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पटना में किन्नर वसूल रहे हैं टैक्स | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
टैक्स वसूलने के लिए बिहार की राजधानी पटना के नगर निगम ने अनूठा तरीक़ा निकाला है और टैक्स वसूलने का ठेका शहर के किन्नरों को दिया है. अब पटना के किन्नर शहर में घूम-घूम कर लोगों पर टैक्स देने के लिए दबाव डालेंगे. इसके बदले उन्हें चार प्रतिशत की दर से कमीशन दिया जाएगा. नगर निगम प्रशासन का मानना है कि किन्नरों को इस काम में लगाने से कर इकट्ठा करने के काम में तेजी आएगी. किन्नरों ने अपना काम शुरु भी कर दिया है. निगम के अधिकारियों ने बताया कि अपने पहले दिन के काम के दौरान इन किन्नरों ने क़रीब चार लाख रुपए इकट्ठा किए और चार प्रतिशत के हिसाब से इन्हें 16 हज़ार रुपए दे दिया गया. इस नए काम के बारे में एक किन्नर सायरा का कहना है," हम नगर निगम के लिए उन लोगों से टैक्स इकट्ठा करेंगे जिन्होंने सालों से राजस्व नहीं दिया है. अगर लोग टैक्स नहीं देंगे तो निगम आम जनता को सुविधाएँ कैसे उपलब्ध करवाएगा." पुलिस के साथ ये किन्नर दुकानदारों और बड़े बकायादारों के पास गए और उनसे टैक्स अदा करने के लिए कहा. समाचार एजेंसी एएफ़पी के अनुसार ये किन्नर राम सागर सिंह नाम के एक आदमी से "टैक्स अदा करो, पटना नगर निगम का टैक्स अदा करो" गाते हुए टैक्स देने के लिए कहते हैं जिन पर क़रीब एक लाख रुपए बकाया है. किन्नरों के इस दबाव और शोर से बेचैन होकर रामसागर ने आश्वासन दिया कि वो एक हफ़्ते में पूरा टैक्स अदा कर देंगे. भरत शर्मा नाम के एक राजस्व अधिकारी ने समाचार एजेंसी एपी को बताया कि वो इन किन्नरों के काम से काफ़ी ख़ुश हैं. उसने कहा कि समाज में इनके स्थान और लोगों पर दबाव डालने में इनकी निपुणता से राजस्व इकट्ठा करने में हमें बहुत सहायता मिलेगी. | इससे जुड़ी ख़बरें चुनाव में किन्नरों की भागीदारी14 फ़रवरी, 2002 | पहला पन्ना किन्नर महापौर पद पर बहाल 01 जनवरी, 1970 | पहला पन्ना भोपाल का किन्नर सम्मेलन 29 सितंबर, 2002 | पहला पन्ना किन्नर पुरुष ही हैं: अदालत | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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