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पुण्यतिथि पर गांधी को अनूठी श्रद्धांजलि | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
महात्मा गांधी की साठवीं पुण्यतिथि पर यूं तो पूरी दुनिया ने उनको याद किया लेकिन ब्रिटेन में उन्हें अनोखी श्रद्धांजलि अर्पित की गई. लंदन के नेहरू सेंटर में संवादों और कमेंटरी के माध्यम से गांधी जी के जीवन के अंतिम दिन को मंच पर पुनर्जीवित किया गया. बीबीसी हिंदी सेवा के पूर्व प्रसारक विजय राणा की इस प्रस्तुति में गांधी जी के आख़िरी दिन के अलावा उनके जीवन के कुछ और पहलुओं पर भी रोशनी डाली गई. इसके लिए उनके जीवन के अंतिम दिन को ही चित्रण के लिए क्यों चुना गया? इसके जवाब में राणा कहते हैं, ''15 अगस्त 1947 में भारत आज़ाद हुआ और 30 जनवरी 1948 के दिन उनकी हत्या हो गई. मेरे विचार में नवोदित भारत के इतिहास में यह सबसे नाटकीय दिन था, क्योंकि उस समय महात्मा गांधी भारत के अतीत के बारे में नहीं, बल्कि भविष्य के बारे में गहन सोच-विचार कर रहे थे.'' राणा बताते हैं, ''अपनी मृत्यु से थोड़ी ही देर पहले गांधी जी ने सरदार पटेल की साथ एक अहम मुलाक़ात की थी और उनसे प्रधानमंत्री नेहरू के साथ अपने मतभेद दूर करने का अनुरोध किया था.'' किताब का विमोचन इस प्रस्तुति में महात्मा गांधी की आवाज़ बने हैं कलाकार कृष्णकांत टंडन और उनका साथ दिया बीबीसी हिंदी सेवा की ममता गुप्ता ने. संवादों के साथ-साथ गांधी जी के प्रिय भजनों और नेहरू की आवाज़ का टेप भी इस्तेमाल किया गया, जिसमें वे आकाशवाणी से देश को गांधी जी की मृत्यु का दुखद समाचार दे रहे हैं. इस प्रस्तुति के अलावा विजय राणा ने अपनी किताब 'महात्मा गांधी- इमेजेज ऐंड आइडियाज़ फॉर नॉन वायलेंस' का विमोचन भी किया. इस किताब में उन्होंने दुनिया भर से ली गई उन 80 तस्वीरों को संकलित किया है जो दुनिया में गांधी जी के आदर्शों के प्रभाव को दर्शाती हैं. इनमें न्यूयॉर्क शहर में 11 सितंबर के प्रतीक ग्राउंड ज़ीरो पर रखी गांधी की तस्वीर और फलस्तीन में गांधीवादी तरीक़े से अपने अधिकारों की माँग करते हुए लोगों की तस्वीरें शामिल हैं. राणा बताते हैं, ''हमें ये तस्वीरें संकलित करने में लंबा समय लग गया. दुनिया भर से एकत्रित की गईं तस्वीरों में आप देख सकते हैं कि सशक्त रूप से संदेश देने के लिए गांधी जी के चिह्नों, मूर्तियों, तस्वीरों, पेंटिंग्स आदि का अलग अलग तरीके से इस्तेमाल किया गया है.'' |
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