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बुधवार, 07 मई, 2008 को 20:08 GMT तक के समाचार
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प्रचंड और राजा ज्ञानेंद्र की मुलाक़ात होगी
प्रचंड
प्रचंड ने साफ़ कर दिया है कि राजशाही का ख़त्म होना तय है
नेपाल के माओवादी नेता प्रचंड का कहना है कि उन्हें राजमहल से संकेत मिले हैं कि राजा ज्ञानेंद्र उनसे मिलना चाहते हैं जिससे कि राजशाही के भविष्य पर चर्चा हो सके.

पूर्व विद्रोही नेता प्रचंड ने कहा है कि वे राजा से मिलने को तैयार हैं जिससे कि राजशाही ख़त्म होने के बाद राजा ज्ञानेंद्र की सम्मानपूर्वक विदाई का रास्ता निकाला जा सके.

माओवादी नेता पुष्प कमल दहल यानी प्रचंड की पार्टी ने पिछले महीने हुए चुनाव में सबसे ज़्यादा सीटें जीती हैं.

उनका कहना है कि नेपाल में माओवादी सरकार का नेतृत्व करेंगे.

राजशाही ख़त्म होगी

प्रचंड ने राजा ज्ञानेंद्र के प्रति अपनी नापंसदगी को कभी छिपाया भी नहीं और अक्सर उनके लिए अपमानजनक शब्दों का प्रयोग करते रहे.

हालांकि पिछले महीने संविधान सभा के चुनाव जीतने के बाद उन्होंने कहा कि वे राजा से मिलने को तैयार हैं.

अब उन्होंने बीबीसी से कहा है कि राजमहल से उनके प्रस्ताव पर सकारात्मक संकेत मिले हैं.

हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया है कि राजा से बातचीत सिर्फ़ राजशाही को ख़त्म करने को लेकर ही हो सकती है और यह बात राजा को स्पष्ट होनी चाहिए.

उन्होंने कहा, "यदि राजा जनादेश का आदर नहीं करते हैं और कोई चालाकी करना चाहते हैं तो इसमें उनका, उनके परिवार का और देश का नुक़सान है. मैं उम्मीद करती हूँ कि वे कोई मूर्खतापूर्ण क़दम नहीं उठाएँगे."

राजा ज्ञानेंद्र
राजा ज्ञानेंद्र के काफ़ी अधिकार पहले ही छीने जा चुके हैं

प्रचंड ने कहा कि वे उम्मीद कर रहे हैं कि जिस दिन संविधान सभा की पहली बैठक होगी राजा ख़ुद ही अपने पद से इस्तीफ़ा दे देंगे.

इस सभा को नेपाल को गणतंत्र में बदलने के लिए संविधान तैयार करना है.

प्रचंड का कहना है कि यदि राजा ऐसा करते हैं तो वे नए नेपाल के निर्माण के लिए एक उदाहरण पेश करेंगे.

उल्लेखनीय है कि प्रचंड की माओवादी पार्टी एक दशक तक नेपाल सरकार के साथ हथियारबंद संघर्ष करती रही और इस दौरान 13 हज़ार से भी अधिक लोग मारे गए.

दो साल पहले हुए जनांदोलन के बाद उन्होंने मुख्यधारा की राजनीति में आना स्वीकार किया और हथियार छोड़कर बहुदलीय सरकार में शामिल हुए.

माओवादियों और सेना के बीच संबंध हमेशा तनावपूर्ण रहे हैं, लेकिन अब प्रचंड ने कहा है कि वे लोकतांत्रिक ढंग से चुने गए सरकार में काम करेंगे और सेना के किसी कामकाज में वे दखलंदाज़ी नहीं करेंगे.

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