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शिबू सोरेन चिरुडीह मामले में बरी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
झारखंड की एक अदालत ने पूर्व केंद्रीय कोयला मंत्री और झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के अध्यक्ष शिबू सोरेन को चिरुडीह नरसंहार मामले में गुरुवार को बरी कर दिया है. जामताड़ा के सत्र न्यायाधीश की अदालत ने चिरुडीह नरसंहार मामले के 21 अभियुक्तों में से सोरेन समेत 14 लोगों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया जबकि सात अन्य को दोषी क़रार दिया है. इन सातों दोषियों को शुक्रवार को सज़ा सुनाई जाएगी. उल्लेखनीय है कि 23 जनवरी, 1974 को जामताड़ा ज़िले के चिरुडीह गाँव में 11 लोगों की हत्या कर दी गई थी और कई घरों में आग लगा दी गई थी. इस मामले में शिबू सोरेन सहित 21 लोगों को अभियुक्त बनाया गया था. निर्णय के दौरान शिबू सोरेन खुद अदालत में उपस्थित थे और उन्होंने इसे 'न्याय की जीत’ बताया. इस मामले में शिबू सोरेन के ख़िलाफ़ 2004 में ग़ैरजमानती वारंट जारी होने के बाद उन्हें केंद्रीय मंत्रिमंडल छोड़ना पड़ा था. उस समय वो कोयला मंत्री थे. उन्होंने इस मामले में जामताड़ा की जेल में 38 दिन बिताए थे, बाद में उन्हें हाईकोर्ट ने जमानत दे दी थी. इससे पहले नवंबर, 2006 में अपने पूर्व निजी सचिव शशिनाथ झा की हत्या से जुड़े एक अन्य मामले में दिल्ली की एक अदालत ने उन्हें बरी कर दिया था. |
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