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संतोष सिंह की मौत की सज़ा पर रोक | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत मे सुप्रीम कोर्ट ने प्रियदर्शिनी मट्टू हत्याकांड मामले में संतोष कुमार सिंह को मिली मौत की सज़ा पर रोक लगा दी है. पिछले वर्ष अक्तूबर में दिल्ली उच्च न्यायालय ने प्रियदर्शिनी मट्टू हत्याकांड में दोषी पाए गए संतोष कुमार सिंह को मौत की सज़ा सुनाई थी. संतोष कुमार सिंह की अपील पर मुख्य न्यायाधीश केजी बालाकृष्णन की अध्यक्षता वाले बेंच ने सीबीआई को नोटिस जारी किया है. संतोष कुमार सिंह ने उन्हें मौत की सज़ा दिए जाने के दिल्ली हाई कोर्ट के फ़ैसले को चुनौती दी है. संतोष कुमार सिंह एक वकील है और भारतीय पुलिस सेवा के एक वरिष्ठ अधिकारी का पुत्र है. प्रियदर्शिनी हत्याकांड मामले में संतोष कुमार सिंह को पहले 1999 में निचली अदालत ने सबूतों के अभाव में बरी कर दिया था. इसके बाद विभिन्न सामाजिक संगठनों ने इस मामले में न्याय के लिए मीडिया के सहयोग से अभियान चलाया. फिर छह साल बाद मामले की सुनवाई नए सिरे से दिल्ली उच्च न्यायालय में शुरु हुई और सप्ताह में तीन दिन सुनवाई के आदेश दिए गए. इसके बाद कोर्ट में चले मुकदमे में दिल्ली हाई कोर्ट ने संतोष कुमार सिंह को दोषी पाते हुए मौत की सज़ा सुनाई थी. प्रियदर्शिनी मट्टू की वर्ष 1996 में बलात्कार के बाद हत्या कर दी गई थी. उस समय प्रियदर्शिनी की उम्र 23 साल थी और वह कानून की पढ़ाई कर रही थीं. | इससे जुड़ी ख़बरें प्रियदर्शिनी के हत्यारे को मौत की सज़ा30 अक्तूबर, 2006 | भारत और पड़ोस परिवारजनों ने 'न्याय की जीत बताया'17 अक्तूबर, 2006 | भारत और पड़ोस असली जीत अब भी है बहुत दूर17 अक्तूबर, 2006 | भारत और पड़ोस जेसिका मामले में मनु शर्मा को उम्र क़ैद20 दिसंबर, 2006 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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