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शुक्रवार, 09 नवंबर, 2007 को 14:09 GMT तक के समाचार
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सुंदरबन में इठलाती हैं इरावदी डॉल्फ़िनें

डॉल्फ़िन
सुंदरबन न केवल बाघों के लिए जाना जाता है बल्कि यहां डॉल्फिनों की भी अच्छी ख़ासी आबादी पाई जाती है.

बंगाल की खाड़ी के एक विशेष इलाक़े में इरावदी डॉल्फिनों की प्रजाति की सबसे बड़ी संख्या है. आकड़ों के अनुसार क़रीब छह हज़ार इरावदी डॉल्फिनें यहां रहती हैं जो विश्व में सबसे अधिक हैं.

जहां इरावदी डॉल्फिनें खारे पानी में रहती हैं वहीं मीठे पानी या सामान्य पानी में रहने वाली गंगा वाटर डॉल्फिनों की भी अच्छी संख्या सुंदरबन में पाई जाती है.

क़रीब दो हज़ार गंगा वॉटर डॉल्फिन उन इलाक़ों में हैं जहां नदियां आकर समुद्र में मिलती हैं लेकिन जलवायु परिवर्तन और नदियों के पास लोगों की बढ़ती संख्या के कारण अब इनका अस्तित्व भी ख़तरे में है.

बांग्लादेश समुद्री जीवन संरक्षण परियोजना के लिए काम कर रहे मोगली बताते हैं कि डॉल्फिनों को क्या-क्या ख़तरे हैं.

मोगली कहते हैं, "मछुआरों की फिशिंग ट्राली से कई डॉल्फिनों को चोट लगती है. हमने कई ऐसी तस्वीरें खींची हैं जिनमें आप देख सकते हैं कि इनके शरीर को चोट पहुंची है. इसके अलावा निर्यात की जाने वाली एक मछली को मारने के लिए ख़ास क़िस्म के जाल में डॉल्फिन फँस जाते हैं और मर जाते हैं."

अभी बांग्लादेश में डॉल्फिनों का शिकार नहीं किया जाता है क्योंकि यहाँ के हिंदू और मुसलमान मछुआरे इन्हें पवित्र मानते हैं.

मोगली बांग्लादेशी नागरिक हैं और वह बताते हैं कि मछुआरे जानबूझकर जाल में इन्हें नहीं फंसाते लेकिन चूंकि उन्हें डॉल्फिनों के बारे में जानकारी कम है इसलिए जब ये जाल में फंसती हैं तो मछुआरे उन्हें निकाल कर पानी में फेंक नहीं पाते.

परियोजना के तहत मछुआरों को प्रशिक्षित किया जाता है लेकिन एक दूसरी समस्या है जिसके लिए मछुआरों को दोष नहीं दिया जा सकता.

बांग्लादेश समुद्री जीवन संरक्षण परियोजना के प्रमुख ब्रायन स्मिथ कहते हैं, "मछुआरों को प्रशिक्षित कर देंगे लेकिन जो जलवायु बदल रही है, पूरा वातावरण बदल रहा है, साफ़ पानी नहीं आ रहा है जिससे गंगा वॉटर डॉल्फिनों पर असर पड़ रहा है जबकि समुद्र का स्तर बढने से इरावदी डॉल्फिनों को नुक़सान हो रहा है क्योंकि वो अधिक खारे पानी में नहीं रह सकती."

स्मिथ कहते हैं कि डॉल्फिनों को या किसी भी जंगली जानवर को बचाने के लिए व्यापक प्रयासों की ज़रूरत है और अगर सुंदरबन के जानवरों को बचाना है तो पूरे सुंदरबन को ही बचाना होगा जो अंतरराष्ट्रीय प्रयासों से ही संभव है.

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