकी ईमानदारी साबित करती है. छतरपुर में क़रीब सवा लाख मतदाता हैं और इनमें से अधिकतर ग्रामीण और निचले मध्यम वर्ग के हैं. इलाक़े के लोग साफ़ साफ़ किसी का समर्थन खुल कर नहीं कर रहे हैं क्योंकि वो कहते हैं कि ऐसा करने से उम्मीदवार बाद में उन्हें परेशान करते हैं. इलाके़ में जीत हार का फ़ैसला तो 29 दिसंबर को होगा लेकिन एक बात तय दिखती है कि कंवर सिंह तंवर के खड़े होने से पहले कांग्रेस बीजेपी के बीच होने वाला सीधा मुक़ाबला तिकोना हो गया है जिसमें जीत किसी की भी हो सकती है. | इससे जुड़ी ख़बरें सरकार बचाने में जुटे मुलायम को झटका19 जुलाई, 2008 | भारत और पड़ोस उत्तर प्रदेश: बनते-बिगड़ते समीकरण22 जुलाई, 2008 | भारत और पड़ोस 'मुक़दमे पीएम बनने से रोकने की साज़िश'09 अगस्त, 2008 | भारत और पड़ोस मायावती ने 'उत्तराधिकारी' को हटाया19 अगस्त, 2008 | भारत और पड़ोस बसपा कार्यकर्ता ने पैसे माँगे: अमर सिंह25 सितंबर, 2008 | भारत और पड़ोस मुसलमानों को रिझाने में जुटे दल15 अक्तूबर, 2008 | भारत और पड़ोस नटवर सिंह बसपा से निकाले गए18 नवंबर, 2008 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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