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सोमवार, 03 दिसंबर, 2007 को 13:18 GMT तक के समाचार
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हमारा इरादा और मज़बूत हुआ है- नवाज़
नवाज़ शरीफ़
नवाज़ शरीफ़ ने लाहौर से उम्मीदवारी का पर्चा भरा था
पाकिस्तान के चुनाव आयोग ने विपक्षी नेता और पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ की उम्मीदवारी का पर्चा रद्द कर दिया है.

इस फ़ैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए नवाज़ शरीफ़ ने कहा, "यह बहुत ही आश्चर्यजनक फ़ैसला है लेकिन इससे मेरे हौसले पस्त नहीं हुए हैं, कल के मुक़ाबले हमारा इरादा आज और मज़बूत हो गया है. हम तानाशाही के ख़िलाफ़ अधिक जोश और लगन के साथ लड़ेंगे."

 यह बहुत ही आश्चर्यजनक फ़ैसला है लेकिन इससे मेरे हौसले पस्त नहीं हुए हैं, कल के मुक़ाबले हमारा इरादा आज और मज़बूत हो गया है. हम तानाशाही के ख़िलाफ़ अधिक जोश और लगन के साथ लड़ेंगे
नवाज़ शरीफ़

नवाज़ शरीफ़ ने कहा कि वे देश की जनता के लिए लड़ रहे हैं और देश की जनता उनके साथ है.

उनके वकील इम्तियाज़ कैफ़ी ने कहा, "नवाज़ शरीफ़ के नामांकन के रद्द होने से साफ़ दिखता है कि इसके पीछे कुछ ताक़तें काम कर रही हैं क्योंकि क़ानूनन तो उनका नामांकन तो रद्द नहीं किया जा सकता."

अपील

पाकिस्तान मुस्लिम लीग (एन) के नेता नवाज़ शरीफ़ सात दिन के भीतर लाहौर में चुनावी न्यायाधिकरण में अपील कर सकते हैं.

 नवाज़ शरीफ़ के नामांकन के रद्द होने से साफ़ दिखता है कि इसके पीछे कुछ ताक़तें काम कर रही हैं क्योंकि क़ानूनन तो उनका नामांकन तो रद्द नहीं किया जा सकता
इम्तियाज़ कैफ़ी, नवाज़ के वकील

नवाज़ शरीफ़ ने नेशनल एसेंबली के चुनाव में लाहौर से बतौर उम्मीदवार पर्चा भरा था लेकिन वे साथ ही चुनाव के बहिष्कार की बात भी करते रहे हैं.

लाहौर से चुनाव लड़ने वाले कुछ अन्य उम्मीदवारों ने उनकी नामज़दगी पर एतराज़ किया था, उनका कहना था कि आपराधिक मामलों में नवाज़ शरीफ़ को दोषी पाया गया है इसलिए वे चुनाव लड़ने के योग्य नहीं हैं.

लाहौर से चुनाव का पर्चा भरने वाले पत्रकार शाहिद औरकज़ई की याचिका पर रिटर्निंग ऑफ़िसर राजा क़मर अल ज़माँ ने यह फ़ैसला सुनाया.

नवाज़ शरीफ़ के वकील ख्वाजा हारिस ने दलील दी थी कि उनके मुवक्किल को किसी मामले में कोई सज़ा नहीं हुई है इसलिए वे चुनाव लड़ सकते हैं.

सोमवार के ही दिन नवाज़ शरीफ़ की मुलाक़ात पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी की नेता बेनज़ीर भुट्टो से होने वाली है जिसका उद्देश्य यह तय करना है कि वे चुनाव का बहिष्कार करेंगे या नहीं.

बेनज़ीर भुट्टो का कहना है कि वे इन चुनावों का बहिष्कार नहीं चाहतीं क्योंकि उससे 'मुशर्रफ़ को लाभ मिलेगा' और वे नेशनल एसेंबली में बहुमत हासिल कर लेंगे.

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