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अमरीका में मोदी के लिए मुहिम | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
हज़ारों मील की दूरी के बावजूद भारत से बाहर रहने वाले गुजराती मूल के बहुत से लोगों की निगाहें गुजरात में 11 दिसंबर से होने वाले विधानसभा चुनावों पर हैं. गुजराती मूल के अमरीकी लोग बड़ी संख्या में गुजरात के मौजूदा मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी का जमकर समर्थन कर रहे हैं. एक तरह से अमरीका इन दिनों गुजरात के चुनावों में अप्रत्यक्ष भागीदारी करने वाले भारत से बाहर रह रहे गुजरातियों का गढ़ बन गया है. हिमायत यह लोग नरेंद्र मोदी को गुजरात में विकास कार्य करने और राज्य की तरक्की के लिए पूरा श्रेय देते हैं और हर मामले में उनकी खुलकर हिमायत करते हैं. यहाँ तक कि अगर कोई गुजरात में होने वाले वर्ष 2002 के दंगों का ज़िक्र भी मोदी के नाम के साथ कर दे तो उसे खरी-खोटी सुनाने में भी पीछे नहीं रहते. वर्ष 2002 में हुए सांप्रदायिक दंगों के लिए मोदी सरकार की जमकर खिंचाई हुई है. आरोप लगाया जाता है कि मोदी सरकार ने मुसलिम समुदाय के लोगों को दंगाइयों से बचाने के लिए पर्याप्त क़दम नहीं उठाए थे. लेकिन अमरीका में रह रहे गुजराती मूल के लोगों में से ज़्यादातर का मानना है कि मोदी का दंगों से कोई लेना-देना नहीं था और जो कुछ हुआ वह क़ानून और व्यवस्था की स्थिति बिगड़ने के कारण ही हुआ था. अपने इस चहेते नेता के लिए उनके दिल में जो सम्मान है उसके ही कारण वह नरेंद्र मोदी को एक बार फिर यानी तीसरी बार चुनाव में जीत हासिल कराकर मुख्यमंत्री के पद पर आसीन होते देखना चाहते हैं. मुहिम न्यूयॉर्क के आसपास के इलाके में भारी संख्या में गुजराती मूल के लोग रहते हैं और यहीं से मोदी को दुनिया भर में रह रहे गुजरातियों का समर्थन मोदी को दिलाने की मुहिम जारी है. अमरीका की कई गुजराती मूल की संस्थाएं संगठित तरीके से यह मुहिम चला रही हैं. इनमें सपोर्ट गुजरात और फ़्रेंड्स ऑफ़ गुजरात नामक संस्थाएं आगे हैं. इन संगठनों के पदाधिकारियों का कहना है कि मोदी के बारे में भारत में मीडिया ने ग़लत प्रचार करके उन्हें बदनाम करने की कोशिश की है. सपोर्ट गुजरात की कुसुम व्यास कहती हैं, "नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में गुजरात में विकास हुआ है. बिजली, पानी की समस्या कम हुई है. लेकिन मीडिया को यह सब नहीं दिखाई देता है वह तो बस एक ही बात के पीछे पड़े हैं, गुजरात दंगे. अरे भई! भारत में दंगे होना कोई नई बात तो नहीं है." गुजराती मूल के लोगों से व्यापक पैमाने पर अपील की जा रही है कि वह परिवार समेत मोदी को वोट दिलाने के लिए गुजरात जाएँ. अमरीका से बड़ी संख्या में ईमेल और फ़ोन के ज़रिए गुजरात में रहने वाले लोगों को बार-बार याद दिलाया जा रहा है कि अगर गुजरात को बचाना है तो मोदी को ही फिर मुख्यमंत्री पद पर बैठाना होगा. कुसुम कहती हैं, "हम तो लोगों से कह रहे हैं कि गुजरात में जो भी उनके सगे संबंधी और दोस्त हैं उन सबको बोलो कि वह वोट भी दें और मोदीजी के चुनाव अभियान में भी हाथ बटाएँ. हम अमरीका में, यूरोप के कई देशों में औऱ वेस्ट इंडीज़ में भी लोगों से टीवी औऱ रेडियो के माध्यम से भी यही अपील कर रहे हैं." विज्ञापन अमरीका के कई समाचार पत्रों में मोदी के समर्थन में पूरे पन्ने के विज्ञापन भी छपवाए गए हैं. इन विज्ञापनों में नरेंद्र मोदी की बड़ी सी तस्वीर के साथ यह भी लिखा है कि मोदी भारत के चंद राष्ट्रवादी नेताओं में से हैं जिनका मातृभूमि के लिए अपार प्रेम है. इन विज्ञापनों में कई बिंदुओं के ज़रिए मोदी सरकार की उपलब्धियां भी गिनाई गई हैं. मोदी का समर्थन सिर्फ़ गुजरातियों तक ही सीमित नहीं है. मोदी के एक समर्थक प्रसाद यलमंची दक्षिण भारत के रहने वाले हैं और अब अमरीका में रिटायर्ड जिंदगी गुज़ार रहे हैं. वह कहते हैं, "मैं न तो राजनीति में हूँ और न ही किसी पार्टी से जुड़ा हूँ लेकिन मैं नरेंद्र मोदी को गुजरात में उनके अच्छे काम के लिए समर्थन देता हूँ." अमरीका में रहने वाले मोदी के इन समर्थकों को इस बात की कसक भी है कि अमरीकी सरकार ने मोदी को अमरीका नहीं आने दिया. उनका कहना है कि मोदी तो आतंकवाद के खिलाफ़ लड़ाई लड़ने वाले महान योद्वा हैं. हालाँकि अमरीका में रहने वाले बहुत से भारतीय मुसलमानों को नरेंद्र मोदी एक आंख नहीं भाते, लेकिन अमरीका में रहने वाले मोदी के समर्थकों का कहना है कि आज मुसलमानों के लिए गुजरात से ज़्यादा सुरक्षित जगह दुनिया भर में और कोई नहीं है. मोदी को जिताने की इसी मुहिम के तहत बहुत से गुजराती मूल के अमरीकी गुजरात भी पहुँचे हुए हैं. | इससे जुड़ी ख़बरें चुनाव आयोग में सोनिया की शिकायत 03 दिसंबर, 2007 | भारत और पड़ोस ग़रीबों को मुफ़्त चावल-गेहूँ-टीवी का वादा02 दिसंबर, 2007 | भारत और पड़ोस 'मोदी विज्ञापन' के ख़िलाफ़ शिकायत 01 दिसंबर, 2007 | भारत और पड़ोस सिर्फ़ विकास से मोदी का भी काम न चला!30 नवंबर, 2007 | भारत और पड़ोस गुजरातः 20 विधायकों को मौका नहीं18 नवंबर, 2007 | भारत और पड़ोस संसद का शीतकालीन सत्र शुरू15 नवंबर, 2007 | भारत और पड़ोस गुजरात दंगे: आठ को उम्रक़ैद30 अक्तूबर, 2007 | भारत और पड़ोस मुख्य चुनाव आयुक्त गुजरात के दौरे पर30 अक्तूबर, 2007 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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