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आम लोगों की मौत पर चिंता | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयुक्त लुई आर्बर ने अफ़ग़ानिस्तान में अंतरराष्ट्रीय सेनाओं के अभियानों में मारे जाने वाले आम लोगों की बढ़ती संख्या पर चिंता जताई है. लुई आर्बर ने अफ़ग़ानिस्तान का छह दिन का दौरा पूरा किया और इस मौक़े पर उन्होंने कहा कि आम लोगों की मौत से लोगों का भरोसा भी हिल रहा है. लुई आर्बर ने यह भी माँग की है कि नैटो के नेतृत्व वाली विदेशी सेनाएँ जिस तरह से बंदियों को अफ़ग़ान सुरक्षा बलों की हिरासत में देते हैं उसमें भी ज़्यादा एहतियात बरती जानी चाहिए. इससे पहले मानव कल्याण के लिए काम करने वाली एक अंतरराष्ट्रीय संस्था ऑक्सफ़ैम ने कहा था कि वर्ष 2007 में अंतरराष्ट्रीय सेना और अफ़ग़ान सैनिकों के हाथों लगभग 1200 आम लोगों की मौत हो चुकी है. ऑक्सफ़ैम ने अफ़ग़ानिस्तान में चल रहे सहायता कार्यक्रमों की भी आलोचना की और कहा कि ज़्यादातर धनराशि इस तरह से ख़र्च की गई जो या तो प्रभावितों तक नहीं पहुँचा या फिर बहुत कम पहुँचा. ऑक्सफ़ैम ने यह रिपोर्ट ब्रिटेन की एक संसदीय समिति के लिए तैयार की है. रिपोर्ट में कहा गया है कि सहायता राशि का बहुत बड़ा हिस्सा कंपनियों या छोटे ठेकेदारों के मुनाफ़े के लिए ख़र्च किया गया है या फिर वहाँ मौजूद कर्मचारियों के बढ़े हुए वेतन और भत्तों पर ख़र्च की गई. अंतरराष्ट्रीय मानक लुई आर्बर ने बुधवार को छह दिन का अफ़ग़ान दौरा समाप्त करने के बाद काबुल में कहा कि देश में आम लोगों की मौत के लिए कोई सफ़ाई नहीं पेश की जा सकती है.
लुई आर्बर ने विद्रोहियों की इस बात के लिए आलोचना की कि वे आत्मघाती हमलावरों मानव शील्ड का इस्तेमाल करते हैं जो अनैतिक है. साथ ही आर्बर ने यह भी कहा कि अंतरराष्ट्रीय सेनाओं की यह पूरी ज़िम्मेदारी बनती है कि वे आम लोगों को हताहत होने से बचाने के लिए हर संभव एहतियात बरतें. लुई आर्बर ने कहा कि नैटो के नेतृत्व वाली अंतरराष्ट्रीय सेनाओं के कमांडर यह जानते हैं कि इस मुद्दे की अहमियत क्या है और उन्हें उसी के अनुसार अपनी रणनीति में बदलाव करने होंगे लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि हो सकता है कि भविष्य में हताहत होने वाले आम लोगों का संख्या कम हो जाए लेकिन यह तो तय है कि आम लोग लड़ाई की चपेट में ज़रूर आएंगे. लुई आर्बर ने ज़ोर देकर कहा कि अंतरराष्ट्रीय सेना यह सुनिश्चित करे कि उसके अभियानों की चपेट में आने वाले आम लोगों के परिवारों को समुचित मुआवज़ा दिया जाए, "क़ानून के मुताबिक सभी पक्षों की अंतरराष्ट्रीय मानकों के प्रति बराबर ज़िम्मेदारी बनती है." | इससे जुड़ी ख़बरें 'नैटो क़ैदियों को सरकार को न सौंपे'13 नवंबर, 2007 | भारत और पड़ोस जब मौत ने दस्तक दी...07 नवंबर, 2007 | भारत और पड़ोस आत्मघाती हमले में 40 की मौत06 नवंबर, 2007 | भारत और पड़ोस सौ पाकिस्तानी सैनिक अभी भी बंधक03 नवंबर, 2007 | भारत और पड़ोस बंधक बनाए गए 48 सैनिक रिहा हुए02 नवंबर, 2007 | भारत और पड़ोस स्वात में सेना की कार्रवाई तेज़28 अक्तूबर, 2007 | भारत और पड़ोस स्वात में जवानों सहित 13 की हत्या27 अक्तूबर, 2007 | भारत और पड़ोस चरमपंथी ठिकाने पर सेना का हमला26 अक्तूबर, 2007 | भारत और पड़ोस इंटरनेट लिंक्स बीबीसी बाहरी वेबसाइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है. | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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