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फिर भावुक हुए सोमनाथ चटर्जी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
कम्युनिस्ट पार्टियों के अपने पुराने साथियों के साथ हुई तकरार के बाद लोकसभा अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी एक बार फिर भावुक हो गए और कहा कि वे पद छोड़ने को तैयार हैं. उन्होंने भावुकता भरी नाराज़गी से कहा कि स्पीकर के अधिकार को बार-बार चुनौती दी जा रही है और यदि सदस्य चाहें तो वे तत्काल पद छोड़कर जाने को तैयार हैं. इसके बाद उन्होंने उड़ीसा और कर्नाटक में ईसाई समुदाय पर हुए हमलों के मामले में चल रही चर्चा के दौरान आसंदी पर रहने से इनकार कर दिया और उपाध्यक्ष को वहाँ बुलाकर सदन से चले गए. बाद में वासुदेव आचार्य ने चर्चा शुरु की लेकिन भारतीय जनता पार्टी और बीजू जनता दल के सदस्यों के हंगामे के बीच सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी. यह पहली बार नहीं है जब सदस्यों के साथ हुई तकरार के बाद सोमनाथ चटर्जी भावुक होकर उखड़ गए हों. इससे पहले भी एकाधिक बार वे पद छोड़ने की चेतावनी दे चुके हैं. मामला शुक्रवार को जब अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी ने सीपीएम के वासुदेव आचार्य को अल्पसंख्यकों पर हुए हमलों के मामले में धारा 193 के तहत चर्चा शुरु करने के लिए आमंत्रित किया तो उन्होंने इस बात पर आपत्ति दर्ज करवाई की वे चाहते थे कि इस पर कार्यस्थगन प्रस्ताव के तहत चर्चा होती. उनका कहना था कि उड़ीसा और कर्नाटक में जिस तरह से ईसाइयों पर हमले हुए हैं उस पर दुनिया के कई देशों में चर्चा हुई है. उनका कहना था, "अफ़सोस की बात है कि हम इस सदन की कार्रवाई रोककर इस पर चर्चा नहीं कर पा रहे हैं." लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि वे इस बात से सहमत हैं कि यह मामला गंभीर है और इस पर कार्य स्थगन प्रस्ताव भी दिया गया था लेकिन सदन में बनी सर्वसम्मति के आधार पर धारा 193 के तहत की चर्चा करवाने का निर्णय लिया गया है. इस पर जब वासुदेव आचार्य के साथ सीपीआई के गुरुदास दासगुप्ता भी खड़े होकर आपत्ति दर्ज करवाने लगे. सोमनाथ चटर्जी का कहना था कि पिछले चार-पाँच दिनों में ऐसा अवसर ही नहीं मिला जिसमें इस पर चर्चा हो सकती. जब गुरुदास दासगुप्ता ने लोकसभा नियमावली का हवाला देकर कहा कि कार्यस्थगन पर चर्चा को सरकार की आपत्ति के बाद ही रोका जा सकता है और यदि सरकार चाहती है कि इस पर कार्य स्थगन के ज़रिए चर्चा न हो तो उसे ऐसा सामने आकर कहना चाहिए. लेकिन इस पर सोमनाथ चटर्जी ने कहा कि चर्चा के लिए लोकसभा अध्यक्ष की अनुमति ज़रुरी है और उन्होंने इसकी इजाज़त नहीं दी है. इसके बाद वे भावुक हो गए और कहा कि आसंदी के अधिकारों पर जानबूझकर सवाल उठाए जा रहे हैं और अगर सदस्य चाहें तो वे तत्काल पद छोड़कर जाने को तैयार हैं. उन्होंने कहा, "यह (अध्यक्षता का काम) प्रताड़ना बनता जा रहा है." इसके बाद उन्होंने लोकसभा उपाध्यक्ष को आसंदी पर आने के लिए कहा और इस चर्चा के दौरान आसंदी पर न रहने की इच्छा ज़ाहिर की. उल्लेखनीय है कि गुरुवार को भी सदस्यों के शोरशराबे से वे परेशान हो गए थे और जब बीजू जनता दल के सदस्य तथागत सत्पथी ने कहा कि वे आसंदी का सम्मान करते हैं तो उन्होंने कहा का, "यह भी एक ख़बर है कि संसद का कोई सदस्य आसंदी का सम्मान करता है." |
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