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बुधवार, 06 अगस्त, 2008 को 15:01 GMT तक के समाचार
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सिमी प्रतिबंध: भाजपा की तीखी प्रतिक्रिया
मालेगाँव धमाके
मालेगाँव धमाकों के बाद पुलिस ने सिमी पर धमाकों से संबंधित होने के आरोप लगाए थे
दिल्ली हाईकोर्ट के एक ट्राइब्यूनल के स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ़ इंडिया (सिमी) पर से प्रतिबंध हटाने के फ़ैसले पर भारतीय जनता पार्टी ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है. कई अन्य राजनीतिक दलों ने भी इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया दी है.

ग़ौरतलब है कि प्रतिबंध हटाने के हाईकोर्ट के फ़ैसले के बाद मामला सुप्रीम कोर्ट में है और सुप्रीम कोर्ट ने फ़िलहाल इस फ़ैसले पर रोक लगा दी है.

सिमी पर से प्रतिबंध हटाने के फ़ैसले पर भाजपा के नेता राजीव प्रताप रूडी ने कहा, "यूपीए की सरकार तुष्टीकरण की नीति अपना रही है. मैं पूछना चाहूँगा कि क्या सरकार सैद्धांतिक रुप से सिमी पर प्रतिबंध के ख़िलाफ़ है? सरकार की कार्यवाही पर हमें संदेह है."

 यूपीए की सरकार तुष्टीकरण की नीति अपना रही है. मैं पूछना चाहूँगा कि क्या सरकार सैद्धांतिक रुप से सिमी पर प्रतिबंध के ख़िलाफ़ है? सरकार की कार्यवाही पर हमें संदेह है
भाजपा नेता रूडी

भारत के गृहमंत्री की कार्य प्रणाली पर सवाल उठाते हुए रूडी ने कहा कि बीजेपी शिवराज पाटिल के इस्तीफ़े की माँग करती है.

उधर कांग्रेस के नेता मनीष तिवारी का कहना है कि सिमी पर से प्रतिबंध हटाने का सवाल नहीं उठता है. उन्होंने कहा, "ये संगठन सरकार के द्वारा आतंकवादी संगठन घोषित किया जा चुका है उस पर से प्रतिबंध हटाने का सवाल हीं नही उठता. सिमी को न सिर्फ़ गैरक़ानूनी संगठन घोषित किया गया है बल्कि इसे सरकार ने आतंकवादी संगठन भी घोषित किया है."

 सिमी को न सिर्फ़ गैरक़ानूनी संगठन घोषित किया गया है बल्कि इसे सरकार ने आतंकवादी संगठन भी घोषित किया है
कांग्रेस प्रवक्ता

उल्लेखनीय है कि दिल्ली हाइकोर्ट के इस फ़ैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम रोक लगा दी है.

सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम रोक के सवाल पर सिमी के वकील मोबीन अख़्तर का कहना था, "सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के विश्लेषण के बाद ही हम इस बारे में जवाब देंगे."

वहीं उन्होंने यह भी कहा, "सिर्फ़ शक की बुनियाद पर ही अभी तक सिमी पर प्रतिबंध लगाया गया था. बिना सबूत के आप उस पर कब तक प्रतिबंध लगा सकते हैं?"

 सिर्फ़ शक की बुनियाद पर ही अभी तक सिमी पर प्रतिबंध लगाया गया था. बिना सबूत के आप उस पर कब तक प्रतिबंध लगा सकते हैं
सिमी के वकील

मोबिन ने कहा कि 50 से ज़्यादा मामलों की सुनवाई और फ़ैसले के बाद भारत की किसी भी अदालत में सिमी के किसी भी कार्यकर्ता को दोषी नहीं साबित किया जा सका है.

सिमी के पूर्व अध्यक्ष क़ासिम रसूल इलियास का कहना था कि सिमी वर्ष 1971 से 2001 तक काम करती रही है लेकिन उस पर प्रतिबंध संयुक्त जनतांत्रिक गठबंधन के शासनकाल में लगाए गए. उन्होंने कहा, "सिमी पर जितने भी मामले दर्ज हुए वह सभी एनडीए के शासन काल में हुए."

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