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गुर्दा चोरी रैकेट में चार गिरफ़्तार | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत में पुलिस का कहना है कि हरियाणा के गुड़गांव और उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद सहित अनेक शहरों में गुर्दा चोरी का रैकेट चलाने के संदिग्ध कई डॉक्टरों में से एक डॉक्टर उपेन्द्र कुमार को गुड़गांव से गिरफ़्तार किया गया है. गुड़गांव के पुलिस आयुक्त मोहिंदर लाल के अनुसार इस रैकेट में चार डॉक्टर शामिल थे जिनके नाम डॉक्टर उपेन्द्र कुमार, डॉ जीवंत कुमार, डॉ अमित कुमार और डॉ शरद कुमार हैं. गिरफ़्तार किए गए डॉक्टर उपेन्द्र कुमार बल्लभगढ़ में श्रीराम अस्पताल चलाते हैं. इसके अलावा उनके तीन साथियों को गिरफ़्तार किया गया है और अन्य लोगो की तलाश की जा रही है. पुलिस के अनुसार गिरफ़्तार डॉक्टर उपेन्द्र ने स्वीकार कर लिया है कि वो कई सालों से इस धंधे में लिप्त है. उत्तर प्रदेश पुलिस को जानकारी मिली थी कि कुछ लोग गुर्दा प्रत्यारोपण के लिए गुड़गांव जा रहे थे. गुड़गांव में जिस स्थान पर इन लोगो के पहुंचने की सूचना मिली थी वहाँ पुलिस ने जब छापा मारा तो पाया कि वहाँ पर ऑपरेशन थिएटर भी बनाया गया था और ऑपरेशन की हर सुविधा मौजूद थी. आवासीय इलाक़े में बनाए गए उस क्लिनिक में रैकेट चला रहे इन डॉक्टरो ने ग़ाज़ियाबाद, मुरादाबाद और गुड़गांव में अपने कुछ एजेंटों को तैनात किया था और वो लोगो को गुर्दा निकलवाने के लिए तैयार करते थे. जो लोग अपनी गुर्दा निकलवाने के लिए तैयार हो जाते थे उनमें से अधिकतर ग़रीब तबके के मज़दूर होते थे. इन मज़दूरों को गुर्दा निकलवाने के लिए 50 हज़ार से लेकर एक लाख रूपए तक दिए जाते थे लेकिन जिन लोगों को किडनी प्रत्यर्पित की जाती थी उनसे 10 लाख से 18 लाख रुपए तक वसूले जाते थे. पुलिस आयुक्त मोहिंदर लाल का कहना है कि इस गोरखधंधे को पिछले आठ-नौ साल से अंजाम दिया जा रहा था. गिरफ़्तार लोगों के पास से कुछ दस्तावेज़ बरामद हुए हैं जिनसे पता चलता है कि इन डॉक्टरों से अरब देशों से भी लोग गुर्दा प्रत्यर्पण का अनुरोध कर रहे थे. साथ ही गुड़गांव में जिस रेस्ट हाउस पर छापा मारा गया था वहां एक प्रवासी भारतीय यानी एनआरआई और ग्रीस से आया एक व्यक्ति भी मौजूद था. हालांकि अभी मामले की जांच चल रही है लेकिन पुलिस को आशंका है कि ये दोनो व्यक्ति गुर्दा प्रत्यारोपण के लिए यहां पर आए थे. | इससे जुड़ी ख़बरें किडनी कांड में तीन लोगों को सज़ा 28 नवंबर, 2007 | भारत और पड़ोस नक़ली साबित हुई किडनी प्रतियोगिता02 जून, 2007 | पहला पन्ना गुज़ारे के लिए गुर्दे बेच रहे सूनामी पीड़ित09 मार्च, 2007 | भारत और पड़ोस बेहाल मछुआरे गुर्दा बेचने पर मजबूर16 जनवरी, 2007 | भारत और पड़ोस गुर्दा कारोबार में मामला दर्ज02 फ़रवरी, 2003 | पहला पन्ना 'गुर्दों के व्यापार में नेता भी'19 जनवरी, 2003 | पहला पन्ना एक अनमोल तोहफ़ा24 दिसंबरजनवरी, 2002 | पहला पन्ना टुकड़े-टुकड़े बिकता शरीर17 अक्तूबर, 2002 | पहला पन्ना | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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