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माओवादियों ने फिर किया हत्या का दावा | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
उड़ीसा में माओवादियों ने एक बार फिर दावा किया है कि उन्होंने ही स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती की हत्या की थी. उड़ीसा के कुछ पत्रकारों को माओवादी जंगलों में ले गए और वहाँ सीपीआई (माओवादी) के उड़ीसा राज्य समिति के प्रमुख नेता सब्यसाची पंडा उर्फ़ कॉमरेड सुनील ने ये दावा किया. हालाँकि विश्व हिंदू परिषद और भारतीय जनता पार्टी ने उनके इन दावों के खंडन किया है. संघ परिवार का अब भी कहना है कि ये हत्या ईसाइयों की साज़िश थी. उस हत्या के बाद से उड़ीसा के कंधमाल ज़िले में व्यापक हिंसा हुई है जो अब तक जारी है. तब से अब तक किसी माओवादी नेता ने पहली बार मीडिया के सामने आकर इस तरह का दावा किया है. पंडा का कहना था कि स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती उस इलाक़े में सांप्रदायिक और जातिगत विद्वेष फैला रहे थे और इसीलिए माओवादियों ने उनकी हत्या की. अब तक इस मामले में चुप्पी साधे रखने के सवाल पर उनका कहना था, "हमने चुप्पी नहीं रखी. घटनास्थल पर हमने अपने लेटरपैड पर लिखे बयान छोड़े थे जिसमें लिखा था कि ये हत्या हमने की है." धमकी माओवादियों ने कुछ दिनों पहले मीडिया में एक बयान जारी करके कंधमाल के चौदह लोगों को धमकी दी थी और कहा था कि वे ही वहाँ ईसाइयों के विरुद्ध दंगे भड़का रहे हैं. पंडा ने कहा कि जब हम उन 14 लोगों में से कुछ और की हत्या कर देंगे तब शायद राज्य सरकार मानेगी कि हत्या हमने की थी. उन्होंने राज्य की नवीन पटनायक सरकार को 'भाजपा का राज्य प्रभारी' बताते हुए कहा कि सरकार अगले चुनाव में हिंदू वोटों के चक्कर में दंगों को रोकने के लिए कोई कारगर क़दम नहीं उठा रही है. ये पूछे जाने पर कि स्वामी जी की हत्या के समय उन्होंने उसके बाद होने वाली प्रतिक्रिया के बारे में नहीं सोचा, पंडा ने इसका कोई सीधा जवाब नहीं दिया. उनका कहना था कि वो काफ़ी समय पहले से स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती को चेतावनी दे रहे थे. माओवादियों के इस दावे के बाद भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता वेंकैया नायडू ने कहा है कि कोई भी मुँह ढँककर कुछ भी दावा कर सकता है और माओवादियों के इस दावे में कोई दम नहीं है. | इससे जुड़ी ख़बरें उड़ीसा-कर्नाटक मामले पर बैठक05 अक्तूबर, 2008 | भारत और पड़ोस उड़ीसा में राष्ट्रपति शासन की अटकलें04 अक्तूबर, 2008 | भारत और पड़ोस थम नहीं रही हिंसा, 20 और घर जले03 अक्तूबर, 2008 | भारत और पड़ोस उड़ीसा की स्थिति पर तेज़ हुई राजनीति03 अक्तूबर, 2008 | भारत और पड़ोस कंधमाल में फिर हिंसा भड़की, एक की मौत30 सितंबर, 2008 | भारत और पड़ोस उड़ीसा में ताज़ा हिंसा, गिरजाघर पर हमला25 सितंबर, 2008 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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