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विस्थापितों को मदद की अपील | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल ने श्रीलंका सरकार और तमिल विद्रोहियों से अपील की है कि वह लाखों विस्थापित लोगों तक मदद पहुँचाने दें. कोई तीन लाख लोग श्रीलंकाई सेना और तमिल विद्रोहियों के बीच पिछले कुछ हफ़्तों से चल रही लड़ाई की वजह से विस्थापित हुए हैं. एमनेस्टी का कहना है कि हज़ारों लोगों के पास न सर छुपाने की जगह है, न खाना और न दवाइयाँ. संस्था ने एक बयान जारी करके कहा है, "उत्तर-पूर्वी मानसून पहुँचने तक सिर्फ़ 2100 परिवारों को शिविरों तक पहुँचाया जा सका था जबकि 20 हज़ार परिवार के पास कुछ भी नहीं था." एमनेस्टी का कहना है, "वन्नी इलाक़े से दो तिहाई लोगों को विस्थापित होना पड़ा है और अब तमिल विद्रोहियों के नियंत्रण वाले इलाक़ों में शिविरों में रह रहे हैं." संस्था का कहना है कि जब तक विस्थापितों तक खाना पहुँचाने का काम सरकार की जगह सहायता एजेंसियाँ नहीं करेंगीं तब तक यह सुनिश्चित करना मुश्किल होगा कि उन तक वास्तव में सहायता पहुँच रही है. सहायता एजेंसी ने गुहार लगाई है, "इन परिवारों को इस तरह से युद्ध क्षेत्र में छोड़कर भूलना नहीं चाहिए." हालांकि दोनों ही पक्षों ने एमनेस्टी की इस रिपोर्ट पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है लेकिन इससे पहले दोनों ही पक्ष कहते रहे हैं कि वे नागरिकों को हो रही परेशानियों के लिए ज़िम्मेदार नहीं हैं. | इससे जुड़ी ख़बरें एलटीटीई के गढ़ में घुसी सेना16 नवंबर, 2008 | भारत और पड़ोस श्रीलंका का अहम नगर पर कब्ज़े का दावा15 नवंबर, 2008 | भारत और पड़ोस श्रीलंकाई तमिलों के समर्थन में उपवास01 नवंबर, 2008 | भारत और पड़ोस श्रीलंका को खाद्य सहायता भेजेगा भारत27 अक्तूबर, 2008 | भारत और पड़ोस 'तमिलों के अधिकारों की रक्षा करे श्रीलंका'18 अक्तूबर, 2008 | भारत और पड़ोस वायु सेना ने तमिल अड्डे पर बम बरसाए10 सितंबर, 2008 | भारत और पड़ोस श्रीलंका में 'सेना जीत के क़रीब'26 सितंबर, 2008 | भारत और पड़ोस श्रीलंका सेना निर्णायक लड़ाई की तैयारी में29 अगस्त, 2008 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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