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'राहुल गांधी के अपहरण की योजना थी' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
उत्तर प्रदेश पुलिस ने कहा है कि उन्होंने शुक्रवार सुबह लखनऊ के पास हुई एक मुठभेड़ में तीन संदिग्ध 'आत्मघाती हमलावरों' को गिरफ़्तार किया है. राज्य के पुलिस महानिदेशक विक्रम सिंह ने संवाददाता सम्मेलन में बताया कि इन तीनों संदिग्ध चरमपंथियों को शुक्रवार तड़के लखनऊ-सीतापुर रोड पर हुई एक मुठभेड़ में पकड़ा गया है. पुलिस ने बताया है कि तीनों गिरफ़्तार संदिग्ध हमलावरों का ताल्लुक चरमपंथी संगठन जैशे मोहम्मद से है और ये तीनों पाकिस्तान के लाहौर, मुल्तान और गुजरावाला के रहनेवाले हैं. इन संदिग्ध चरमपंथियों ने पत्रकारों से हुई बातचीत में इस बात की पुष्टि की है कि वे पाकिस्तान के रहने वाले हैं. उन्होंने पत्रकारों को बताया कि उनका इरादा कांग्रेस महासचिव और सोनिया गांधी के पुत्र राहुल गांधी का अपहरण करने का था. उनका कहना है कि कि इसके बदले वे अपने 42 साथियों की रिहाई की माँग करने वाले थे. शुक्रवार को हुई एक प्रेस कांफ्रेंस में पुलिस महानिदेशक ने बताया कि इन संदिग्ध चरमपंथियों के पास से दो एके-47 राइफलें, कुछ कारतूस, तीन पिस्तौलें, 16 चाइनीज़ हथगोले और चार किलो संदिग्ध विस्फोटक बरामद किया है. पुलिस का कहना है कि जो विस्फोटक इन लोगों के पास से बरामद हुआ है, शुरुआती तौर पर देखने पर लगता है कि वह आरडीएक्स हैं. क्या थी 'साजिश'..? राज्य पुलिस महानिदेशक विक्रम सिंह बताते हैं कि ये संदिग्ध हमलावर एक ख़ास मिशन पर पाकिस्तान से आए थे और यहाँ इनका इरादा किसी बड़ी राजनीतिक हस्ती को अगवा करने का था.
पुलिस महानिदेशक ने बताया, "किसी बड़े नेता का अपहरण करने के पीछे इनका मक़सद भारतीय जेलों में बंद अपने 42 साथियों को छुड़वाना था. इनमें अफ़ज़ल गुरू, नसरुल्लाह नेपाली आदि के नाम प्रमुख हैं." पुलिस का दावा है कि पूछताछ के दौरान इन लोगों ने कुछ प्रमुख राजनीतिक हस्तियों के चित्र, उनकी रैलियाँ, यात्राओं और मुलाक़ातों से जुड़ी काफ़ी जानकारी इंटरनेट से डाउनलोड की थी और उनका अध्ययन किया था. राज्य पुलिस के अधिकारियों ने इशारों-इशारों में यह भी कहा कि कांग्रेस के एक युवा नेता, राहुल गांधी भी इनके निशाने पर हो सकते हैं. हालांकि अधिकारी इस बारे में कुछ भी साफ़ तौर पर कहने से बचते ही रहे. पुलिस प्रमुख ने यह भी बताया कि इन लोगों की एक माँग यह थी कि कश्मीर मसले के समाधान के लिए पहले निचले स्तर से बातचीत शुरू की जानी चाहिए. संदिग्धों की परेड इन तीनों की गिरफ़्तारी को बड़ी सफलता बताने वाली उत्तर प्रदेश पुलिस ने शुक्रवार को जब प्रेस कांफ्रेंस में इनकी गिरफ़्तारी की घोषणा की तो इन्हें प्रेस के सामने पेश भी किया. साथ ही बरामद गोला-बारूद भी दिखाया गया. देखने से मालूम हो रहा था कि जो सामान बरामद बताया जा रहा है वो काफी नया है.
पुलिस ने बताया कि इनके नाम मोहम्मद आबिद उर्फ़ फ़ाते, यूसुफ़ उर्फ़ फ़ैसल और मिर्ज़ा राशिद बेग उर्फ़ राजा क़जाफ़ी हैं. राज्य पुलिस के अनुसार पूछताछ में इन लोगों ने बताया कि इन्होंने हथियार चलाने का प्रशिक्षण पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान में लिया और ये तीनों आत्मघाती दस्ते के ख़ास हमलावर हैं. 'मुठभेड़' पर सवाल पुलिस ने बताया है कि इन संदिग्ध लोगों को शुक्रवार सुबह स्पेशल टास्क फ़ोर्स के दस्ते के साथ हुई एक मुठभेड़ के बाद गिरफ़्तार किया गया. पुलिस कहती है कि जानकारी के मुताबिक ये लोग 14 नवंबर को संपर्क क्रांति एक्सप्रेस में सफ़र करके जम्मू से दिल्ली आए और फिर वहाँ से एक सैंट्रो कार में लखनऊ की ओर आ रहे थे, जब इनकी पुलिस के साथ मुठभेड़ हुई. पुलिस के मुताबिक इन लोगों को स्पेशल टास्क फ़ोर्स ने ख़ुफ़िया जानकारी के आधार पर शहर के बाहर एक चेकपोस्ट पर रोका. इसपर इन लोगों ने पिस्तौल से कुछ फ़ायर किए. इनकी कार अनियंत्रित हुई और एक गड्ढे में जा गिरी जिसके बाद इन्हें गिरफ़्तार कर लिया गया. पर कई लोग इस मुठभेड़ पर सवाल भी उठाते हैं. राज्य पुलिस के पास पत्रकारों के कई सवालों के जवाब नहीं थे. मसलन, पत्रकारों ने पूछा कि इनके पास सेंट्रो कार कहाँ से आई, ये लोग फिलहाल कहाँ जा रहे थे, इन लोगों का स्थानीय मददगार कौन था और ये कहाँ रुकने वाले थे. पुलिस ने यह भी नहीं बताया कि इन लोगों के निशाने पर कौन-कौन सी राजनीतिक हस्तियाँ थीं. कुछ लोगों ने तो यह भी सवाल उठाया कि जब पुलिस ने इन लोगों को शहर से बाहर रोकने की कोशिश की तो इतनी बड़ी मात्रा में गोला-बारूद होते हुए भी इन लोगों ने उसका इस्तेमाल क्यों नहीं किया. | इससे जुड़ी ख़बरें चरमपंथियों से मुठभेड़, सात मारे गए09 नवंबर, 2007 | भारत और पड़ोस अगवा पाकिस्तानी सैनिक रिहा हुए04 नवंबर, 2007 | भारत और पड़ोस मुंबईः तीन संदिग्ध व्यक्तियों के स्केच जारी26 अक्तूबर, 2007 | भारत और पड़ोस श्रीनगर मुठभेड़ ख़त्म, चरमपंथी मारे गए12 अक्तूबर, 2007 | भारत और पड़ोस सुरक्षा व्यवस्था में कहाँ कमी रह जाती है? 01 सितंबर, 2007 | भारत और पड़ोस तीन 'चरमपंथियों' को पकड़ने का दावा26 अप्रैल, 2007 | भारत और पड़ोस 'कनॉट प्लेस में पकड़े गए चार चरमपंथी'04 फ़रवरी, 2007 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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