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सार्वजनिक जगहों पर धूम्रपान पर रोक | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत में सार्वजनिक स्थलों को बीड़ी-सिगरेट के धुएँ से मुक्त कराने के लिए आज से रोक लगा दी गई है. इसके दायरे में कार्यालयों की इमारतें, होटल, रेस्तरां, सिनेमाघर, बस स्टॉप जैसी जगहें आती हैं. इन जगहों पर सिगरेट पीते हुए पाए जाने पर 200 रुपए का जुर्माना लगाया जाएगा. सड़क, घर, पार्क और निजी वाहनों में सिगरेट पीने पर कोई रोक नहीं है. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने इस बारे में 30 मई को एक अधिसूचना जारी की थी. रोक से इनकार सिगरेट बनाने वाली कंपनी आईटीसी और कुछ होटल संगठनों ने देश के उच्च न्यायालयों से इस प्रतिबंध पर रोक लगाने की माँग की थी. स्वास्थ्य मंत्रालय ने इस मामले में उच्चतम न्यायालय में अपील दायर की थी और सुप्रीम कोर्ट ने प्रतिबंध पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था. समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक हालांकि स्वास्थ्य मंत्री अंबुमणि रामदॉस ने राज्यों के मुख्यमंत्रियों, राज्यपालों और मुख्य सचिवों को पाबंदी के संबध मे पत्र लिखा है लेकिन बिहार और महाराष्ट्र सरकार ने इस पाबंदी को लागू करने में अपनी असमर्थता ज़ाहिर की है. शोध की रिपोर्ट इस साल की शुरुआत में किए गए एक शोध में कहा गया था कि भारत में धूम्रपान एक महामारी का रूप लेता जा रहा है औप इसकी वजह से वर्ष 2010 तक हर साल लगभग 10 लाख लोगों की मौत होने लगेगी. न्यू इंग्लैंड जनरल ऑफ़ मेडिसिन में छपे शोध में कहा गया था कि इसमें आधे ग़रीब और अशिक्षित लोग होंगे. ये शोध भारत, कनाडा और ब्रिटेन के डॉक्टरों ने संयुक्त रूप से किया था. शोधकर्ताओं के अनुसार ये भारत में धूम्रपान को लेकर किया गया अब तक का सबसे व्यापक अध्ययन था. इसमें 900 अध्ययनकर्ताओं ने देश के विभिन्न हिस्सों के 11 लाख घरों में जाकर तथ्य जुटाए थे. |
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