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मंगलवार, 10 जून, 2008 को 09:09 GMT तक के समाचार
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दार्जिलिंग में हज़ारों पर्यटक फँसे

दार्जिलिंग
बंद के कारण दार्जिलिंग के पर्यटन उद्योग पर भारी प्रभाव पड़ा है
भारत के प्रमुख पर्यटन क्षेत्र दार्जिलिंग में अनिश्चितकालीन हड़ताल के कारण हज़ारों पर्यटक वहाँ फँस गए हैं.

गोरखा जनमुक्ति मोर्चा (जीजेएम) के सचिव रोशन गिरि ने सभी पर्यटकों को वापस चले जाने को कहा है.

बंद के कारण क्षेत्र के सभी तीन ज़िलों कलिगंपोंग, दार्जिलिंग व कुर्सेओंग में जनजीवन अस्तव्यस्त हो गया है.

दार्जिलिंग होटल एसोसिएशन के प्रमुख सांगे भूटिया का कहना है कि सभी पर्यटकों को नीचे मैदानों में ले जाने के लिए पर्याप्त संख्या में गाड़ियाँ उपलब्ध नहीं हैं.

स्थानीय निवासी दीपंकर दासगुप्ता ने कहा,'' दार्जिलिंग में जनजीवन पूरी तरह ठप है. मुझे समझ नहीं आता की सारे लोगों को मैदानों में इतना जल्दी कैसे ले जाया जा सकता है.''

गोरखा जनमुक्ति मोर्चा ने अपने समर्थकों पर राज्य की सत्तारूढ़ मार्क्सवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं के हमले का आरोप लगाते हुए इसके विरोध में सोमवार को हड़ताल का आह्वान किया था.

कम्युनिस्टों ने इस आरोप का विरोध किया है. दार्जिलिंग पश्चिम बंगाल राज्य के उत्तर में स्थित है.

क्षेत्र में सैकड़ों चाय बागान हैं जहाँ अपनी खुशबू के लिए जानी जाने वाली दार्जिलिंग चाय का उत्पादन होता है.

हड़ताल का प्रभाव

गोरखा 1980 से अपने लिए एक अलग गोरखा राज्य की माँग कर रहे थे लेकिन बाद में वे क्षेत्रीय स्वायत्तता के लिए राजी हो गए थे.

 सभी पर्यटकों को नीचे मैदानों में ले जाने के लिए पर्याप्त संख्या में गाड़ियाँ उपलब्ध नहीं हैं
सांगे भूटिया, दार्जिलिंग होटल एसोसिएशन के प्रमुख

अभी पिछले ही दिनों गठित हुए गोरखा जनमुक्ति मोर्चा ने अलग राज्य के संघर्ष को फिर से दोहराया है. मोर्चा इलाके के मुख्य दल गोरखा लिबरेशन फ्रंट से टूट कर बना है.

क्षेत्र के तीनों ज़िले दार्जिलिंग, कलिमपोंग और कुर्सेओंग इस हड़ताल से प्रभावित हैं.

गोरखा जनमुक्ति मोर्चा (जीजेएम) के सचिव रोशन गिरि कहते हैं, "दार्जिलिंग और आसपास की निचली पहाड़ियों में स्थिति काफ़ी तनावपूर्ण है."

गिरी का आरोप है कि उनके कुछ पार्टी कार्यकर्ताओं पर रविवार को सत्तारूढ़ मार्क्सवादी पार्टी के समर्थकों ने हमला किया.

उनका कहना था,'' पश्चिम बंगाल सरकार से हमारा विश्वास उठ गया है. इसलिए हम अनिश्चितकालीन हड़ताल करने के लिए मजबूर हो गए हैं.''

उधर, मार्क्सवादी पार्टी ने ऐसे किसी हमले से इनकार किया है.

दार्जिलिंग की पहाड़ियों में नेपालीभाषी गोरखा बहुसंख्यक हैं जबकि निचली पहाड़ियों में बंग्लाभाषी और हिंदीभाषियों का बाहुल्य है.

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