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शनिवार, 15 दिसंबर, 2007 को 15:11 GMT तक के समाचार
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'मुशर्रफ़ से बातचीत जारी रखेगा भारत'
एमके नारायणन (फ़ाइल फ़ोटो)
'राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ से हमने पहले भी वार्ता की है और आगे भी उनसे बातचीत करते रहेंगे'
भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार एमके नारायणन ने कहा है कि पाकिस्तानी राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ को भारत एक निर्वाचित राष्ट्रपति और भरोसेमंद वार्ताकार के तौर पर देखता है. उनका कहना है कि भारत ने उनसे पहले भी वार्ता की है और आगे भी जारी रखेगा.

नारायणन ने एक भारतीय टीवी चैनल को दिए साक्षात्कार में कहा, "वे वर्दीधारी राष्ट्रपति से असैनिक राष्ट्रपति बन चुके हैं. चुनाव के बहिष्कार को थामने में भी वे सफल रहे. एक हद तक वे इससे उबरने में कामयाब रहे."

पाकिस्तानी हालात के भारत पर असर के सवाल पर उन्होंने कहा, "मेरी राय में अब वे एक निर्वाचित राष्ट्रपति हैं लेकिन इसकी वैधता की घोषणा तभी की जा सकेगी जब नई संसद उनके चुनाव पर दो तिहाई बहुमत से मुहर लगा दे."

अनुमोदन पर आशंका

नारायणन ने टीवी चैनल को बताया, "जो हालात हैं उससे लगता नहीं है कि उस बहुमत से उनका अनुमोदन हो पाएगा. हमने उनके साथ पहले भी वार्ता की है और मुझे लगता है कि आगे भी हम उनसे बातचीत करते रहेंगे."

परवेज़ मुशर्रफ़, पाकिस्तानी राष्ट्रपति (फ़ाइल फ़ोटो)
'मुशर्रफ़ का भविष्य आने वाले दिनों में सेना के साथ उनके संबंध पर निर्भर करेगा'

नारायणन का मानना है कि सेना का साथ और उसका भरोसा ऐसे कारण हैं जिन पर मुशर्रफ़ का दीर्घकालिक भविष्य टिका होगा.

वे कहते हैं, "मुझे व्यवस्था में कहीं दरार के संकेत नहीं दिख रहे. कमांडर और जनरलों को देखें तो वे सारे तालमेल के साथ काम कर रहे हैं. अगर महत्वाकांक्षा पैदा होती है तो स्थिति दूसरी हो सकती है."

वर्दी उतारने के बाद मुशर्रफ़ की ताक़त में आई कमी के सवाल पर नारायणन ने कहा कि अधिकारों का तीन-तरफ़ा बँटवारा होगा.

उन्होंने कहा कि मुशर्रफ़ को असैनिक राष्ट्रपति, सेना प्रमुख और निर्वाचित होने वाले प्रधानमंत्री के बीच शक्ति के विभाजन से जूझना होगा.

भारत के लिए एक वार्ताकार के रूप में मुशर्रफ़ की विश्वसनीयता के सवाल पर नारायणन ने कहा, "हां, एक हद तक वे भरोसेमंद वार्ताकार बने रहेंगे."

पाकिस्तान के नए सेना प्रमुख जनरल अशफ़ाक परवेज़ कियानी को नारायणन एक पेशेवर सैनिक मानते हैं.

'पेशेवर हैं कियानी'

मुशर्रफ के नज़दीकी सहयोगी रहे कियानी देश की ख़ुफ़िया एजेंसी आईएसआई के प्रमुख का पद भी संभाल चुके हैं.

नारायणन का मानना है कि मुशर्रफ़ और कियानी के रिश्तों में आगे भी तालमेल बना रहेगा.

जनरल अशफ़ाक़ परवेज़ कियानी (फ़ाइल फ़ोटो)
नारायणन मानते हैं कि कियानी कोई बड़ी राजनीतिक महत्वाकांक्षा नहीं रखते

नारायणन कहते हैं, "यह ऐसा मामला है जिसे आगे हमें क़रीब से देखना होगा."

उनका मानना है कि कियानी बड़ी राजनीतिक महत्वाकांक्षा वाले आदमी नहीं हैं. वे कहते हैं, "जो उन्हें जानते हैं, उनका मानना है कि वे एक भरोसेमंद व्यक्ति हैं."

भारतीय सुरक्षा सलाहकार का मानना है कि जनरल कियानी भारत के ख़िलाफ़ कोई "साहसिक कार्रवाई" नहीं करेंगे.

वे कहते हैं, "इस तरह की कोशिश में वे एक सैनिक से ज़्यादा पेशेवर हैं."

भारत में चरमपंथी हिंसा के संदर्भ में जब नारायणन से आईएसआई प्रमुख के रूप में जनरल कियानी के कार्यकाल के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि उन्हें आईएसआई में कोई बदलाव नज़र नहीं आता है.

उन्होंने कहा, "मुझे नहीं लगता कि कियानी के रहते आईएसआई में किसी भी तरह का बदलाव आया. संभव है कि बाहर से उन पर शांत रहने का दबाव हो, संभवतः मुशर्रफ का."

नारायणन ने कहा कि चरमपंथी संगठन लश्कर-ए-तोएबा, जैश-ए-मोहम्मद और अल-बदर को मार्गदर्शन के मसले पर कोई आधारभूत परिवर्तन नहीं दिखता.

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