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गुजरात: पहले दौर के लिए मतदान | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
गुजरात विधानसभा चुनाव के पहले चरण में मंगलवार को 87 सीटों के लिए मतदान हो रहा है. इस चुनाव में मुख्य मुक़ाबला भाजपा और कांग्रेस के बीच है. पहले दौर में 182 सदस्यों वाली राज्य विधानसभा की 87 सीटों पर उम्मीदवारों के चुनावी भाग्य का फ़ैसला दक्षिण गुजरात, सौराष्ट्र और कच्छ की जनता करेगी. पहले दौर में एक करोड़ 78 लाख 77 हज़ार से ज़्यादा वोटरों को अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर 53 महिलाओं समेत 669 उम्मीदवारों के भाग्य का फ़ैसला करने का मौका मिलेगा. चुनाव का दूसरा और अंतिम चरण 16 दिसंबर को पूरा होगा जबकि 23 दिसंबर को मतगणना होगी. यह चुनाव गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए बहुत अहम हैं. भाजपा लगातार तीसरी बार राज्य में सत्ता हासिल करने की कोशिश कर रही है. वहीं कांग्रेस का कहना है कि भाजपा ने वर्ष 2002 का चुनाव सांप्रदायिक ध्रुवीकरण के कारण जीता था और अब मोदी के विकास के दावे खोखले साबित हो गए हैं. चुनौती प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी चुनावी सभाओं में नरेंद्र मोदी पर तीखे प्रहार कर चुके हैं. गोधरा कांड और उसके बाद हुई सांप्रदायिक हिंसा की छाप इन चुनावों पर भी स्पष्ट रूप से देखी जा सकती है.
नरेंद्र मोदी को चुनाव में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है. पटेल समुदाय में ख़ासा असर रखने वाले उन्हीं की पार्टी के नेता केशुभाई पटेल बाग़ी तेवर अख़्तियार किए हुए हैं. भाजपा के आठ बाग़ी नेता विपक्षी की नाव पर सवार हैं और कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं. जानकारों का कहना है कि सौराष्ट्र और कच्छ का इलाक़ा बहुत हद तक फ़ैसला कर सकता है कि गुजरात में सत्ता की बागडोर किसके हाथों में होगी. यहाँ सबसे ज़्यादा 58 सीटें हैं और इस इलाक़े में केशुभाई पटेल की पकड़ मज़बूत मानी जाती है. पिछली बार वर्ष 2002 में भाजपा ने इस इलाक़े से 39 सीटें बटोरी थीं. कांग्रेस के हाथ 18 सीटें लगी थीं. एक सीट एक निर्दलीय उम्मीदवार की झोली में गई थी. मंगलवार के चुनाव में मोदी के 10 मंत्रियों की चुनावी किस्मत दांव पर लगी है. |
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