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बुधवार, 30 जनवरी, 2008 को 11:27 GMT तक के समाचार
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ग़रीब अल्पसंख्यक छात्रों को वज़ीफ़ा
मुस्लिम छात्राएँ
अल्पसंख्यक छात्राओं के लिए तीस प्रतिशत छात्रवृत्तियाँ आरक्षित रखी जाएँगीं
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ग़रीब अल्पसंख्यक छात्रों को प्रतिभा और ज़रुरत के अनुसार छात्रवृत्ति देने की योजना को मंज़ूरी दे दी है.

इस योजना के तहत पहली से दसवीं कक्षा तक के छात्र-छात्राओं को छात्रवृत्ति या वज़ीफ़ा दिया जाएगा.

मंत्रिमंडल के फ़ैसले की जानकारी देते हुए वित्तमंत्री पी चिदंबरम ने बताया कि 25 लाख छात्रवृत्तियाँ दी जाएँगी जिसमें से 30 प्रतिशत छात्रवृत्तियाँ अल्पसंख्यक समुदाय की लड़कियों के लिए सुरक्षित रखी जाएँगी.

केंद्र सरकार ने पिछले साल जून में इस योजना की घोषणा करते हुए कहा था कि सच्चर कमेटी की रिपोर्ट के अनुसार इस छात्रवृत्ति की घोषणा की जा रही है.

उल्लेखनीय है कि सच्चर कमेटी ने अल्पसंख्यकों की सामाजिक-आर्थिक समिति पर विस्तृत रिपोर्ट तैयार की थी और उनकी स्थिति में सुधार के लिए आवश्यक क़दम उठाने की सिफ़ारिश भी की थी.

केंद्र-राज्य सहयोग

वित्तमंत्री पी चिदंबरम के अनुसार केंद्र सरकार ने इस योजना के लिए 11वीं योजना में 1868.50 करोड़ रुपयों का प्रावधान किया है.

यह योजना केंद्र और राज्य सरकारों के सहयोग से चलेगी. इसमें केंद्र की हिस्सेदारी 75 प्रतिशत और राज्य सरकारों की भागीदारी 25 प्रतिशत होगी. केंद्र शासित राज्यों में केंद्र सरकार की भागीदारी सौ प्रतिशत होगी.

उन्होंने बताया कि पहली से दसवीं कक्षा के छात्रों को सरकारी और सरकार द्वारा स्वीकृति मिलने वाले निजी स्कूलों में पढ़ने के लिए यह छात्रवृत्ति दी जाएगी.

इसके तहत ट्यूशन फ़ीस के लिए अधिकतम 350 रुपए प्रतिमाह, हॉस्टल में रहने वालों को अधिकतम 600 रुपए, हॉस्टल में न रहने वालों के लिए 100 रुपए प्रतिमाह दिए जाएँगे.

इसके तहत ऊँची कक्षाओं के लिए एडमिशन फ़ीस के लिए 500 रुपए प्रति वर्ष की राशि दी जाएगी.

वित्तमंत्री ने स्पष्ट किया कि यह छात्रवृत्ति प्रावीण्य सूची के आधार पर दी जाएगी.

छात्रो और निजी शिक्षण संस्थानों के चयन की प्रक्रिया को पारदर्शी रखने का वादा करते हुए उन्होंने कहा कि इसके विवरण बाद में दिए जाएँगे.

प्रतिक्रिया

भाजपा के प्रवक्ता मुख्तार अब्बास नक़वी ने कहा है कि भाजपा समाज के निचले तबके के सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक विकास के ख़िलाफ़ नहीं है लेकिन यह सब के लिए बराबर होना चाहिए सिर्फ़ अल्पसंख्यकों के लिए नहीं.

 एक ओर तो किसान आत्महत्याएँ कर रहे हैं और सरकार के पास उनको देने के लिए कुछ नहीं है, सरकार अपने कर्मचारियों को कुछ नहीं दे पा रही है, मंत्रालयों को धनराशि देने से वित्तमंत्री ने मना कर दिया है, ऐसे में ऐसी भारी-भरकम योजना के लिए पैसे कहाँ से आएँगे?
मुख़्तार अब्बास नक़वी

उनका कहना है कि सरकार बडी-बड़ी घोषणाएँ कर रही है लेकिन देखना यह है कि इनमें से कितनी ज़मीन पर उतरेंगीं और कितनी चुनावी शिगूफ़ा साबित होती हैं.

उनका कहना था, "एक ओर तो किसान आत्महत्याएँ कर रहे हैं और सरकार के पास उनको देने के लिए कुछ नहीं है, सरकार अपने कर्मचारियों को कुछ नहीं दे पा रही है, मंत्रालयों को धनराशि देने से वित्तमंत्री ने मना कर दिया है, ऐसे में ऐसी भारी-भरकम योजना के लिए पैसे कहाँ से आएँगे? "

उनका कहना था कि अल्पसंख्यकों का मत लेने के लिए सरकार अव्यवहारिक घोषणाएँ भी करती रही है जैसे कि उसने पिछले दिनों अल्पसंख्यकों को आरक्षण देने की बात कही थी.

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