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पुलिसकर्मियों के मारे जाने की आशंका | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
छत्तीसगढ़ में दंतेवाड़ा के जंगलों में नक्सलवादियों के हमले के बाद लापता सभी 12 पुलिसकर्मियों के मारे जाने की आशंका जताई जा रही है. दंतेवाड़ा पुलिस का कहना है कि अभी तक लापता पुलिसकर्मियों का कोई अता-पता नहीं चला है जिससे पता चलता है कि उनके बचने की संभावना कम ही है. माओवादियों ने गुरुवार को हमला कर पुलिसकर्मियों के हथियार भी लूट लिए. दूसरी ओर डीजीपी विश्वरंजन ने बताया है कि जवानों की तलाशी में लगा पुलिस दल घटनास्थल के लगभग छह किलोमीटर की दूरी पर है. उन्होंने वहां बारूदी सुरंगे बिछी होने की आशंका जताई और कहा कि पुलिस दल शनिवार को घटनास्थल पर जाएगा. उनका कहन है कि जब तक जवानों का पता नहीं चल जाता या उनके शव नहीं मिल जाते वह आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कह सकते. लापता पुलिसकर्मियों में छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल के आठ और ज़िला बल के चार जवान हैं. ये गुरुवार को गोलापल्ली जंगल में पुलिस के 28 जवानों की टुकड़ी पर नक्सलियों के हमले के बाद अपने साथियों से अलग हो गए थे. 28 में से 16 जवान नक्सली हमले के बाद हथियार सहित गोलापल्ली स्थित आधार शिविर लौट आए थे. ग़ौरतलब है कि छत्तीसगढ़ के 16 में से आठ ज़िलों में नक्सलवादी विद्रोहियों का असर है. हाल में छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जेल से लगभग तीन सौ क़ैदी फ़रार हो गए थे. इनमें सौ से ज़्यादा नक्सली थे. माओवादियों ने पिछले 30 वर्षों से भारत के कई राज्यों में हिंसक आंदोलन चला रखा है. उनका कहना है कि वे भूमिहीनों और आदिवासियों के हक़ों के लिए लड़ रहे हैं. | इससे जुड़ी ख़बरें 'नक्सलवाद के ख़िलाफ़ विशेष बल बने'20 दिसंबर, 2007 | भारत और पड़ोस फ़रार क़ैदियों को पकड़ने का अभियान17 दिसंबर, 2007 | भारत और पड़ोस नक्सलियों समेत कई क़ैदी जेल से फ़रार16 दिसंबर, 2007 | भारत और पड़ोस छत्तीसगढ़ में नक्सली हमला, चार मरे13 दिसंबर, 2007 | भारत और पड़ोस नक्सली हमले में 12 की मौत29 नवंबर, 2007 | भारत और पड़ोस 'नक्सली हमले में 16 पुलिसकर्मी मारे गए'02 नवंबर, 2007 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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