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शुक्रवार, 01 अगस्त, 2008 को 01:33 GMT तक के समाचार
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ट्रेन में आग: 32 की मौत, कई घायल
रेल राज्यमंत्री ने कहा कि स्पष्ट नहीं है कि आग लगने का कारण क्या था - षड्यंत्र या दुर्घटना
आंध्र प्रदेश में सिकंदराबाद से काकिनाडा जा रही गौतमी एक्सप्रेस में गुरुवार को देर रात आग लग गई. इस घटना में 32 लोग मारे गए हैं और कुछ अन्य घायल हो गए हैं.

बीबीसी के हैदराबाद संवाददाता उमर फ़ारुक़ ने रेल अधिकारियों को यह कहते बताया है कि घटना वारंगल और खम्मम के बीच के समुद्रम में रात एक बजकर दस मिनट पर हुई.

यह स्थान हैदराबाद से कोई दो सौ किलोमीटर दूर है. इस दुर्घटना में बचने वाले लोगों में आंध्र प्रदेश के पशुपालन मंत्री जी सूर्याराव भी हैं.

वारंगल के पुलिस अधीक्षक वीसी सज्जनार ने बीबीसी को बताया कि एस-10 बोगी में आग लगने के बाद यात्रियों ने चेन खींचकर ट्रेन को रोक लिया और अधिकतर यात्री जलती ट्रेन से उतर गए.

पुलिस के अनुसार इस बोगी की आग धीरे-धीरे पाँच बोगियों में फैल गई. पाँचों बोगियाँ जलकर नष्ट हो गई हैं.

 अब तक हमें 32 लोगों के मारे जाने की ख़बर मिली है. मृतकों में से दो लोगों की ही पहचान हो पाई है. फ़िलहाल ये स्पष्ट नहीं है कि ये किसी षड्यंत्र के तहत हुआ या फिर ये दुर्घटना थी. इस घटना की जाँच शुरु हो गई है
आर वेलु, रेल राज्यमंत्री

केंद्रीय रेल राज्यमंत्री आर वेलु ने बीबीसी की तमिल सेवा को बताया, "अब तक हमें 32 लोगों के मारे जाने की ख़बर मिली है. मृतकों में से दो लोगों की ही पहचान हो पाई है. फ़िलहाल ये स्पष्ट नहीं है कि ये किसी षड्यंत्र के तहत हुआ या फिर ये दुर्घटना थी. इस घटना की जाँच शुरु हो गई है."

घने जंगलों के बीच

हादसे में सकुशल बच गए आंध्र प्रदेश के पशुपालन मंत्री जी सूर्याराव ने टेलीफ़ोन पर बताया कि घटनास्थल जंगल के बीच है और वहाँ पहुँचने के लिए रेलमार्ग ही एक सुगम रास्ता है.

उन्होंने कहा, "घने जंगलों के बीच जब दुर्घटना हुई तो एक तरफ़ आग भड़क रही थी और दूसरी ओर घना अंधेरा था."

उन्होंने कहा, "यात्रियों में अफ़रा-तफ़री मची हुई थी और लोग इधर-उधर भाग रहे थे क्योंकि उन्हें समझ में नहीं आ रहा था कि वे क्या करें. मैंने दो लोगों को अपने सामने जलते हुए देखा."

रेल अधिकारियों ने दूसरी लाइन पर यातायात रोककर रिलीफ़ ट्रेन को वहाँ भेजा. राहत दल चिकित्सकों के एक दल के साथ शुक्रवार को सुबह घटनास्थल पर पहुँच गया है.

 यात्रियों में अफ़रा-तफ़री मची हुई थी और लोग इधर-उधर भाग रहे थे क्योंकि उन्हें समझ में नहीं आ रहा था कि वे क्या करें. मैंने दो लोगों को अपने सामने जलते हुए देखा
जी सूर्याराव

हादसे की ख़बर मिलने के बाद इस मार्ग पर दूसरी ट्रेनों को या तो रद्द कर दिया गया है या फिर उनका रास्ता बदल दिया गया है.

अधिकारियों का कहना है कि आग बोगी एस-10 से शुरु हुई और फिर देखते ही देखते एस-9, एस-11, 12 और 13 तक फैल गई.

गंभीर रुप से घायल चार लोगों को पहले पास के मायपाडु अस्पताल ले जाया गया फिर वारंगल के अस्पताल में पहुँचाया गया है.

फँसे हुए यात्रियों को उनके गंतव्य तक पहुँचाने के लिए एक दूसरी ट्रेन को रवाना किया गया है.

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