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शिवानी भटनागर हत्या में चार दोषी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
दिल्ली की एक अदालत ने 1999 में पत्रकार शिवानी भटनागर की हत्या के मामले में भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के एक वरिष्ठ अधिकारी आरके शर्मा सहित चार अभियुक्तों को दोषी क़रार दिया है. शर्मा पुलिस महानिरीक्षक के पद से निलंबित चल रहे थे. दिल्ली की इस विशेष अदालत के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश राजेंद्र कुमार शास्त्री ने आरके शर्मा को शिवानी भटनागर की हत्या की साज़िश रचने का दोषी पाया है. कहा जाता है कि शिवानी भटनागर ने शर्मा को धमकी दी थी कि उन्होंने नौ साल पहले जो कुछ गोपनीय दस्तावेज़ उसे दिए थे, वह उनके बारे में शर्मा का भंडाफोड़ कर देगी. आईपीएस अधिकारी आरके शर्मा को भारतीय दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 302, 120बी और 201 के तहत दोषी क़रार दिया गया है. तीन अन्य अभियुक्तों भगवान शर्मा, प्रदीप शर्मा और सत्यप्रकाश को भी शिवानी भटनागर की हत्या करने की शर्मा की साज़िश को अंजाम देने का दोषी क़रार दिया गया है. उन पर सबूतों को नष्ट करने का भी आरोप साबित हुआ है. अदालत में जब यह फ़ैसला सुनाया गया तो आरके शर्मा वहाँ मौजूद थे. दो अन्य अभियुक्त वेद प्रकाश शर्मा और वेद प्रकाश उर्फ़ कालू को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया है. सज़ा अदालत इन दोषी पाए गए मुजरिमों के लिए सज़ा का फ़ैसला 20 मार्च को सुनाएगी. इनकी सज़ा उम्रक़ैद से लेकर मृत्युदंड तक हो सकती है. इस मुक़दमे में कुल 209 गवाह पेश हुए लेकिन उनमें से 51 ने कई अपने बयान पलट दिए थे हालाँकि पुलिस, जाँच एजेंसियों और अभियोजन पक्ष ने घटनाक्रम में तारतम्य और सबूतों को जोड़कर अभियुक्तों के ख़िलाफ़ ये मामला निर्धारित किया है. यह मुक़दमा लगभग नौ साल तक चला. भारत के एक अंग्रेज़ी दैनिक द इंडियन एक्सप्रेस की वरिष्ठ पत्रकार शिवानी भटनागर की 23 जनवरी 1999 को दिल्ली में हत्या कर दी गई थी. शर्मा सहित कुल छह लोगों पर इस मामले में धारा 302 (हत्या), 120बी (साज़िश), 201 (सबूतों को नष्ट करना), 403 और 404 (संपत्ति के बारे में ग़लत जानकारी देना) के तहत आरोप निर्धारित किए गए थे. अभियोजन पक्ष ने दावा किया था कि शिवानी भटनागर पहली बार आरके शर्मा से तब मिली थीं जब शर्मा प्रधानमंत्री इंद्रकुमार गुजराल के कार्यालय में विशेषाधिकारी थे. अदालत में सुनवाई के दौरान सामने आई जानकारी के अनुसार बाद में शिवानी भटनागर और रविकांत शर्मा के बीच प्रेम संबंध बन गए और उसी दौरान शर्मा ने शिवानी को कुछ गोपनीय दस्तावेज़ दिखाए जिनमें सेंट किट्स मामले से संबंधित भी कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेज़ थे. जानकारी के अनुसार बाद में आरके शर्मा ने शिवानी भटनागर से विवाह करने से इनकार कर दिया तो शिवानी भटनागर ने कथित तौर पर रविकांत शर्मा का भंडाफोड़ करने की धमकी दी. अदालत को बताया गया कि उसके बाद शर्मा ने शिवानी की हत्या करने का फ़ैसला कर लिया. शिवानी भटनागर अपने मकान में अपने छोटे से बेटे के साथ रहती थी जब उसकी हत्या की गई. आरोप थे कि हत्यारों ने बिजली के एक तार से शिवानी भटनागर का गला घोंट दिया और किचन में इस्तेमाल होने वाले चाकू से उस पर कम से कम दस वार किए. लगभग तीन साल तक शिवानी भटनागर के हत्याकांड मामले की जाँच में कोई प्रगति नहीं हुई थी लेकिन मुक़दमे के दौरान एक स्तर पर शक के तार शर्मा की तरफ़ मुड़े और शिवानी भटनागर को रास्ते से हटाने की साज़िश का भंडाफोड़ हुआ. शर्मा ने कई महीनों तक फरार रहने के बाद आख़िरकार अगस्त 2002 में अंबाला की एक अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया. गिरफ़्तारी के समय वे पुलिस महानिरीक्षक (कारावास) थे. पुलिस ने बाद में श्रीभगवान को भी गिरफ़्तार कर लिया था. पुलिस ने दावा किया था कि रविकांत शर्मा ने सहअभियुक्त सत्यप्रकाश, श्रीभगवान, वेद प्रकाश शर्मा और वेद उर्फ़ कालू से दिसंबर 1998 में दिल्ली के अशोक होटल में मुलाक़ात की थी. अभियुक्तों के वकील ने कहा है कि वे इस फ़ैसले के ख़िलाफ़ हाई कोर्ट में अपील करेंगे. | इससे जुड़ी ख़बरें आज हो सकती है मट्टू मामले में सज़ा30 अक्तूबर, 2006 | भारत और पड़ोस संतोष सिंह की मौत की सज़ा पर रोक19 फ़रवरी, 2007 | भारत और पड़ोस मनु शर्मा ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की02 फ़रवरी, 2007 | भारत और पड़ोस तीन गवाहों के ख़िलाफ़ ग़ैर ज़मानती वारंट01 फ़रवरी, 2007 | भारत और पड़ोस जेसिका मामले में मनु शर्मा को उम्र क़ैद20 दिसंबर, 2006 | भारत और पड़ोस जेसिका हत्याकांड में मनु शर्मा दोषी करार18 दिसंबर, 2006 | भारत और पड़ोस जेसिका मामले में हाईकोर्ट का फ़ैसला18 दिसंबर, 2006 | भारत और पड़ोस 'जेसिका मामला दूसरी अदालत में चले'03 नवंबर, 2006 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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