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भारत-बर्मा विदेश मंत्रियों की बैठक | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
व्यापार और ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के रास्ते तलाशने के लिए भारत और बर्मा के विदेश मंत्री नई दिल्ली में बैठक करेंगे. भारत के विदेश मंत्री प्रणव मुख़र्जी बर्मा के विदेश मंत्री यू न्यान विन के साथ बुधवार को इस बारे में विस्तार से चर्चा करेंगे. भारत बर्मा में समृद्ध गैस संसाधनों को देखते हुए ऊर्जा के क्षेत्र में समझौते बढ़ाने में रुचि रखता है. भारत की रुचि बर्मा के कुछ अपतटीय गैस क्षेत्रों में रही है लेकिन अब तक ठेका हासिल करने में यह सफ़ल नहीं हो पाया है. बुधवार को होने वाली इस बैठक में एक बहुद्देश्यीय ट्रांसपोर्ट परियोजना पर भी निर्णय होने की उम्मीद है. रक्षा सहयोग यह भी उम्मीद की जा रही है कि भारत वार्ता के दौरान पूर्वोत्तर में विद्रोहियों की गतिविधियों को रोकने के लिए भी बर्मा से सहयोग मांगेगा. बैठक में रक्षा के क्षेत्र में सहयोग का मुद्दा भी उठ सकता है क्योंकि मानवाधिकार को लेकर बर्मा की अंतरराष्ट्रीय आलोचना हुई है और ऐसे में भारत पर भी दबाव है कि वह बर्मा को रक्षा सामानों की आपूर्ति न करे. भारत से उम्मीद की जा रही है कि वह बातचीत में बर्मा पर जल्दी लोकतंत्र बहाल करने के लिए दबाव डालेगा. भारत बर्मा के साथ अपने संबंधों के लिए अंतरराष्ट्रीय दबावों का विरोध करता आया है. | इससे जुड़ी ख़बरें भारत की बदलती विदेश नीति26 अक्तूबर, 2007 | भारत और पड़ोस बर्मा पर नए प्रतिबंधों की सिफ़ारिश15 अक्तूबर, 2007 | भारत और पड़ोस भारत भी बर्मा पर प्रतिबंध के ख़िलाफ़02 अक्तूबर, 2007 | भारत और पड़ोस बर्मा पर भारत की दुविधा और चुप्पी26 सितंबर, 2007 | भारत और पड़ोस विद्रोहियों के ख़िलाफ़ भारत-बर्मा एकजुट15 फ़रवरी, 2007 | भारत और पड़ोस बर्मा के ख़िलाफ़ सुरक्षा परिषद में प्रस्ताव10 जनवरी, 2007 | भारत और पड़ोस पूर्वोत्तर के विद्रोहियों पर बर्मा की कार्रवाई03 अक्तूबर, 2006 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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