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कर्नाटक को लेकर राजनीतिक सरगर्मी बढ़ी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
कर्नाटक को लेकर राजनीतिक गहमागहमी तेज़ हो गई है और अब यह मामला दिल्ली आ गया है. संभावना है कि जल्दी ही कर्नाटक के राजनीतिक भविष्य का कोई फ़ैसला हो जाएगा. बुधवार को जहाँ भाजपा के उच्च स्तरीय प्रतिनिधि मंडल ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मुलाक़ात की है प्रधानमंत्री और सोनिया गाँधी ने कांग्रेस कोरग्रुप की बैठक में कर्नाटक के राजनीतिक हालात पर चर्चा की है. उधर भाजपा ने धमकी दी है कि यदि भाजपा-जनतादल (एस) को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित नहीं किया गया तो दोनों दलों के 129 विधायक राष्ट्रपति के सामने परेड करेंगे. उल्लेखनीय है कि जनता दल (एस) और भाजपा का गठबंधन सात अक्तूबर तक सत्ता में था. लेकिन समझौते के अनुसार मुख्यमंत्री बदले जाने के विवाद के चलते गठबंधन टूट गया और भाजपा ने सरकार से समर्थन वापस ले लिया. इसके बाद वहाँ राज्यपाल रामेश्वर ठाकुर ने राष्ट्रपति शासन की सिफ़ारिश कर दी थी. लेकिन इस बीच राजनीतिक हालात फिर बदल गए हैं और जनता दल (एस) भाजपा को समर्थन देने के लिए तैयार हो गया है और भाजपा ने राज्यपाल के सामने अपने विधायकों की परेड करवाकर सरकार बनाने का दावा पेश कर दिया है. यदि भाजपा को कर्नाचक में सरकार बनाने का निमंत्रण मिलता है तो यह दक्षिण भारत में भाजपा की पहली सरकार होगी. प्रधानमंत्री से मुलाक़ात कर्नाटक में राष्ट्रपति शासन समाप्त करने के लिए दबाव बनाने के लिए बुधवार को भाजपा का एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधि मंडल प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मिला. उन्होंने प्रधानमंत्री से माँग की है कि कर्नाटक में सरकार के गठन के लिए क़दम उठाए जाने चाहिए.
भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी और पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह के नेतृत्व में इस प्रतिनिधि मंडल ने प्रधानमंत्री को बताया कि भाजपा-जनतादल (एस) गठबंधन को सरकार बनाने का दावा किए हुए चार दिन बीत चुके हैं लेकिन राज्यपाल ने अब तक राष्ट्रपति शासन हटाने की अनुशंसा नहीं की है. भाजपा नेताओं ने मनमोहन सिंह का ध्यान कांग्रेस की उस माँग की ओर भी खींचा जिसमें वहाँ विधानसभा भंग करने की माँग की गई है. समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार भाजपा नेता वेंकैया नायडू ने इस मुलाक़ात के बाद बताया, "प्रधानमंत्री ने आश्वासन दिया है कि केंद्र सरकार संविधान की भावना के अनुरुप कार्य करेगी लेकिन उन्होंने कोई समय सीमा नहीं दी है." चर्चा इस मुलाक़ात के बाद प्रधानमंत्री ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी के साथ कांग्रेस कोरग्रुप की बैठक में शामिल हुए. इस बैठक में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय मंत्री शामिल थे. इसमें कर्नाटक के राजनीतिक हालात को लेकर चर्चाएँ हुईं और इसके हर पहलू पर विचार किया गया. हालांकि इस बैठक में लिए गए फ़ैसले की जानकारी नहीं मिल सकी है लेकिन संकेत हैं कि कांग्रेस भी अब वहाँ राष्ट्रपति शासन लगाए जाने के पक्ष में नहीं हैं. पीटीआई का कहना है कि वैसे तो केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक गुरुवार को होती है लेकिन इस बार इसके शुक्रवार को होने की संभावना है. मंत्रिमंडल की बैठक में ही कर्नाटक से राष्ट्रपति शासन हटाने का महत्वपूर्ण फ़ैसला लिया जाना है. | इससे जुड़ी ख़बरें कर्नाटक में अनिश्चितता बरकरार29 अक्तूबर, 2007 | भारत और पड़ोस कर्नाटक: राज्यपाल के समक्ष विधायक पेश29 अक्तूबर, 2007 | भारत और पड़ोस कर्नाटक: भाजपा ने दावा पेश किया27 अक्तूबर, 2007 | भारत और पड़ोस कर्नाटक में राष्ट्रपति शासन की सिफ़ारिश09 अक्तूबर, 2007 | भारत और पड़ोस कर्नाटक: भाजपा ने समर्थन वापस लिया06 अक्तूबर, 2007 | भारत और पड़ोस चुनाव के लिए तैयार हैं - कुमारस्वामी03 अक्तूबर, 2007 | भारत और पड़ोस कर्नाटक में भाजपा मंत्रियों ने इस्तीफ़े दिए02 अक्तूबर, 2007 | भारत और पड़ोस कर्नाटक में गठबंधन सरकार पर संकट 27 सितंबर, 2007 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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