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शनिवार, 02 जून, 2007 को 11:04 GMT तक के समाचार
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नक़ली साबित हुई किडनी प्रतियोगिता
द बिग डोनर
प्रतियोगिता में हिस्सा लेने वाले सभी मरीज़ असली थे
एक प्रतियोगिता के तहत किसी मरीज़ को किडनी इनाम में देने के लिए चर्चा में आया नीदरलैंड का टीवी शो नकली साबित हुआ और आख़िरकार किसी भी प्रतियोगी को किडनी नहीं मिली.

दरअसल ये एक नकली शो था जिसमें असली मरीज़ों की अनुमति लेकर ऐसा दर्शाया गया कि प्रतियोगिता में जीतने वालों को एक 'बीमार महिला' की किडनी मिलेगी. ये महिला दरअसल एक अभिनेत्री थी.

जब नकली किडनी दाता ये घोषणा करने वाली थी कि वो अपनी किडनी किसे देगी तो कार्यक्रम प्रस्तुत कर रहे पेट्रिक लोडाइर्स ने कहा, "हम यहाँ किसी को किडनी नहीं दे रहे. ऐसा करना हमारे लिए भी हद पार करना होगा."

टीवी शो बनाने वालों का कहना है कि नीदरलैंड में अंगदान करने वालों की कमी की समस्या को दर्शाने के लिए ये कार्यक्रम बनाया गया था.

 हमने ये इसलिए किया क्योंकि हम एक ऐसी समस्या को सुलझाना चाहते हैं जो समस्या होनी ही नहीं चाहिए
कार्यक्रम के प्रोड्यूसर

जिन तीन मरीज़ों ने प्रतियोगिता में हिस्सा लिया उन्हें वाकई में किडनी प्रत्यारोपण की ज़रूरत है और ये शो नकली है इसके बारे में उन्हें पहले से ही बताया गया था.

शो में दिखाया गया था कि लिसा नाम महिला बेहद बीमार हैं और एक प्रतियोगिता के तहत वे जीतने वाले को अपनी किडनी देंगी.

अपनी किडनी दान करने के लिए वे किसे चुनेंगीं ये तय करने के लिए लिसा को प्रतियोगियों का प्रोफ़ाइल देखना था और साथ ही प्रतियोगियों के रिश्तेदारों और दोस्तों से बात करनी थी.

80 मिनट के शो में दर्शक भी एसएमएस के ज़रिए अपने सुझाव भेज सकते थे.

कार्यक्रम के बाद प्रेस कांफ़्रेंस में प्रोड्यूसर ने कहा, "हमने ये इसलिए किया क्योंकि हम एक ऐसी समस्या को सुलझाना चाहते हैं जो समस्या होनी ही नहीं चाहिए."

'कोई नहीं हारा'

नीदरलैंड के संस्कृति मंत्री रॉनल्ड प्लासटर्क ने शो को 'शानदार स्टंट' बताया.

एक अस्तपाल से शो देख रहीं किडनी की मरीज़ कैरोलाइन ने इसकी तारीफ़ करते हुए कहा," प्रचार के लिए ये कार्यक्रम अच्छा है और इसमें कोई नहीं हारा."

कार्यक्रम के प्रसारण से पहले इसे लेकर अच्छा ख़ासा विवाद चल रहा था. नीदरलैंड के प्रधानमंत्री ने भी कार्यक्रम की आलोचना करते हुए कहा था कि इससे देश की साख को नुकसान पहुंचेगा.

इस तरह की माँग भी उठी थी कि शो पर रोक लगाई जाए और नीदरलैंड के दूतावासों को भी शिकायतें मिली थीं.

कार्यक्रम के प्रस्तुतकर्ता का कहना है कि नीदरलैंड में किडनी का इंतज़ार करते-करते हर साल करीब 200 लोगों की मौत हो जाती है.

ये कार्यक्रम एंडेमोल कंपनी का है जो ब्रिटेन में चैनल फ़ोर के लिए बिग ब्रदर टीवी शो बनाती है.

अभी पिछले हफ़्ते ही ब्रिटेन की मीडिया नियामक संस्था ऑफ़कॉम ने बिग ब्रदर के दौरान उपजे नस्लवादी विवाद के लिए चैनल 4 की आलोचना की है.

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