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'असली-नकली किन्नरों' में उलझी पुलिस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
जबलपुर में पुलिस किन्नरों को लाइसेंस देने पर विचार कर रही है. जबलपुर में विवाद असली और नकली किन्नरों को लेकर है. हालात इतने ख़राब है कि एक किन्नर रामबाई की हत्या भी हो चुकी है. पिछले कुछ समय से किन्नर गुटों के बीच लगातार झड़पें जारी हैं, असली किन्नरों का कहना है कि कुछ लोग महिलाओं के कपड़े पहनकर उनके धंधे में सेंध लगा रहे हैं. असली किन्नरों ने कई बार इसका विरोध किया और पिछले कुछ माह में ये लड़ाई कई बार पुलिस तक भी गई जिसे सुलझाना पुलिस के लिए भारी सिरदर्द बन गया. जबलपुर के पुलिस अधीक्षक मकरंद देउसकर कहते हैं, "मैं सोचता हूँ कि असली किन्नरों को लाइसेंस दिया जाए. ये काम नगर निगम को करना चाहिए. इसके लिये एक पत्र भी निगम कमिश्नर को लिखा गया है." दरअसल, ये काम जितना आसान दिखता है, उतना है नही. आख़िर कैसे तय किया जाए कि कौन असली किन्नर है, कौन नक़ली? जबलपुर के विक्टोरिया अस्पताल के सिविल सर्जन हितेश अग्रवाल कहते है कि वो किसी भी तरह से किसी को पहचान पत्र नहीं दे सकते. उऩका कहना है, "हम टेस्ट रिपोर्ट दे सकते हैं. जाँच के बाद इसे ही बतौर पहचान पत्र इस्तेमाल किया जा सकता है." ज़बरदस्ती नहीं वो कहते है कि ये मामला स्वेच्छा और सहमति का ही हो सकता है. किसी से ज़ोर ज़बरदस्ती नहीं की जा सकती. यही बात ज़िला प्रशासन भी कहता है. नगर निगम कमिश्नर ओपी श्रीवास्तव कहते हैं, "इस तरह का लाइसेंस अभी तक निगम ने नहीं दिया है. इस मामले को मेयर इन कॉंसिल में ले जाएँगे और उनकी अनुमति के बाद लाइसेंस दिया जा सकता है. हालाँकि नगर निगम क़ानून में इसका प्रावधान नही है." पूर्व पार्षद और किन्नरों की उस्ताद हीरा बाई कहती है कि प्रशासन का क़दम अच्छा है. वो कहती है, "असली किन्नरों का घर से निकलना मुश्किल हो गया है. हर वक़्त वो डर में ज़िंदगी बसर कर रहे है." वैसे पुलिस किन्नर रामबाई की हत्या की वजह असली-नकली विवाद को नही मानती है. सवाल ये है कि अगर किन्नरों को लाइसेंस दे भी दिए जाएँ तो भी पुलिस नकली किन्नरों को कैसे रोक पाएगी. पुलिस अधीक्षक इसका सीधा जवाब न देते हुए कहते हैं, "असली हो या नकली, किसी को भी नाजायज़ वसूली नहीं करने दी जाएगी. उसके ख़िलाफ़ जबरन वसूली का मामला दर्ज करवाया जाएगा." वहीँ, किन्नर अशरफ़ी बाई कहती है कि नकली किन्नरों के चलते उनकी आमदनी पर विपरीत असर पड़ा है और उन्हें भारी दिक्कत उठानी पड़ रही है. असली जड़ इस पूरे विवाद में कुछ असली किन्नरों की भूमिका पर भी सवाल उठाया जा रहा है. किन्नर आपस में मोहल्ले या वार्ड बाँट लेते है. बताया जाता है कि कुछ असंतुष्ट किन्नरों ने अपने साथ नकली किन्नरों को शामिल किया और वहीँ से इनके बीच लड़ाई शुरू हो गई. किन्नर खिलौना बाई कहती हैं, "अगर जल्दी प्रशासन कुछ कारवाई नही करता है तो उनका ग़ुज़र-बसर मुश्किल हो जाएगा." |
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