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मंगलवार, 27 मई, 2008 को 13:36 GMT तक के समाचार
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रोज़गार में भ्रष्टाचार

काम करते लोग
अधिकारियों का कहना है कि रोज़गार कार्यक्रम के लिए लोग आगे नहीं आते हैं जबकि ग्रामीण अवसर के लिए तरसते हैं
झारखंड के नक्सल प्रभावित पलामू ज़िले के अधिकारी कहते हैं कि राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार गारंटी योजना के अंतर्गत काम के लिए लोग नहीं मिल रहे हैं.

अधिकारियों का यह भी कहना है कि रोज़गार कार्यक्रम का प्रचार प्रसार तो ज़ोर-शोर से किया जा रहा है मगर काम करने के लिए ग्रामीण लोग आगे ही नहीं आते हैं.

पलामू ही क्यों, झारखंड के लगभग हर सुदूर इलाके का यही हाल है.

इन सबके मद्देनज़र इलाहाबाद के जीबी पंत सामाजिक विज्ञान संस्थान ने पलामू ज़िले में रोज़गार कार्यक्रम का सामाजिक अन्वेषण (या सोशल ऑडिट) शुरू किया.

यह काम जाने-माने अर्थशास्त्री और सामाजिक कार्यकर्ता ज्यों द्रेज के नेतृत्व में शुरू हुआ. मगर जब इस अभियान से जुड़े ललित मेहता की 14 मई को हत्या कर दी गई तो झारखंड में रोज़गार कार्यक्रम की पोल खुल गई.

पेशे से इंजीनियर, ललित मेहता सहयोग विकास केंद्र नामक संस्था के माध्यम से रोज़गार गारंटी योजना में फैले भ्रष्टाचार को उजागर करने की मुहिम चला रहे थे.

पलामू के चत्तारपुर स्थित राजकीय हाई स्कूल में रोज़गार गारंटी कार्यक्रम में हो रही कथित गड़बड़ी को लेकर सोमवार को जनसुनवाई का आयोजन किया गया तो इस योजना की असलियत अधिकारियों के सामने आ गई.

सच्चाई

सैकडों गाँवों से हज़ारों की संख्या में उपस्थित ग्रामीणों नें इस योजना के क्रियान्वयन में हो रही धांधलियों पर से एक-एक कर परत उठानी शुरू कर दी तो वहाँ मौजूद अधिकारियों को समझ में नहीं आया कि वो क्या करें.

ललित मेहता की हत्या का विरोध
राष्ट्रीय रोज़गार गारंटी में फैला भ्रष्टाचार इस कार्यक्रम की कामयाबी में सबसे बड़ा रोड़ा है

जनसुनवाई के दौरान सामाजिक कार्यकर्ता ज्यों द्रेज नें लोगों से पूछा, "आपमें से किसे सौ दिनों तक काम मिलता है?"

किसी का हाथ नहीं उठा. फिर द्रेज़ ने पूछा, "आप में से किसे सौ दिन का काम चाहिए?" बस इतना पूछने पर पलामू के चत्तारपुर इलाक़े में जन सुनवाई के लिए जमा हज़ारों ग्रामीणों नें अपने हाथ उठा दिए.

पंचायत सेवकों और ब्लाक ऑफिस के कर्मचारियों की रिश्वतखोरी, फ़र्जी मस्टर रोल, जाली आवेदन, जॉब कार्ड में फ़र्जी नाम, पैसों की फ़र्जी निकासी और बिचौलियों का बोलबाला – यही है झारखंड में रोज़गार गारंटी योजना का सच जो जनसुनवाई के दौरान सामने आया.

ज्यों द्रेज के अलावा जनसुनवाई में रोज़गार कार्यक्रम राष्ट्रीय परिषद् की सदस्य एन्नी राजा, झारखंड सरकार के रोज़गार कार्यक्रम आयुक्त अमिताभ कौशल और पलामू के ज़िला अधिकारी एन पी सिंह भी मौजूद थे.

भाकपा नेता एन्नी राजा ने कहा कि दूसरे राज्यों में योजनाओं में 100 से 300 लोग एक साथ काम करते हैं जबकि झारखंड में 10 लोग भी एक जगह काम नहीं कर पाते हैं.

जन सुनवाई में मौजूद राज्य के रोज़गार कार्यक्रम आयुक्त अमिताभ कौशल ने योजना में गड़बड़ियों की बात स्वीकार करते हुए कहा कि 77 अधिकारियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई करने के निर्देश दे दिए गए हैं. कौशल का कहना था कि झारखंड में पंचायत चुनाव का नहीं होना रोज़गार कार्यक्रम की राह में सबसे बड़ी बाधा है.

काम करते लोग
जन सुनवाई में मौजूद राज्य के रोज़गार कार्यक्रम आयुक्त अमिताभ कौशल नें योजना में गड़बड़ियों की बात स्वीकार की

मगर एन्नी नें सरकार की दलील को ठुकराते हुए पूछा कि अगर झारखंड में पंचायत चुनाव नहीं हुए हैं तो क्या कार्यक्रम को बंद कर दिया जाए? "ऐसा बोलने से काम नहीं चलेगा".

एन्नी राजा लोगों की शिकायत सुनती गईं और वहाँ मौजूद अधिकारियों को कटघरे में खड़ा करती गईं. वह सवाल पूछती रहीं और अधिकारियों के चेहरे सूखते चले गए.

सोनिया दुखी

रोज़गार कार्यक्रम के सामाजिक अन्वेषण से जुड़े ललित मेहता की हत्या पर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी अपनी संवेदना प्रकट कर चुकी हैं.

उन्होंने राष्ट्रीय रोज़गार कार्यक्रम राष्ट्रीय परिषद की सदस्य एन्नी राजा को भेजे गए एक पत्र में कहा, "मेरी जानकारी के मुताबिक ललित मेहता भूख से मुक्ति, ग्राम स्वराज और रोज़गार कार्यक्रम के सामाजिक अन्वेषण में सहयोग दे रहे थे."

"इस सामजिक कार्यकर्ता की निर्मम हत्या कर दी गई. मेरी तरफ़ से उनके परिवार को हार्दिक संवेदना. उनके दुःख व हत्या से उपजे आक्रोश में मैं शामिल हूँ."

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