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चुनाव लड़ रही हैं सोनिया मौसी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
सोनिया चाहती हैं कि गुजरात की जनता को एक किन्नर को जिताना चाहिए जिससे कि यदि कांग्रेस-भाजपा जनता का काम न करें तो वे ‘अपनी वाली’ करके जनता का काम करवा सकें. सोनिया अहमदाबाद की शाहपुर विधानसभा में रिपब्लिकन पार्टी ऑफ़ इंडिया की प्रत्याशी हैं. दूसरे किन्नरों से अलग बात यह है कि वे पढ़ी लिखी हैं और अंग्रेज़ी बोल-पढ़ लेती हैं. जैसा कि वो बताती हैं उनकी माँ आईएएस अफ़सर हैं और पिता भी किसी बड़े सरकारी ओहदे पर हैं. उनकी एक बहन ब्रिटेन में रहती है और दो अमरीका में. उनकी पढ़ाई लिखाई उनकी बातों में झलकती है. वे कहती हैं, “भाजपा और कांग्रेस दोनों ने मिलकर समाज को धर्म के नाम पर बाँट दिया है.” लेकिन अचानक उनकी भाषा बदल भी जाती है, “दोनों ही पार्टियाँ जनता को धोखा दे रही हैं, भाजपा सामने से मारती है और कांग्रेस पीछे से.” राजनेताओं को लेकर सोनिया ख़ासी नाराज़ नज़र आती हैं और यह पूछने पर कि जनता किन्नर को क्यों चुनेगी, वे कई नेताओं का नाम लेकर कहती हैं, “हममें और उनमें फ़र्क ही क्या है, वे पर्दे के पीछे के किन्नर हैं और हम पर्दे के सामने के.” सोनिया का दावा है कि किन्नर ही समाज में भ्रष्टाचार को दूर कर सकते हैं. उनका तर्क है, “हमारे न कोई नाते रिश्तेदार हैं न इसकी कोई संभावना है तो हम भ्रष्टाचार किसके लिए करेंगे?” समर्थन सोनिया नहीं बताती कि वे पहले भी एक बार चुनाव लड़ चुकी हैं और ऐन वक़्त पर अपना नाम वापस ले लिया था. यह जानकारी उनके तिमंज़िले घर के नीचे रहने वाले मोहम्मद फ़रीद देते हैं लेकिन कहते हैं कि किन्नर के चुनाव में खड़े होने में कोई हर्ज़ नहीं है. हालांकि इस बार सोनिया के साथ किन्नर समाज का बड़ा समर्थन दिखाई देता है.
किन्नर समाज की राष्ट्रीय अध्यक्ष मध्यप्रदेश में विधायक रह चुकी शबनम मौसी उनके प्रचार के लिए आने वाली हैं. किन्नर समाज की राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष सोनम भी राजस्थान से वहाँ पहुँची हैं. सोनम बताती हैं कि वे किन्नर समाज की ओर से चुनाव के लिए धनराशि लेकर आई हैं. यह धनराशि इतनी बड़ी है जितनी आमतौर पर राष्ट्रीय पार्टियाँ अपने उम्मीदवार को नहीं देतीं. सोनम कहती हैं, “किन्नर समाज को सोनिया से बड़ी उम्मीदें हैं क्योंकि वह पढ़ी लिखी है और अपनी बात कहने का तरीक़ा जानती हैं.” सोनम का कहना है कि शबनम मौसी के विधायक बनने का ज़्यादा फ़ायदा इसलिए नहीं हुआ क्योंकि वे पढ़ी लिखी नहीं थीं. विदेशी किन्नर सोनिया के चुनाव में एक दिलचस्प बात यह भी है कि उनके समर्थन में अमरीका से भी किन्नरों का एक दल अहमदाबाद पहुँचा हुआ है. एलिज़ाबेथ, ऐशा और पल्लवी चुनाव तक वहाँ रहने वाली हैं. एलिज़ाबेथ ने फ़ोन पर हुई बातचीत में बीबीसी से कहा कि उन्हें लगता है कि लोकतंत्र में जब सब को बराबरी का हक़ है तो सोनिया को भी जनता का प्रतिनिधित्व करने का एक मौक़ा मिलना चाहिए. हालांकि सोनिया की उम्र अभी बहुत नहीं है लेकिन वे अपने आपको शबनम मौसी की तर्ज़ पर ही सोनिया मौसी कहलवाना पसंद करती हैं. वे बताती हैं कि अभी ब्रिटेन से भी किन्नरों का एक दल अहमदाबाद पहुँचने वाला है. यानी किन्नरों का ग्लोबल यानी वैश्विक समाज भी गुजरात में दिलचस्पी ले रहा है. सोनिया फ़िलहाल कार्यकर्ताओं की बैठकों और रैलियों की योजनाएँ बनाने में व्यस्त हैं. हालांकि उनके विधानसभा क्षेत्र के लोग अभी यह कह नहीं रहे हैं कि सोनिया गंभीर उम्मीदवार हैं, लेकिन शबनम मौसी ने जो आस जगाई है उसका असर दूर-दूर तक दिखाई देता है. | इससे जुड़ी ख़बरें 'असली-नकली किन्नरों' में उलझी पुलिस23 जुलाई, 2007 | भारत और पड़ोस 'समान लिंग' शादी के मामले में सज़ा28 मई, 2007 | भारत और पड़ोस पटना में किन्नर वसूल रहे हैं टैक्स10 नवंबर, 2006 | भारत और पड़ोस बीमा कंपनी से नाराज़ हैं किन्नर02 सितंबर, 2004 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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