BBCHindi.com
अँग्रेज़ी- दक्षिण एशिया
उर्दू
बंगाली
नेपाली
तमिल
गुरुवार, 26 जून, 2008 को 08:18 GMT तक के समाचार
मित्र को भेजेंकहानी छापें
'भारत की जेलों में हज़ारों की मौत'
भारत की एक जेल
संवाददाता सम्मेलन में दावा किया कि अधिकतर लोगों की मौत उत्पीड़न की वजह से हुई
दिल्ली के मानवाधिकार संगठन 'एशियन सेंटर फ़ॉर ह्यूमन राइट्स' के अनुसार भारतीय जेलों में और पुलिस हिरासत में पिछले पाँच साल में 7468 लोगों की मृत्यु हुई है.

एशियन सेंटर ने एक संवाददाता सम्मेलन में दावा किया कि इनमें से ज़्यादातर लोगों की मृत्यु उत्पीड़न की वजह से हुई है.

पूछे जाने पर एशियन सेंटर ने माना कि उन्होंने इन सभी 7468 मामलों की जाँच तो नहीं की है लेकिन 7468 का आंकड़ा राष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन से उसे प्राप्त हुआ है और ये सब शिकायते राष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन के पास दर्ज हैं.

एशियन सेंटर के अनुसार भारत सरकार ने इस रिपोर्ट को मानने से इनकार किया है और जब गृह मंत्रालय से इस बारे में पूछा गया तो जवाब मिला कि - 'ये मौतें बीमारी, प्राकृतिक मौत, हिरासत से भागने, आत्महत्या, दंगों, दुर्घटनाओं या फिर अस्पताल में चिकित्सा के दौरान या फिर अन्य अपराधियों के हमलों के कारण हुई हैं.'

इस रिपोर्ट के अनुसार हालांकि जेलों के कई कर्मचारियों और अधिकारियों के ख़िलाफ़ क़ानूनी कार्रवाई की जा चुकी है लेकिन इसके बावजूद भी जेलों में हो रहे 'अपराध पर पर्दा डालने की कोशिश' की जाती है.

वर्ष 2002 के बाद से जमा किए गए इन आंकड़े को अगर रोज़ाना के हिसाब से देखा जाए तो, हर दिन चार लोगों की मौत हुई है.

मौतों की वजह यातना

'एशियन सेंटर फ़ॉर ह्यूमन राइट्स' के निदेशक सुहास चकमा का कहना है, "जेलों में हो रहे अत्याचार और मौतों के पीछे जो अधिकारी ज़िम्मेदार हैं, भारत में उन्हें दोषी साबित करने में ही बरसों लग जाते हैं जिसकी वजह से ये आंकड़े बढ़ते ही जा रहे हैं."

 जेलों में हो रहे अत्याचार और मौतों के पीछे जो अधिकारी ज़िम्मेदार हैं, भारत में उन्हें दोषी साबित करने में ही बरसों लग जाते हैं जिसकी वजह से ये आंकड़े बढ़ते ही जा रहे हैं
सुहास चकमा, संगठन के निदेशक

चकमा का कहना है कि किसी भी जेल कर्मचारी या अधिकारी को सज़ा दिलाने में 25-30 साल लग जाते हैं और इतने लंबे वक्त के गुज़रने के दौरान या तो अभियुक्त की मौत हो जाती है या कई बार उसके ख़िलाफ़ अदालत में याचिका दायर करने वाला व्यक्ति ही मर चुका होता है.

इस रिपोर्ट में ये भी बताया गया है कि भारत सरकार के ख़िलाफ़ आंदोलन चला रहे संगठनों के यातना देने का रिकॉर्ड भी ख़ासा ख़राब है. रिपोर्ट में खासकर माओवादियों की कार्रवाइयों पर चर्चा की गई है.

इस मानवाधिकार संगठन ने मांग की है कि भारत सरकार को जेलों में मौत के इन आंकड़ों पर ध्यान देना चाहिए.

संगठन का कहना है कि भारत सरकार को चाहिए कि वो जेलों में दी जाने वाली यातना के ख़िलाफ़ एक कठोर आपराधिक क़ानून बनाए और यातना के ख़िलाफ़ संयुक्त राष्ट्र द्वारा अपनाए जा रहे नियमों को अपनाना चाहिए.

जेल में 'रूम सर्विस'
जेब में माल हो तो पहरेदार वेटर बनने को तैयार हैं, रेट के लिए गजट देखें.
फ़िल्म अभिनेता सलमान ख़ानकैटरीना मिलने पहुँची
सलमान ख़ान की दोस्त कैटरीना कैफ़ उनसे मिलने जोधपुर जेल पहुँचीं.
क़ैदी (फ़ाइल फ़ोटो)दाढ़ी बढ़ाने का विवाद
भोपाल सेंट्रल जेल में दाढ़ी न बढ़ाने दिए जाने से मुस्लिम क़ैदी नाराज़ हैं.
इससे जुड़ी ख़बरें
जेल में क़ैदी और पुलिसकर्मी भिड़े
17 दिसंबर, 2006 | भारत और पड़ोस
जलंधर जेल में क़ैदी भड़के, आगजनी
07 जनवरी, 2008 | भारत और पड़ोस
काली रातें, काले दिन
| भारत और पड़ोस
सुर्ख़ियो में
मित्र को भेजेंकहानी छापें
मौसम|हम कौन हैं|हमारा पता|गोपनीयता|मदद चाहिए
BBC Copyright Logo^^ वापस ऊपर चलें
पहला पन्ना|भारत और पड़ोस|खेल की दुनिया|मनोरंजन एक्सप्रेस|आपकी राय|कुछ और जानिए
BBC News >> | BBC Sport >> | BBC Weather >> | BBC World Service >> | BBC Languages >>