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बीजिंग और क्रिकेट पर भारी मुशर्रफ़ | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
परवेज़ मुशर्रफ़ भारत के सभी अख़बार की सुर्खियाँ बने हुए हैं. दिल्ली के सभी अंग्रेज़ी और हिंदी के अख़बार ने मुशर्रफ़ को पहले पन्ने पर सबसे ऊपर जगह दी है. बीजिंग और क्रिकेट पीछे छूट गया है और सभी अख़बारों ने मुशर्रफ़ की ख़बर को अहमियत दी है. दैनिक हिंदुस्तान अख़बार का शीर्षक है 'बड़े बेआबरू होकर..'. राष्ट्रीय सहारा ने सुर्खी लगाई है 'पाक का ख़ुदा हाफ़िज़'. अमर उजाला सवाल कर रहा है 'अब कहाँ जाएँगे मियां मुशर्रफ़'. नवभारत टाइम्स लिखता है 'चले गए मुशर्रफ़, लेकिन पाकिस्तान छोड़ने का इरादा नहीं'. सुर्खियों और मुशर्रफ़ के लंबे अलविदा भाषण के अलावा ज़्यादातर अख़बारों ने 'गार्ड ऑफ़ ऑनर' के बाद सैल्यूट की मुद्रा में मुशर्रफ़ की तस्वीर छापी है. राष्ट्रीय सहारा ने पहले पन्ने पर ही पाकिस्तान में मुशर्रफ़ के जाने के बाद लोगों के खुशियाँ मनाते, एक-दूसरे को मिठाई खिलाते तस्वीर भी छापी है. दैनिक जागरण लिखता है ‘जनरल ने डाले हथियार’. जागरण ने 1999 और 2008 के बीच तुलना भी करके बताया है 'कल तुम्हारा था, आज हमारा है'. क्या कहते हैं अंग्रेज़ी अख़बार भारत के अंग्रेज़ी अख़बारों के पहले पन्नों पर सबसे ऊपर परवेज़ मुशर्रफ़ ही हैं. इंडियन एक्सप्रेस ने मुशर्रफ़ के भाषण के अंतिम शब्द 'पाकिस्तान ख़ुदा हाफ़िज़' को सुर्खी बनाया है और साथ में मुशर्रफ़ के सैल्यूट करती तस्वीर छापी है.
इंडियन एक्सप्रेस ने पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज़) के अध्यक्ष के उस बयान को भी पहले पन्ने पर छापा है जिसमें उन्होंने मुशर्रफ़ के साथ किसी भी तरह के कोई समझौते या 'डील' से इनकार किया है. अख़बार के अनुसार नवाज़ शरीफ़ ने कहा है कि मुशर्रफ़ को किसी भी हालत में आसानी से नहीं जाने दिया जाएगा. हिंदुस्तान टाइम्स की सुर्खी है ‘ही इज़ गॉन’ और इसके साथ ही मुशर्रफ़ का 'कैरिकेचर' छापा है और मुशर्रफ़ की तुलना नेपाल के पूर्व राजा ज्ञानेंद्र, फिलीपींस के पूर्व राष्ट्रपति मारकोस और लाइबेरिया के पूर्व राष्ट्रपति चार्ल्स टेलर से की है. ज्ञानेंद्र सत्ता से हटाए जाने के बाद नेपाल में ही अपने एक निजी राजमहल में गुमनामी की ज़िंदगी बिता रहे हैं. जबकि मारकोस 20 साल फिलीपींस पर शासन करने के बाद 1986 में हवाई द्वीप चले गए थे. जहाँ तीन साल बाद उनकी मौत हो गई थी. इसी तरह चार्ल्स टेलर लाइबेरिया छोड़कर तीन साल के लिए नाइजीरिया चले गए थे जहाँ से उन्हें 2006 में अंतरराष्ट्रीय अदालत के हवाले कर दिया गया था. इस तुलना के साथ ही हिंदुस्तान टाइम्स ने सवाल उठाए हैं- क्या मुशर्रफ़ भी देश छोड़कर चले जाएँगे? टाइम्स ऑफ इंडिया ने लिखा है 'कॉरनर्ड मुशर्रफ़ कॉल्स इट क्विट्स' यानि अलग थलग होने पर मुशर्रफ़ ने गद्दी छोड़ी. अख़बार ने मुशर्रफ़ और अटल बिहारी वाजपेयी की वो तस्वीर भी छापी है जब 2001 में जनरल रहते हुए परवेज़ मुशर्रफ़ आगरा बैठक के लिए आए हुए थे. |
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