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झारखंड में 'गुरुजी' की पकड़ मज़बूत | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
शशिनाथ झा हत्याकांड मामले में शिबू सोरेन की हाईकोर्ट से रिहाई झारखंड की राजनीति के लिए नई दिशा और दशा तय कर सकता है. झारखंड जहां पिछले कुछ महीनों से ऐसी सरकार चल रही है जो वक़्त-बेवक़्त अल्पमत में चली जाती है और वो भी ऐसे मुख्यमंत्री के नेतृत्व में जो निर्दलीय है. सोरेन की रिहाई मुख्यमंत्री मधु कोड़ा के लिए सिरदर्द साबित हो सकती है क्योंकि चिरूडीह नरसंहार और शशिनाथ झा हत्याकांड मामले में सोरेन को सज़ा मिलने के कारण ही निर्दलीय होने के बावजूद कोड़ा को मुख्यमंत्री पद मिला था. राज्य के बारे में कहा जाता है कि पिछले कुछ महीनों में राज्य के सारे कामकाज ठप पड़े हैं और विभिन्न दल सरकार को गिराने की कोशिश में लगे हुए है. ऐसे में राज्य का विकास तो रुका हुआ है ही साथ ही राज्य कई स्तर पर पीछे भी छूटता जा रहा है. आए दिन नक्सली हमले हो रहे हैं और सुरक्षा की स्थिति बद से बदतर होती जा रही है. कारण आपसी गुटबाजी, किसी बड़े नेता का अभाव और स्वार्थ की राजनीति. ऐसे में शिबू सोरेन की रिहाई राज्य के लिए बेहतर संकेत साबित हो सकती है क्योंकि सोरेन न केवल एक बड़ी पार्टी का प्रतिनिधित्व करते हैं बल्कि अन्य दलों में उनकों एक वरिष्ठ नेता के तौर पर सम्मान से देखा जाता है. राज्य के कई इलाक़ों में उनकी तूती बोलती है और अगर वो चाहें तो ज़मीनी स्तर पर आंदोलन करने में पूरी तरह समर्थ हैं. ऐसे में न केवल वो सरकार को बदल सकते हैं बल्कि चाहें तो सरकार को विकास कार्य के लिए बाध्य भी कर सकते हैं बशर्ते वो बीजेपी की सरकार हो. कयास ये भी लगाए जा रहे हैं कि सोरेन रिहाई के बाद केंद्र में फिर से मंत्री पद लेगें लेकिन इसके बावजूद राज्य में झामुमो एक बार फिर मजबूती से खड़ा हो सकेगा और राजनीतिक गतिविधियों पर अपनी पकड़ भी बढ़ा सकेगा. राजनीतिक गतिविधि तेज़ सोरेन की रिहाई के साथ ही राजनीतिक गतिविधियां तेज़ हो गई है. राज्य में जहां झामुमो के 17 विधायक हैं वहीं कांग्रेस के 9 और आरजेडी के सात विधायक हैं जिनके समर्थन से मधु कोड़ा मुख्यमंत्री बने हैं. पिछले कुछ दिनों से बीजेपी ने खुलकर शिबू सोरेन का समर्थन करना शुरु कर दिया है और संभावना व्यक्त की जा रही है कि बीजेपी सोरेन को समर्थन देकर राज्य में सरकार पलट सकती है. उल्लेखनीय है कि केंद्र में कांग्रेस का समर्थन हासिल होने के बावजूद सोरेन कांग्रेस से काफी नाराज़ है क्योंकि उन्हें ऐसा लगता है कि कांग्रेस ने उनका साथ नहीं दिया. ऐसे में राज्य में निश्वित तौर पर अगले कुछ दिनों मे राजनीतिक उठापठक होगी और उसके सूत्रधार 'दिशोम गुरु 'होंगे. | इससे जुड़ी ख़बरें सोरेन का इस्तीफ़ा, यूपीए की मुश्किलें बढ़ीं29 नवंबर, 2006 | भारत और पड़ोस शिबू सोरेन को सज़ा सुनाई जाएगी30 नवंबर, 2006 | भारत और पड़ोस सोरेन को सज़ा पाँच दिसंबर तक टली01 दिसंबर, 2006 | भारत और पड़ोस शिबू सोरेन को आजीवन कारावास05 दिसंबर, 2006 | भारत और पड़ोस सोरेन दुमका सेंट्रल जेल में रहेंगे05 जनवरी, 2007 | भारत और पड़ोस व्यावसायियों ने किया नेताओं का बहिष्कार25 जुलाई, 2007 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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