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उड़ीसा में अब भी हिंसा और आगजनी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
उड़ीसा में सांप्रदायिक हिंसा के दस दिनों के बाद अभी भी कंधामल ज़िले में हिंसा और आगजनी की घटनाएं हो रही हैं जहां एक गांव में 15 दुकानें और कुछ घर जला दिए गए हैं. मंगलवार की देर रात हुई हिंसा में बालीगुडा शहर में 15 दुकानें जला दी गई जिसके बाद इलाक़े में कर्फ्यू लगा दिया गया है. कंधामल ज़िले के फुलबनी, दारिंगबाड़ी, ब्राह्मणीगांव और बालीगुड़ा में कर्फ्यू लगा दिया गया है. इस बीच केंद्रीय गृह मंत्री शिवराज पाटिल ने बुधवार को हिंसा प्रभावित बाराखमा इलाक़े का दौरा किया और लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की. पाटिल ने लोगों को सांत्वना दी और इस 'दुखद' घटना की निंदा करते हुए कहा कि बेघर हुए लोगों का पुनर्वास किया जाएगा. उन्होंने लोगों को आश्वस्त किया कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने की पूरी कोशिश की जाएगी. गृह मंत्री के साथ मुख्यमंत्री नवीन पटनायक और विपक्ष के नेता जेपी पटनायक भी थे. इस बीच उड़ीसा सरकार ने ज़िले के दो वरिष्ठ अधिकारियों ज़िलाधीश और एसपी का स्थानांतरण कर दिया है. उधर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने हिंसा प्रभावित ज़िलों में स्थिति पर राज्य सरकार से रिपोर्ट मांगी है. आयोग इस मामले की जांच के लिए अपनी एक टीम जल्दी ही भेजने वाला है. उल्लेखनीय है कि क्रिसमस के दिन से ही विश्व हिंदू परिषद के कार्यकर्ताओं और ईसाई संगठनों के बीच झड़पें हुई थीं. | इससे जुड़ी ख़बरें उड़ीसा में कुछ और गिरिजाघरों पर हमले27 दिसंबर, 2007 | भारत और पड़ोस उड़ीसा में कई गिरजाघरों पर हमले25 दिसंबर, 2007 | भारत और पड़ोस उड़ीसा में हिंसा जारी, तीन और मरे28 दिसंबर, 2007 | भारत और पड़ोस 'उड़ीसा में हुई हिंसा में नक्सली भी शामिल'31 दिसंबर, 2007 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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