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'विदेशी सेना को अनुमति नहीं मिलेगी' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पाकिस्तान के सेनाध्यक्ष जनरल अशफ़ाक़ परवेज़ कियानी ने कहा है कि "देश की संप्रभुता की हर क़ीमत पर रक्षा की जाएगी और किसी विदेशी फौज को पाकिस्तान की सीमा के भीतर किसी तरह की कार्रवाई नहीं करने दी जाएगी". हाल के दिनों में अफ़ग़ानिस्तान में तैनात गठबंधन सैनिकों की कार्रवाई में पाकिस्तानी नागरिकों के मारे जाने के बाद उनका यह बयान आया है. अमरीकी सेना के एक शीर्ष कमांडर ने बुधवार को कहा था कि तालेबान के ख़िलाफ़ एक नई रणनीति अपनाई जाएगी जिसमें अफ़ग़ानिस्तान के साथ-साथ अब पाकिस्तान के कबायली इलाकों पर भी हमले तेज़ किए जाएँगे. गठबंधन सेना के मामले में स्थिति बहुत स्पष्ट है कि "पाकिस्तान में चरमपंथियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई करने की ज़िम्मेदारी सिर्फ़ पाकिस्तानी सैनिकों की है". उन्होंने स्पष्ट किया कि "गठबंधन सेना के साथ कोई ऐसा करार या सहमति नहीं हुई है जिसके तहत उन्हें पाकिस्तानी सीमा के भीतर कार्रवाई करने की छूट मिल गई हो." उन्होंने 27 अगस्त को अमरीकी सेना के वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाक़ात के बारे में बताते हुए कहा कि उन्हें स्थिति की "जटिलता से आगाह किया और बताया गया कि इस समस्या को सरसरी तौर पर नहीं, बल्कि गहराई से समझकर सुलझाने की ज़रूरत है". जनरल कियानी का कहना है कि पाकिस्तान की नीतियों के केंद्र में हमेशा राष्ट्रहित रहेगा. उन्होंने चार सितंबर को सीमावर्ती इलाक़े अंगूरअड्डा में अमरीकी सैनिकों की कार्रवाई की आलोचना की और कहा कि इस तरह की "ग़ैर-ज़िम्मेदार कार्रवाइयों से आतंकवादियों को और मज़बूत होने का मौक़ा मिलता है". जनरल कियानी ने कहा, "पाकिस्तानी सेना आतंकवादियों के ख़िलाफ़ कामयाबी से कार्रवाई कर रही है और क़बायली इलाक़ों और स्वात से उन्हें ख़त्म करने के लिए प्रतिबद्ध है. हमारे सैनिकों ने इस लड़ाई में बहुत कुर्बानियाँ दी हैं." पाकिस्तानी सैनिक मुख्यालय की ओर से जारी इस बयान में कहा गया है कि अगर इस जटिल समस्या के निबटारे में परस्पर विश्वास की कमी या ग़लतफ़हमी हुई तो स्थिति सबसे लिए बुरी हो जाएगी. जनरल कियानी ने कहा कि पाकिस्तान के दुर्गम इलाक़ों में सैनिक कार्रवाई से जुड़ी कठिनाइयों को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि लड़ाई में कोई शॉर्ट कट नहीं होता, तत्काल फ़ायदे के चक्कर में दीर्घकालिक हितों को कुर्बान नहीं किया जा सकता. उनका कहना है कि इस लड़ाई में पाकिस्तान की जनता का सहयोग और समर्थन सबसे ज़रूरी है. | इससे जुड़ी ख़बरें प्रोफ़ेशनल जनरल हैं कियानी28 नवंबर, 2007 | भारत और पड़ोस अब मुशर्रफ़ असैनिक राष्ट्रपति29 नवंबर, 2007 | भारत और पड़ोस 'मुशर्रफ़ से बातचीत जारी रखेगा भारत'15 दिसंबर, 2007 | भारत और पड़ोस 'हम मिलकर गठबंधन सरकार बनाएंगे'21 फ़रवरी, 2008 | भारत और पड़ोस 'पाकिस्तान के नाम से ही नाराज़ हैं लोग'17 फ़रवरी, 2008 | भारत और पड़ोस पाक में स्थिरता चाहते हैं कश्मीरी अलगाववादी17 फ़रवरी, 2008 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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