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भारत में प्रदर्शनकारी तिब्बती हिरासत में
भारत में प्रदर्शनकारी तिब्बती
तिब्बतियों की गिरफ़्तारी को भारत की तिब्बत नीति में बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है
भारत में चीन की सीमा की तरफ़ मार्च करने की कोशिश करते क़रीब 100 तिब्बतियों को गिरफ़्तार करके 14 दिन की हिरासत में भेज दिया गया है.

ये तिब्बती लोग चीन में ओलंपिक खेलों के आयोजन के विरोध में मार्च कर रहे थे और चीन की सीमा की तरफ़ बढ़ रहे थे.

इन प्रदर्शनकारियों को हिमाचल प्रदेश में धर्मशाला के पास गिरफ़्तार किया गया. तिब्बत की निर्वासित सरकार का मुख्यालय धर्मशाला में ही है.

चीन के ख़िलाफ़ मार्च निकालने वाले इन तिब्बतियों को धर्मशाला से लगभग 50 किलोमीटर दूर देहरा पुल के पास गुरूवार को गिरफ़्तार किया गया था और शुक्रवार को उन्हें एक मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया जिसने उन्हें 14 दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया.

इन तमाम प्रदर्शनकारियों को धर्मशाला के नज़दीक एक सरकारी गेस्ट हाउस में रखा गया क्योंकि स्थानीय जेल में इतनी जगह नहीं थी कि इन सभी को रात भर रखा जा सके.

तिब्बती कार्यकर्ताओं ने एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा है, "गिरफ़्तार किए गए प्रदर्शनकारियों ने उस सरकारी मुचलके पर दस्तख़त करने से इनकार कर दिया जिसमें कहा गया था कि वे इस बात की गारंटी दें कि अगले छह महीने तक वे ऐसे किसी विरोध प्रदर्शन में हिस्सा नहीं लेंगे."

तिब्बती कार्यकर्ताओं के एक नेता चाइम यंगड्रंग ने कहा, "हम भारतीय अधिकारियों की इस कार्रवाई की निंदा करते हैं जिन्होंने शांतिपूर्ण मार्च करने वाले तिब्बती प्रदर्शनकारियों के साथ अपराधियों जैसा बर्ताव किया है."

दबाव की माँग

उधर तिब्बत के आध्यात्मिक गुरू दलाई लामा ने चीन के मानवाधिकार रिकॉर्ड के मामले पर उस दबाव बढ़ाए जाने का आहवान किया है.

दलाई लामा के मुख्यालय में काम करने वाले एक अधिकारी तेंज़िंग तखला ने बीबीसी से कहा, "धार्मिक गुरू स्थिति पर बारीक़ी से नज़र रखे हुए हैं. तिब्बतियों के प्रदर्शन पूरी तरह से अहिंसक रहे हैं इसलिए हम उनके साथ हो रहे बर्ताव पर चिंतित हैं."

धर्मशाला में तिब्बत सरकार का मुख्यालय
दलाई लामा ने तिब्बत से निकाले जाने बाद से भारत में पनाह ली थी है

न्यूयॉर्क स्थित एक मानवाधिकार संगठन ह्यूमन राइट्स वॉच ने चीन, भारत और नेपाल सरकारों से अनुरोध किया है कि वे तिब्बती प्रदर्शनकारियों को रिहा कर दें. संगठन का यह भी कहना है कि तिब्बतियों को शांतिपूर्वक प्रदर्शन करने की इजाज़त तो दी ही जानी चाहिए.

तिब्बती प्रदर्शनकारियों का यह विरोध प्रदर्शन गत सोमवार को विश्वव्यापी प्रदर्शनों के ही हिस्से के रूप में शुरू हुआ था जो तिब्बत की चीन से स्वतंत्रता की माँग के साथ शुरू हुए.

इसी अवसर पर तिब्बत से दलाई लामा के निर्वासन की 49 वर्षगाँठ भी थी. दलाई लामा ने चीन सरकार के ख़िलाफ़ विद्रोह किया था जिसके बाद उन्हें तिब्बत से निकाल दिया गया था और भारत सरकार ने अपने यहाँ उन्हें पनाह दी थी, तभी से भारत में तिब्बत की निर्वासित सरकार का मुख्यालय है.

हाल के वर्षों तक भारत तिब्बत की निर्वासित सरकार की माँगों के प्रति सहानुभूतिपूर्वक रवैया अपनाता रहा है लेकिन हाल के वर्षों में चीन के साथ भारत के संबंध सुधरे हैं तो तिब्बत की निर्वासित सरकार के साथ भी भारत के संबंधों में कुछ बदलाव आया है.

भारत सरकार के रुख़ में इसी बदलाव की वजह से चीन के ख़िलाफ़ तिब्बतियों के किसी बड़े प्रदर्शन की इजाज़त नहीं दी गई है क्योंकि इससे चीन नाराज़ हो सकता है.

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