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वंशवृक्ष की जड़ों तक पहुँचे रामगुलाम | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
बिहार के के भोजपुर ज़िले के एक गाँव के लोगों को अपनी क़िस्मत पर भरोसा नहीं हो रहा है, सड़कें बन गईं हैं, स्कूल, पानी-बिजली सब कुछ बिहार सरकार ने उपलब्ध कराया है. हरिगाँव को बुनियादी सुविधाएँ इसलिए उपलब्ध हो सकी हैं क्योंकि उसका एक बेटा हज़ारों मील दूर मज़दूरी करने मॉरीशस गया था. मॉरीशस के मौजूदा प्रधानमंत्री नवीनचंद्र रामगुलाम के पिता सर शिवसागर रामगुलाम ने, न सिर्फ़ मॉरीशस को आज़ादी दिलाई थी बल्कि 1961 से 1982 तक वे वहाँ के प्रधानमंत्री भी रहे थे. बिहार सरकार ने शिवसागर रामगुलाम की पटना में एक प्रतिमा स्थापित की है. इसका अनावरण मॉरीशस के प्रधानमंत्री और उनके बेटे नवीनचंद्र रामगुलाम ने किया. नवीनचंद्र रामगुलाम ने बिहार के भोजपुर के 'हरिगाँव' की उस भूमि के दर्शन का सपना पूरा किया जिसे छोड़ कर 140 साल पहले उनके पूर्वज रोज़ी-रोटी की खोज में मॉरीशस चले गए थे. बिहार के अधिकारियों ने 'हरिगाँव' का पता उन दस्तावेज़ों के आधार पर लगाया है जिन्हें ख़ुद मॉरीशस के प्रधानमंत्री ने मुहैया कराया था. नवीनचंद्र रामगुलाम ने कहा, "मैं अपने पूर्वजों की भूमि पर आकर अपने घर में होने का सकून महसूस कर रहा हूँ." उन्होंने कहा, "एक कहावत है कि ज़िंदगी नाटक से भी विचित्र होती है. आज मैं महसूस कर रहा हूँ, सचमुच मेरी ज़िंदगी किसी भी कहानी से विचित्र साबित हुई है. मेरे पास शब्द नहीं हैं कि बताऊँ कि मैं यहाँ कितना खुश हूँ और अपनी भावनाओं को कैसे व्यक्त करूँ." 'ग़ुलाम का बेटा'
उन्होंने कहा, "हमारे दादा मोहित रामगुलाम ने जब 1871 में कलकत्ता बंदरगाह से मॉरीशस पहुँच कर वहाँ गुलामी की ज़िंदगी शरू की तो उन्हें इसका ज़रा भी अंदाज़ा नहीं था की उन्हीं ग़ुलाम का बेटा न सिर्फ़ इन बिहारवंशियों, बल्कि पूरे मॉरीशस की आज़ादी का कारण बनेगा." सदियों की गुमनामी से अचानक सुर्खियों में आए 'हरिगाँव' के लोगों के लिए बिहार सरकार ने न सिर्फ़ इस गाँव में सड़क, बिजली पानी का फटाफट इंतज़ाम किया बल्कि शिवसागर रामगुलाम के नाम पर अस्पताल और स्कूल भी खोल दिया है. इसके अलावा उस तालाब को मोहित सरोवर नाम दिया गया है जिसके बारे में अनुमान है कि वहाँ रामगुलाम के खानदान के लोग किसी ज़माने में स्नान किया करते थे. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मॉरीशस के प्रधामंत्री को बिहार बुलाना मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के उन प्रयासों का हिस्सा है जिसके तहत वह बिहार की साकारात्मक छवि देश के बाक़ी राज्यों में बनाना चाहते हैं. नवीनचंद्र रामगुलाम की बिहार यात्रा उस समय में हो रही है जब महाराष्ट्र और असम में बिहारी लोगों के लिए हालात ठीक नहीं हैं. बिहार की छवि
इस अवसर पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने असम और महाराष्ट्र में बिहारी लोगों के खिलाफ़ बने माहौल की तरफ़ इशारा करते हुए कहा, "बिहारियों ने मॉरीशस की पथरीली धरती से सोना निकाला और उसे अंग्रेज़ों के ज़ुल्म से आज़ाद कराया और यही बिहारी महाराष्ट्र और गुजरात में समृद्धि लाए. और अब हालत यह है कि इन्हीं लोगों के साथ बेहरमी का सुलूक किया जा रहा है." उन्होंने कहा "हम कोशिश कर रहे हैं कि बिहारी कहलाना अपमान की नहीं बल्कि शान की बात होगी." नीतीश कुमार ने कहा, "बिहार की नौ करोड़ जनता को सर शिवसागर रामगुलाम और नवीनचंद्र रामगुलाम पर फ़ख़्र है जो बिहारवंशी हैं." नवीनचंद्र रामगुलाम के दादा मोहित रामगुलाम कलकत्ता बंदरगाह से मॉरीशस जाने वाले उन हज़ारों अनपढ़ मज़दूरों में से एक थे जिन्हें सुंदर भविष्य का सपना दिखाकर मॉरीशस ले जाया गया था. हरिगाँव के हज़ारों लोग मॉरीशस के प्रधानमंत्री नवीनचंद्र रामगुलाम और उनकी पत्नी वीणा रामगुलाम की एक झलक देखने के लिए बेताब थे. हरिगाँव में शिवसागर रामगुलाम के खानदान के एक सदस्य महेश महतो कहते हैं, "हमारे लिए यह एक सपने जैसा है कि हमारे परिवार के एक सदस्य जो मॉरीशस के प्रधानमंत्री हैं, अपने पूर्वजों के घर वापस आए हैं." | इससे जुड़ी ख़बरें हिंदी और भारतीयों की धरती-सूरीनाम05 जून, 2003 | पहला पन्ना भारतीयों के माई-बाप28 अगस्त, 2003 | पहला पन्ना प्रवासी भारतीयों के लिए सुविधा केंद्र08 जनवरी, 2008 | भारत और पड़ोस नागरिकता क़ानून में संशोधन मंज़ूर16 जून, 2005 | भारत और पड़ोस परदेसी हुए तो क्या, दिल परदेसी नहीं हुआ....09 अप्रैल, 2007 | मनोरंजन एक्सप्रेस कल्पना चावला को प्रवासी सम्मान08 जनवरी, 2004 | भारत और पड़ोस फिजी में भारतीयों को राहत 18 जुलाई, 2003 | पहला पन्ना | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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