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शनिवार, 25 अक्तूबर, 2008 को 20:22 GMT तक के समाचार
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साध्वी की हिरासत पर कांग्रेस की चुप्पी

मालेगांव(फ़ाइल)
मालेगांव में हुए विस्फोट में पाँच लोगों की मौत हो गई थी
मालेगांव बम धमाकों में हिंदुत्ववादी संस्थाओं से जुड़े कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी से संघ परिवार भले ही विकट स्थिति में घिरा हुआ दिख रहा हो मगर कांग्रेस पार्टी भी इस मामले पर फूँक-फूँककर क़दम रख रही है.

महाराष्ट्र के एक विशेष पुलिस दस्ते ने चंद दिनों पहले मध्य प्रदेश के इंदौर और देवास से तीन लोगों को मालेगांव बम विस्फोट में शामिल होने के संदेह में गिरफ्तार किया था.

गुजरात से इस मामले में गिरफ्तार की गई साध्वी प्रज्ञा सिंह भी मूलतः भिंड के लहार से ताल्लुक रखती हैं और लंबे समय तक भारतीय जनता पार्टी के विद्यार्थी विंग, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के महत्वपूर्ण पदों पर रह चुकी हैं.

परिषद अब इन संबंधों से इनकार कर रहा है और उसके कुछ कार्यकर्ताओं ने शुक्रवार को मध्य प्रदेश में कई जगह विरोध-प्रदर्शन भी किए.

मालेगाँव के इस विस्फोट में मध्य प्रदेश के हिन्दुत्वादी संगठनों के कार्यकर्ताओं का हाथ होने के आरोप के बावजूद राज्य की मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने इसपर अबतक कोई औपचारिक प्रतिक्रिया तक जारी नहीं की है.

वोट की चिंता

कांग्रेस की खामोशी पर पार्टी प्रवक्ता जेपी धनोपिया का कहना है की पार्टी इस मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों को सज़ा मिलने की मांग करती है लेकिन वह पकड़े गए लोगों को जल्दबाज़ी में दोषी करार नहीं देना चाहती.

भाजपा नेताओं के साथ साध्वी
बताया जा रहा है कि साध्वी का संपर्क भाजपा के शीर्ष नेताओं से रहा है

कांग्रेस का यह रवैया राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के रुख से बिल्कुल उलट है जिन्होंने अदालत की एक कार्यवाही के संबंध में पुलिस को दिए गए बयान में राज्य के नीमच और महू शहरों में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और दूसरे हिंदुत्ववादी संगठनों पर बम बनाने और विस्फोट करने का आरोप लगाया था.

पूर्व मुख्यमंत्री देश के कई हिस्सों में हुए विस्फोटों में भी इन्हीं संगठनों का हाथ होने की बात बार-बार दोहराते रहे हैं.

वैसे शनिवार शाम राज्य सरकार में मंत्री रहे अजेय सिंह के नाम से एक विज्ञप्ति ज़रूर जारी हुई मगर वह यह कहने के लिए कि स्वामी अवधेशानंद का साध्वी प्रज्ञा सिंह से कोई लेना देना नहीं. कहा जा रहा है कि साध्वी हिंदू संत अवधेशानंद की शिष्या रह चुकी है.

ऐसी बातें भी हो रही हैं की प्रज्ञा सिंह वर्तमान भारतीय जनता पार्टी सरकार के एक पूर्व मंत्री की करीबी थीं. उन्हीं के माध्यम से अवधेशानंद के संपर्क में आईं और बाद में साध्वी बन गईं. उन्होंने फिर गुजरात को अपना ठिकाना बनाया था.

समझा जा रहा था कि हमेशा मुस्लिम चरमपंथ को बढ़ावा देने का आरोप झेलने वाली कांग्रेस पार्टी इस मामले को ज़ोर शोर से उठाएगी - तब जबकि अगले माह ही राज्य में विधान सभा चुनाव होने वाले हैं.

पार्टी सूत्रों का कहना है कि मालेगांव ब्लास्ट जिसे एक हल्के में "हिंदू आतंकवाद" का उदाहरण बताया जा रहा है, को मुद्दा बनाकर कांग्रेस बहुसंख्यक समुदाय के वोटरों का 'बैकलैश' यानी उल्टी प्रतिक्रिया नहीं झेलना चाहती.

चरमपंथ को हमेशा मुस्लिमों से जोड़ने वाली भाजपा ने इस मामले में नया रुख अपनाया है.

मध्य प्रदेश इकाई अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर ने कहा कि उनकी पार्टी आतंकवाद को किसी धर्म से नहीं जोड़ती और अपराधी सिर्फ़ अपराधी होता है, उसका कोई मज़हब नहीं होता.

इस बीच महाराष्ट्र से मध्य प्रदेश आए पुलिस दल की छानबीन और लोगों से भोपाल, इंदौर, उज्जैन और ग्वालियर में पूछताछ की कार्यवाही जारी है.

मालेगाँव के तार

ग़ौरतलब है कि मालेगाँव में पिछले महीने हुए बम विस्फोट के सिलसिले में गिरफ़्तार की गईं एक साध्वी समेत तीन लोगों को नासिक की अदालत ने पुलिस हिरासत में भेज दिया है.

मालेगाँव
मालेगाँव पहले भी चरमपंथी हमलों का निशाना बना है

महाराष्ट्र पुलिस ने एक साध्वी सहित तीन लोगों को हिरासत में लिया जिनके बारे में पुलिस का कहना है कि इनका ताल्लुक मालेगांव में हुए बम विस्फोट से हो सकता है.

गिरफ़्तार किए गए लोगों पर हत्या और सदभाव बिगाड़ने की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है.

पुलिस ने साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर के अलावा श्यामलाल साहू और शिवनारायण सिंह को भी तीन नवंबर तक के लिए पुलिस हिरासत में भेज दिया गया.

मुंबई पुलिस की आतंकवाद निरोधक शाखा के प्रमुख हेमंत कड़करे ने बताया कि जिस मोटरसाइकिल का मालेगाँव में धमाके के लिए इस्तेमाल किया गया था वो साध्वी प्रज्ञा ठाकुर के नाम पर है. उन्होंने यह भी बताया कि गाड़ी का रजिस्ट्रेशन फ़र्ज़ी है और इसकी चेचिस, इंजन से नंबर मिटाने की कोशिश भी की गई है.

इसी वर्ष 29 सितंबर को महाराष्ट्र के मालेगाँव में हुए धमाकों पाँच लोगों की मौत हो गई थी.

पुलिस ने प्रारंभिक जाँच के बाद पाया था कि इन धमाकों में आरडीएक्स जैसे विस्फोटक का इस्तेमाल किया गया था.

पुलिस ने इस मामले में मौके से बरामद मोटरसाइकिल और कुछ अन्य जानकारियों के आधार पर इन लोगों का पता लगाया है और इन्हें हिरासत में लिया है.

इसी दिन गुजरात के साबरकांठा ज़िले के मोडासा कस्बे में भी बम धमाका हुआ था जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई थी.

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