|
'पहचान पत्र जाँच का आदेश नहीं' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
दिल्ली के उप राज्यपाल ने कहा है कि दिल्ली में पहचान पत्र मामले पर कोई आवश्यक आदेश जारी नहीं किए गए हैं कि हर नागरिक को पहचान पत्र लेकर चलना ही पड़ेगा. उप राज्यपाल तेजेंदर खन्ना ने पत्रकारों से बातचीत में बताया कि हमने अभी पहचान पत्र जाँचने के काम की कोई व्यवस्था नहीं की है और न ही इसके लिए गृह मंत्रालय से कोई निर्देश ही मिले हैं. उन्होंने अपने पिछले बयान से मुकरते हुए कहा, "हमारा मानना था कि अगर पुलिस जाँच करेगी और पहचान पत्र नागरिकों के पास रहेंगे तो इससे पुलिस को और साथ में नागरिकों को भी सुविधा होगी. " इससे पहले उन्होंने ही कड़ा रुख जताते हुए कहा था कि जिन लोगों के पास पूछताछ के दौरान पहचान पत्र नहीं होगा, उन्हें थाने या जेल भेज दिया जाएगा. उन लोगों से पुलिस पूछताछ करेगी और संदेह होने पर आगे कोई कार्रवाई की जाएगी. गौरतलब है कि दिल्ली में पहचान पत्र अनिवार्य किये जाने को नागरिकों ने दोनों तरह से लिया था. कुछ लोगों को इससे परेशानी थी तो कुछ लोगों ने इसका स्वागत भी किया था. लोगों का मानना था कि दिल्ली में पहचान का कोई काग़ज़ साथ लेकर चलने के फ़ैसले से सुरक्षा नहीं बढ़ेगी. उनका मानना था कि अगर कोई चरमपंथी दिल्ली आता है और उसके लिए फ़र्ज़ी पहचान पत्र बनवाना कोई मुश्किल काम नही् होगा. लोगों ने कहा था कि उप राज्यपाल के इस फ़ैसले को अदालत में चुनौती दी जा सकती है और इससे लोगों का शोषण और भ्रष्टाचार बढ़ेगा. | इससे जुड़ी ख़बरें दिल्ली में पहचान-पत्र रखना ज़रूरी05 जनवरी, 2008 | भारत और पड़ोस 'सुरक्षा नहीं, परेशानी बढ़ाएगा पहचान पत्र'05 जनवरी, 2008 | भारत और पड़ोस 'पहचान पत्र अनिवार्य करना अच्छा क़दम'05 जनवरी, 2008 | भारत और पड़ोस गायों के लिए भी पहचानपत्र..31 अगस्त, 2007 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
| |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||