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फिर भड़का गुर्जर आंदोलन | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
राजस्थान में ख़ुद को अनुसूचित जनजाति का दर्जा दिए जाने की माँग कर रहे गुर्जर समुदाय के लोगों का उग्र आंदोलन शुक्रवार से फिर शुरू हो गया है. शुक्रवार को बयाना में पुलिस ने गुर्जर आंदोलनकारियों को रोकने के लिए फ़ायरिंग भी की जिसके बाद हिंसा भड़क उठी और अभी तक पाँच लोगों के मारे जाने की ख़बर आ रही है. राज्य सरकार ने आशंका जताई है कि कुछ और शव प्रदर्शन कर रहे गुर्जरों के पास हो सकते हैं पर उनके बारे में कोई पुष्ट जानकारी नहीं मिल सकी है. मृतकों में एक पुलिसकर्मी औऱ चार प्रदर्शनकारी शामिल हैं. इस दौरान 20 से ज़्यादा लोगों के घायल होने की ख़बर है जिसमें से कुछ की हालत गंभीर बताई जा रही है. राज्य के गृहमंत्री गुलाब चंद कटारिया ने बताया है कि लगभग सात और शव प्रदर्शन कर रहे लोगों के पास हो सकते हैं पर प्रशासन अभी तक इसकी पुष्टि कर पाने या उनसे शव बरामद कर पाने में अक्षम रहा है. गुर्जरों का प्रदर्शन राज्य के बयाना इलाके में शुक्रवार की सुबह से ही अपनी माँगों को लेकर गुर्जर प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतर आए और साथ ही रेल यातायात भी बंद कर दिया. क़रीब तीन हज़ार की तादाद में गुर्जर दिल्ली से मुंबई को जोड़ने वाले मुख्य रेलमार्ग पर धरना देकर बैठ गए हैं. इसके बाद से रेल अधिकारियों ने इस रूट से रेल यातायात रोक दिया है. ग़ौरतलब है कि क़रीब 30 प्रमुख रेलगाड़ियों इस रेलमार्ग से गुज़रती हैं. रेल अधिकारी अब यह तय करने की कोशिश कर रहे हैं कि मुंबई की ओर जाने वाली ट्रेनों के लिए क्या रूट निर्धारित किया जाए ताकि बिना किसी हिंसा और नुकसान के लोगों को यात्रा का मौका मिल सके. इस दौरान पुलिस ने गुर्जर आंदोलनकारियों को रोकने और तितर-बितर करने के लिए आँसूगैस के गोले दागे हैं और लाठीचार्ज किया है. उग्र आंदोलन राज्य के गृह मंत्री गुलाब चंद कटारिया ने बताया कि अगर स्थितियों को नियंत्रित करने के लिए सेना की ज़रूरत पड़ी तो उनकी भी मदद ली जाएगी. फिलहाल बड़ी तादाद में अर्धसैनिक बलों और पुलिस की तैनाती आंदोलन से प्रभावित इलाकों में कर दी गई है. राज्य सरकार का कहना है कि फ़ायरिंग की स्थिति तब पैदा हुई जब पुलिसबलों पर पथराव और हिंसक हमले शुरू हो गए. इन हमलों में एक पुलिसकर्मी की मौत हो गई जिसके बाद पुलिस को मजबूरन आंदोलनकारियों पर गोली चलानी पड़ी. गृहमंत्री कटारिया ने बताया कि प्रदर्शन से पहले राज्य सरकार ने गुर्जर नेताओं से संपर्क भी किया था ताकि शुक्रवार को हिंसा की स्थिति पैदा न हो सके.
शुक्रवार के आंदोलन के मद्देनज़र दौसा, करोली, सवाई माधोपुर और भरतपुर ज़िलों में पहले ही निषेधाज्ञा लागू कर दी गई है. इस ज़िलों में हिंसा रोकने के लिए 10 से ज़्यादा सुरक्षाबलों की कंपनियाँ तैनात की गई हैं. आरक्षण की माँग राजस्थान में गुर्जर समुदाय की अनुसूचित जनजाति की श्रेणी में शामिल किए जाने की माँग पिछले कुछ महीनों में उग्र हुई है. राज्य सरकार और केंद्र के समक्ष इस माँग को लेकर गुर्जरों ने पिछले एक वर्ष के दौरान काफ़ी उग्र प्रदर्शन किया जिस दौरान कई लोगों की जानें भी गईं. गुर्जरों के इस आंदोलन को लेकर पिछले दिनों में राजनीति भी होती रही है. साथ ही अन्य राज्यों के गुर्जर समुदाय के लोगों ने भी राजस्थान के गुर्जरों के आंदोलन को अपना समर्थन दिया था. इस आंदोलन का असर दिल्ली, यूपी और हरियाणा में भी देखने को मिला था. राजस्थान के गुर्जरों का तर्क है कि अन्य राज्यों की तरह राजस्थान में भी उन्हें अनुसूचित जनजाति की श्रेणी में शामिल किया जाना चाहिए. राज्य सरकार के लिए राज्य में आगामी विधानसभा चुनावों से ठीक पहले इस आंदोलन के फिर से उग्र होना गले में हड्डी साबित हो सकता है. | इससे जुड़ी ख़बरें गूजरों को आरक्षण का एक और प्रस्ताव18 जनवरी, 2008 | भारत और पड़ोस गूजरों ने दिल्ली में भी रास्ता रोका31 मई, 2007 | भारत और पड़ोस राजस्थान: गतिरोध समाप्त करने के प्रयास30 मई, 2007 | भारत और पड़ोस राजस्थान: मंत्रियों की समिति गठित30 मई, 2007 | भारत और पड़ोस राजस्थान में तनाव, सेना बुलाई गई29 मई, 2007 | भारत और पड़ोस राजस्थान में गूजर-पुलिस संघर्ष29 मई, 2007 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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