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शुक्रवार, 28 दिसंबर, 2007 को 08:38 GMT तक के समाचार
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उड़ीसा में हिंसा जारी, तीन और मरे
गिरजाघर
उड़ीसा में पहले भी गिरजाघरों को निशाना बनाया गया है
भारत में उड़ीसा राज्य के कंधमाल ज़िले के हिंसा प्रभावित ब्राहमणीगाँव में उपद्रवी भीड़ पर पुलिस फायरिंग में तीन लोग मारे गए हैं.

स्थानीय पत्रकार संदीप साहू ने बताया है कि भीड़ ने गाँव में दो सौ से अधिक मकानों में आग भी लगा दी.

हालाँकि अधिकारियों ने केवल एक व्यक्ति के मारे जाने की पुष्टि की है.

क्षेत्रीय राजस्व आयुक्त (दक्षिणी रेंज) और ज़िले में अभियान के प्रभारी सत्यब्रत साहू ने कंधमाल से बीबीसी को टेलीफ़ोन पर बताया कि पुलिस ने अभी तक ब्राहमणीगाँव से केवल एक शव बरामद किया है.

यह पूछने पर कि गुरूवार को उनके हवाले से दी गई रिपोर्टों में तीन लोगों के मारे जाने की बात कही गई थी तो साहू को जवाब था, “मैंने वही कहा जो मैंने लोगों से सुना था. लेकिन जब तक हम शवों को बरामद नहीं कर लेते तब तक हम ये निश्चित तौर पर नहीं कह सकते कि कितने लोग मारे गए हैं.”

राज्य के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने भी गुरूवार शाम मीडिया को बताया था कि पुलिस फायरिंग में 'दो या तीन लोगों' के मारे जाने की रिपोर्ट है लेकिन इसके साथ ही उनका ये भी कहना था कि “इसकी अभी पुष्टि होना बाकी है.”

इस बीच ज़िले में बहुत से स्थानों पर ईसाइयों के धार्मिक स्थलों पर हमले जारी हैं. जिले में बुधवार रात से जारी सांप्रदायिक हिंसा की घटनाओं में लगभग एक दर्जन चर्चों में या तो आग लगा दी गई या उन्हें नुकसान पहुँचाया गया.

जाँच

चर्चों और ईसाइयों पर जारी हमलों से चिंतित ईसाई नेताओं के एक बीस सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने आर्कबिशप रफेल चिनाथ के नेतृत्व में मुख्यमंत्री नवीन पटनायक से मुलाकात कर इन घटनाओं की केंद्रीय जाँच ब्यूरो या न्यायपालिका से जाँच कराने और कंधमाल में ईसाइयों के लिए पर्याप्त सुरक्षा की माँग की.

इस माँग को मानते हुए उड़ीसा सरकार ने ज़िले में हिंसा की न्यायिक जाँच कराने का आज आदेश दे दिया.

इस बीच केंद्र सरकार जिले में शाँति और सामान्य स्थिति बहाल करने के लिए अर्द्धसैनिक बल की चार और कंपनी भेज रही है. ज़िले में पहले से ही अर्द्धसैनिक बल की तीन कंपनियाँ तैनात हैं.

प्रशासन ने हिंसा में अपने मकान गँवाने वाले लोगों के लिए पुनर्वास शिविर खोले हैं और लगभग 200 लोगों को खाना और कपड़ा दिया जा रहा है.

केंद्र सरकार को गुरूवार को भेजी गई एक रिपोर्ट में उड़ीसा सरकार ने ये दावा किया है कि कंधमाल में हिंसा की घटनाएँ सांप्रदायिक नहीं ‘जातीय’ हैं.

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