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मंगलवार, 16 अक्तूबर, 2007 को 13:40 GMT तक के समाचार
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सरहद पर धड़ाधड़ बिक रही है ज़मीन

मरुस्थल
राजस्थान का बाड़मेर ज़िला पाकिस्तान की सीमा से सटा है
राजस्थान के सीमावर्ती बाड़मेर ज़िले में पाकिस्तान की सीमा से सटी बंजर ज़मीनें धड़ाधड़ बिक रही है. बाहरी ख़रीदारों ने वहाँ कोई हज़ारों बीघा ज़मीन ख़रीद ली है.

स्थानीय लोग हैरान हैं और जानना चाहते हैं कि वो कौन हैं जो सरहद को ख़रीद रहे हैं.

राज्य सरकार ने ज़िला प्रशासन से इस ख़रीद का विवरण माँगा है.

इस विकट रेगिस्तान को तारबंदी भारत और पाकिस्तान में बाँटती है.

आबादी बहुत विरल है और खेती का नामोनिशान नहीं है, लेकिन बाड़मेर ज़िले का यह मरुस्थली भू-भाग सहसा दूसरे राज्यों के ख़रीदारों को आकर्षित करने लगा है.

दलालों की चाँदी

स्थानीय लोगों के मुताबिक पिछले डेढ़ साल में कोई दो लाख बीघा भूमि बाहर के लोगों ने ख़रीदी है. ये धरती बंजर है. लेकिन ज़मीनों के दलाल इस पर चाँदी काट रहे हैं.

 सरहद के मुनाबाव जैसे इलाकों में ज़मीन के इतने सौदे होना चिंता की बात है. हमने प्रशासन से रिपोर्ट माँगी है. हमारी नज़र इस पर है
गुलाबचंद कटारिया, गृहमंत्री, राजस्थान

सरहद के एक गाँव के गणपत सिंह बताते हैं कि सीमा क्षेत्र के गडरा इलाके में पिछले कुछ माह में 85 हज़ार बीघा ज़मीन बिकी है.

उस ज़मीन के भी सौदे हुए हैं जो बिल्कुल सरहद से सटी हुई है. बाड़मेर की शिव तहसील में हाल में एक ही दिन में ज़मीन सौदे की 17 रजिस्ट्रियाँ हुई हैं.

दलाल और ख़रीदार सरकार की ऑनलाइन रजिस्ट्री सुविधा का भी पूरा लाभ उठा रहे हैं.

राजस्व मंत्री रामनारायण डूडी से पूछा तो कहने लगे इसमें कुछ भी ग़लत नहीं है. भारत का कोई भी नागरिक यहाँ ज़मीन ख़रीद सकता है.

लेकिन गृहमंत्री गुलाब चंद कटारिया कहते हैं, "सरहद के मुनाबाव जैसे इलाकों में ज़मीन के इतने सौदे होना चिंता की बात है. हमने प्रशासन से रिपोर्ट माँगी है. हमारी नज़र इस पर है."

आशंका

सीमांत लोक संगठन के हिंदू सिंह सोढा कहते हैं ये सौदे सरहद की शांति भंग कर सकते हैं. क्योंकि बाहरी लोग सैंकड़ों वर्षों से संरक्षित हमारे रीति रिवाज, सौहार्द और परंपराओं को नुकसान पहुँचा सकते हैं.

 संभव है बड़ी रियल एस्टेट कंपनियां अपना लैंड बैंक प्रर्दशित करने के लिए यहाँ ज़मीन ख़रीद रही हो. क्योंकि इतनी सस्ती ज़मीन भारत में शायद ही कहीं और हो
सुबीर कुमार, डीएम, बाड़मेर

हम इस पर क़ानूनी कार्रवाई का विचार कर रहे हैं. ज़मीन के इन सौदों पर बाड़मेर के सांसद मानवेंद्र सिंह भी चिंतित हैं. उन्होंने इस बारे में प्रधानमंत्री को चिट्ठी लिख कर जाँच की मांग की है.

28 हज़ार वर्ग किमी क्षेत्र वाले बाड़मेर ज़िले में खेती मानसून पर निर्भर करती है.

मानसून यहाँ कम मेहरबान रहता है और वर्षा का सालाना औसत 277 मिलीलीटर है. ऐसे में ज़मीन वहाँ एक हज़ार रुपए प्रति बीघा भाव से बिक रही थी. लेकिन अब यह दर आठ हज़ार रुपए प्रति बीघा हो गई है.

बाड़मेर ज़िला कलेक्टर सुबीर कुमार भी नहीं समझ पाए कि लोग यहाँ ज़मीन क्यों ख़रीद रहे हैं.

सुबीर कहते हैं, "संभव है बड़ी रियल एस्टेट कंपनियां अपना लैंड बैंक प्रर्दशित करने के लिए यहाँ ज़मीन ख़रीद रही हो. क्योंकि इतनी सस्ती ज़मीन भारत में शायद ही कहीं और हो."

धरती के इस भूभाग पर जीवन बहुत कठिन है. ऐसे में स्थानीय लोग ये देखकर परेशान हैं कि आख़िर वे कौन लोग हैं जो रेत के इस समंदर में लहलहाती फसल का ख़्वाब बुन रहे हैं.

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