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रविवार, 02 दिसंबर, 2007 को 10:39 GMT तक के समाचार
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एवरेस्ट के पास मिले हिममानव के 'पदचिह्न'
हिममानव का पदचिह्न (फ़ाइल फ़ोटो)
रहस्यमय हिममानव को कुछ लोग विध्वंसकारी ताकत का स्वामी मानते हैं तो कुछ रक्षक.
अमरीका के एक टीवी प्रस्तोता ने नेपाल में दुर्लभ हिममानव (येती) के पंजों के निशान मिलने का दावा किया है.

जोश गेट्स का कहना है कि वो और उनके सहयोगी इन निशानों के मिलने से "काफ़ी रोमांचित" हैं.

हालाँकि उनका कहना है कि वे पक्के तौर पर नहीं कह सकते कि पैरों के ये निशान येती के ही हैं.

जोश गेट्स और उनकी टीम "डेस्टीनेशन ट्रुथ" नाम से दुर्लभ जीव-जंतुओं पर आधारित एक टीवी कार्यक्रम बनाती है.

बुधवार को मिले पाँवों के इन निशानों ने हिममानव को लेकर नेपाल में फिर से उत्सुकता की लहर पैदा कर दी है.

गेट्स ने कहा कि वे रात में टार्च लेकर खोज़बीन में जुटे थे क्योंकि कथित तौर पर हिममानवों को सामान्य रुप से रात में ही देखा गया है.

तीन निशान

टीम के एक नेपाली सदस्य ने पाँव के तीन निशानों की पहचान की और गेट्स को इसके बारे में बताया.

हिममानव के पंजा का काल्पनिक स्केच
टीम का दावा है कि निशान में मानवीय गुण मौज़ूद मिले.

गेट्स ने कहा कि पहला निशान दाहिने पंजे का लगता है.

उनके अनुसार पाँच उंगलियों वाला यह निशान 33 सेंटीमीटर लंबा और 25 सेंटीमीटर चौड़ा है.

इसके अलावा एक निशान एड़ी का मिला है. साथ ही तीसरे निशान के तौर पर एक धुंधली छाप भी मिली है.

रोमांचित गेट्स ने बताया कि उन्हें पहले पदचिह्न में मानवीय गुण मिले.

वे यह मानने को तैयार नहीं है कि ये निशान मानवनिर्मित या भालू जैसे परिचित जानवर के हैं.

लेकिन वे इसे हिममानव के पंजों का निशान मानने को लेकर निश्चित भी नहीं हैं.

गेट्स की टीम ने तीनों निशान के नमूने लिए हैं जिसे जाँच के लिए अमरीका में वैज्ञानिकों के पास भेजा जाएगा.

दावा-प्रतिदावा

सिर्फ तीन निशान मिलने के सवाल पर गेट्स कहते हैं कि नौ हज़ार फ़ीट की ऊँचाई वाले इस इलाके में ज़्यादातर भू-भाग पथरीला है.

रहस्यमय हिममानव के बारे में कई शताब्दी पहले से कहा-सुना जा रहा है.

कुछ मानते हैं कि यह विध्वंसकारी ताक़तों का मालिक है तो कई इसे रक्षा करने वाला बताते हैं.

एवरेस्ट के पास एक बौद्ध मठ के बारे में कहा जाता है कि यह किसी हिममानव की खोपड़ी है.

इसकी जाँच करने वाले वैज्ञानिकों ने माना कि यह किसी खुर वाले स्तनपायी की खाल का बना है तो दूसरे विशेषज्ञों ने इस निष्कर्ष को ख़ारिज़ कर दिया.

1950 के दशक में ब्रिटिश खोज़कर्ता इरिक शिप्टन ने बर्फ़ पर मिले कुछ निशानों की तस्वीर ली थी जिसे कुछ लोग हिममानव का मानते हैं.

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