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शनिवार, 05 जनवरी, 2008 को 21:41 GMT तक के समाचार
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अल्पसंख्यक आयोग उड़ीसा के दौरे पर
चर्च
उड़ीसा में पहले भी ईसाई समुदाय के लोगों पर हमले हो चुके हैं
राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग का एक दल उड़ीसा के दौरे पर जा रहा है. यह दल पिछले दिनों कंधमाल में हुई घटनाओं की जाँच करेगा और अपनी रिपोर्ट केंद्र सरकार को देगा.

सोमवार को उड़ीसा के मुख्य सचिव अजीत त्रिपाठी और गृहसचिव तरुण कांति मिश्र आयोग के सदस्यों से मिलेंगे और अपनी सूचनाओं से उन्हें अवगत करवाएँगे.

मंगलवार को आयोग के सदस्य कंधमाल में ब्राह्मणी गाँव के दौरे पर जाएँगे और वहाँ जाकर सांप्रदायिक दंगों के पीड़ित लोगों से और चर्च के सदस्यों से मिलेंगे.

अल्पसंख्यक आयोग लौटकर एक बार फिर राज्य सरकार के अधिकारियों से चर्चा करेगा और फिर लौटकर दिल्ली में केंद्र सरकार को अपनी रिपोर्ट देगा.

उल्लेखनीय है कि गत 25 दिसंबर को क्रिसमस के मौक़े पर कई चर्चों पर हमले किए गए थे.

कंधमाल ज़िले में ब्राह्मणी गाँव सहित कई गाँवों में लोगों पर भी हमले किए गए थे और ईसाई समुदाय के लोगों के घर जला दिए थे.

बाद में यह सांप्रदायिक दंगों में बदल गया था और वहाँ कई दिनों तक कर्फ़्यू लगाना पड़ा था.

'ईसाई भी शामिल'

भुवनेश्वर से पत्रकार संदीप साहू ने ख़बर दी है कि शुक्रवार को पहली बार ईसाई समुदाय के नेताओं ने माना कि सांप्रदायिक दंगों के दौरान हुई हिंसा में ईसाई समुदाय के सदस्य भी शामिल थे.

ऑल इंडिया क्रिस्चियन काउंसिल के सचिव जॉन दयाल और कटक-भुवनेश्वर के आर्च बिपश रॉफ़ेल चिन्नैथ ने एक पत्रवार्ता में यह बात मानी.

आर्च बिशप का कहना था कि उन्हें जैसे ही पता चला कि ईसाई समुदाय के नेता भी हिंसा में शामिल हो गए हैं उन्होंने तत्काल हिंसा रोकने के लिए कहा था.

सांप्रदायिक हिंसा पीड़ित इलाक़ों का तीन दिनों का दौरा करने के बाद घटनाओं पर एक श्वेत पत्र जारी करते हुए उन्होंने घटना के लिए संघ परिवार और राज्य सरकार के अलावा ज़िला प्रशासन को भी दोषी ठहराया है.

'माओवादियों का हाथ'

उधर राज्य सरकार ने कहा है कि 27 दिसंबर को भड़की सांप्रदायिक हिंसा के पीछे माओवादियों का हाथ है.

राज्य के गृह सचिव तरुण कांति मिश्रा का कहना है कि ब्राह्मणी गाँव से मिली 12 आधुनिक बंदूक बरामद होने से माओवादियों का हाथ साफ़ हुआ है.

इस बीच राज्य सरकार ने पीड़ित लोगों को मुआवज़ा की राशि घोषित कर दी है.

मुख्य सचिव अजीत त्रिपाठी के अनुसार जिन लोगों के घर पूरी तरह से नष्ट हो गए हैं उन परिवारों को 40 हज़ार और जिनके घर आंशिक रुप से क्षतिग्रस्त हुए हैं उन्हें 20 हज़ार का मुआवज़ा दिया जाएगा.

इसके अलावा पीड़ित परिवारों को तीन महीने तक भोजन मुफ़्त उपलब्ध करवाया जाएगा.

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