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वामपंथी करेंगे देश भर में आंदोलन | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
आम चुनावों से महज़ साल भर पहले हुई पेट्रोलियम पदार्थो की क़ीमतों में वृद्धि के चलते राजनीतिक तूफ़ान खड़ा हो गया है. सरकार को बाहर से समर्थन दे रहे सबसे बड़े वामदल मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव प्रकाश करात ने सरकार के इस क़दम कि तीखी आलोचना की है. उन्होंने कहा, "पहले से ही महंगाई कि मार झेल रहे आम आदमी पर इस वृद्धि का बहुत बुरा असर पड़ेगा." करात ने मूल्य वृद्धि को गैरज़रूरी बताया और कहा कि आम आदमी की जगह सरकार को मोटा मुनाफ़ा बना रही निजी क्षेत्र की तेल कंपनियों पर अधिक कर लगाना चाहिए. वाम मोर्चे ने इस मूल्य वृद्धि के ख़िलाफ़ सड़क पर उतरने कि घोषणा की है. वाम दल देश भर में पाँच जून से ग्यारह जून तक देशव्यापी आंदोलन करेंगें. करात ने कम्युनिस्ट शासित पश्चिम बंगाल, केरल और त्रिपुरा में कल आम हड़ताल की घोषणा की है. 'आर्थिक आतंक' देश में मुख्य विपक्षी दल भाजपा ने इसे काला दिन और आर्थिक आतंक करार दिया है. पार्टी के प्रवक्ता रविशंकर प्रसाद ने सरकार पर तीख़ा हमला बोलते हुए कहा है कि सरकार आर्थिक प्रबंधन में पूरी तरह से विफल हो गई है. कांग्रेस प्रवक्ता के इस प्रश्न पर कि भाजपा सत्ता में होती तो क्या करती इस पर उनका कहना था,"हम सरकार में रह चुके हैं और महंगाई को कैसे काबू में करना है हम जानते हैं. अगर वो ये नहीं कर सकते तो सत्ता छोड़ दें. हम ये फिर से कर के दिखा देंगें." पार्टी के दूसरे प्रवक्ता प्रकाश जावडेकर का कहना है कि पेट्रोलियम उत्पाद विलासिता की वस्तु नहीं है और इन पर इतनी मूल्या वृद्धि को कतई जायज़ नहीं ठहराया जा सकता. | इससे जुड़ी ख़बरें पेट्रोल पाँच, डीज़ल तीन रुपए महंगा04 जून, 2008 | कारोबार 'विकास दर को बचाते हुए थामेंगे महँगाई'02 जून, 2008 | भारत और पड़ोस पेट्रोलियम की क़ीमतों पर विचार-विमर्श30 मई, 2008 | कारोबार 'तेल पर कोई अतिरिक्त पेट्रोल कर नहीं'28 मई, 2008 | भारत और पड़ोस बजट: महँगाई और आम आदमी23 फ़रवरी, 2008 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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