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सोमवार, 22 अक्तूबर, 2007 को 13:50 GMT तक के समाचार
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भारतीय सैनिकों की अघोषित वापसी

राजौरी से दो ब्रिगेड यानी आठ हज़ार से अधिक सैनिक हटाए गए हैं
जम्मू कश्मीर में सेना को हटाने या कम करने को लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों में वाद-विवाद तेज़ हो गया है.

यहाँ तक कि इस मुद्दे पर राज्य में गठबंधन सरकार में दो सहयोगी कांग्रेस और मुफ्ती मोहम्मद सईद की पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) में टकराव जारी है जिससे सरकार के स्थायित्व पर खतरा पैदा हो गया है.

पीडीपी राज्य से सेना हटाने की माँग कर रही है वहीं कांग्रेस इसका विरोध कर रही है लेकिन इस राजनीतिक लड़ाई के बीच बीबीसी को पता चला है कि पिछले कुछ समय में सेना के कम-से-कम दो ब्रिगेड अघोषित रूप से हटाए गए हैं.

एक ब्रिगेड में अमूमन चार से पाँच हज़ार सैनिक होते हैं इसका मतलब है कि लगभग आठ से दस हज़ार सैनिक हटाए गए हैं.

 लोकतांत्रिक व्यवस्था में सेना की भूमिका कम से कम होनी चाहिए. किसी को भी इसे अहं का मुद्दा नहीं बनाना चाहिए. हम सेना हटाने की मांग पर दृढ़ रहेंगे
मुफ़्ती मोहम्मद सईद, पूर्व मुख्यमंत्री

जम्मू कश्मीर में जहाँ भारतीय सेना 1990 से राज्य के भीतर चरमपंथियों के विरुद्ध लड़ाई में भी जुटी है.

हाल ही में उत्तरी कमान के जनरल ऑफ़िसर कमांडिंग इन चीफ लेफ्टिनेंट जनरल एचएस पनाग ने एक पत्रकार सम्मेलन में बताया था कि राज्य में तीन लाख सत्तर हज़ार सैनिक हैं.

जनरल पनाग ने बताया कि 45 प्रतिशत सैनिक चरमपंथियों से निबटने में जुटे हैं जबकि बाक़ी 55 प्रतिशत सैनिक सीमा की देख रेख कर रहे हैं.

सत्ताधारी गठबंधन के साझीदार पीडीपी का कहना है कि इतनी बड़ी संख्या में सैनिकों की मौजूदगी की वजह से जनजीवन सामान्य नहीं हो पा रहा है इसलिए उनकी संख्या कम की जाए लेकिन कांग्रेस का कहना है कि सुरक्षा कारणों से ऐसा करना संभव नहीं है.

वापसी

ख़बरें मिली हैं कि जम्मू क्षेत्र के पहाड़ी ज़िला राजौरी में तैनात सेना की 27वीं डिवीजन में से पिछले कुछ समय में कम से कम दो ब्रिगेड अघोषित रूप से हटाए गए हैं.

 कुछ ऑफ़िसर जिनसे हमारी बातचीत होती थी उन्होंने हमें जाते हुए बताया कि वो सिक्किम लौट रहे हैं
बोधराज, सरपंच

इस बारे में पूछे जाने लेफ़्टिनेंट कर्नल एसडी गोस्वामी ने केवल इतना ही कहा, "सैनिकों की गणना में कोई परिवर्तन नहीं है और जो भी प्रत्यक्ष रूप से दिख रहा है वो रूटीन है."

लेकिन चरमपंथी हिंसाग्रस्त राजौरी ज़िले के दूर-दराज़ में स्थित एक गाँव है त्रियाथ जहाँ से सेना के ये ब्रिगेड हटे हैं.

यहाँ के सरपंच बोधराज ने इस बात की पुष्टि की है कि सेना के दो ब्रिगेड इस इलाके से निकले है.

वे कहते हैं, "आठ महीने पहले कुछ सैनिक हटे थे और करीब तीन महीने पहले भी गए हैं. कुल मिलकर हमारे आस-पास चारों दिशाओं में से दो ब्रिगेड हटे हैं."

उन्होंने बताया कि "कुछ ऑफ़िसर जिनसे हमारी बातचीत होती थी उन्होंने हमें जाते हुए बताया कि वो सिक्किम लौट रहे हैं."

जानकारों का कहना है कि कांग्रेस और पीडीपी में चल रही राजनीतिक रस्साकशी के कारण सेना को अघोषित तौर पर हटाना पड़ा.

टकराव

इस पर पूर्व मुख्यमंत्री और पीडीपी के नेता मुफ्ती मोहम्मद सईद का कहना था, "लोकतांत्रिक व्यवस्था में सेना की भूमिका कम से कम होनी चाहिए. किसी को भी इसे अहं का मुद्दा नहीं बनाना चाहिए. हम सेना हटाने की मांग पर दृढ़ रहेंगे."

जम्मू कश्मीर में सैनिकों की कुल संख्या तीन लाख सत्तर हज़ार बताई जाती है

कांग्रेस पार्टी सेना को हटाए जाने का सख्त विरोध करती है. मुख्यमंत्री ग़ुलाम नबी आज़ाद हर बार ज़ोर देकर कहते हैं कि सेना हटाना सुरक्षा कारणों से संभव नहीं है और जो यह मांग कर रहे है वो केवल राजनितिक नारेबाजी कर रहे हैं.

जब बीबीसी ने सेना के अघोषित तौर पर हटाए जाने के बारे में मुख्यमंत्री से पूछा गया तो उन्होंने जवाब देने से इनकार कर दिया, कोई कांग्रेसी नेता भी इस पर टिप्पणी करने को तैयार नहीं है.

कांग्रेस के इस रुख पर राजनीतिक मामलों की जानकार प्रोफ़ेसर रेखा चौधरी का कहना था, "जैसा कि कांग्रेस सेना हटाने का विरोध कर रही थी इस कारण उनके लिए पीडीपी के सामने इस मुद्दे पर हार मानना मुश्किल है."

प्रोफ़ेसर चौधरी का मानना है, "भविष्य में भी अगर हालत राजनीतिक रूप से अनुकूल न हुए तो संभवत अघोषित तरीके से ही सेना हटाई जाए. जब पाकिस्तान के साथ विश्वास बहाली के तहत ऐसा किया जाएगा तभी इसकी घोषणा की जाएगी."

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