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गुरुवार, 27 सितंबर, 2007 को 05:25 GMT तक के समाचार
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ईमानदारी में भारत का स्थान 72 वाँ
भारत में पहले की तुलना में कुछ सुधार हुआ है
भ्रष्टाचार के मामले में दुनिया भर के 180 देशों में किए गए सर्वेक्षण के अनुसार भारत का ईमानदारी सूचकांक 72 है.

यानी वह दुनिया के 71 देशों से ज़्यादा भ्रष्ट है.

भारत के लिए राहत की बात इतनी ही हो सकती है कि भ्रष्टाचार के मामले में वह अपने सभी पड़ोसी देशों पाकिस्तान, श्रीलंका, बांग्लादेश और नेपाल की तुलना में बेहतर स्थिति में है.

चीन मैक्सिको और पेरु भी भारत के साथ ही 72 वें पायदान पर हैं.

ट्रांसपरेंसी इंटरनेशनल की ताज़ा रिपोर्ट में डेनमार्क को सबसे ईमानदार देश बताया गया है और इसके बाद फ़िनलैंड, न्यूज़ीलैंड, सिंगापुर और स्वीडन का नंबर है.

ब्रिटेन जहाँ 12 वें नंबर पर है तो अमरीका 20वें नंबर पर है.

ट्रांसपरेंसी इंटरनेशनल ने भ्रष्टाचार मापने के लिए 10 अंकों का ईमानदारी सूचकांक बनाया था. इसमें डेनमार्क को जहाँ 9.4 अंक मिले वहीँ ब्रिटेन को 8.4, अमरीका को 7.2 और भारत को 3.5 अंक मिले.

इस सूची में श्रीलंका 3.2 अंकों के साथ 94 वें नंबर पर, नेपाल 2.5 अंकों के साथ 131 वें नंबर पर, पाकिस्तान 2.4 अंकों के साथ 138 वें नंबर पर तो बांग्लादेश 2.0 अंकों के साथ 162 वें नंबर पर है.

इस सूची के अनुसार बर्मा और सोमालिया दुनिया के सबसे भ्रष्ट देश हैं और 1.4 अंकों के साथ 179 वें नंबर पर हैं. इराक़ इससे सिर्फ़ एक पायदान ऊपर है.

रुस भी भ्रष्ट देशों की सूची में है और उसका नंबर पाकिस्तान से भी नीचे यानी 143 वाँ है.

भारत का हाल

भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ काम करने वाली अंतरराष्ट्रीय संस्था ट्रांसपरेंसी इंटरनेशनल के अनुसार भारत की स्थिति पहले से थोड़ी बेहतर हुई है.

रिपोर्ट में कहा गया है कि छोटे पैमाने पर अभी भी भारत में भारी भ्रष्टाचार होता है और इससे उद्योग-व्यवसाय में बाधा आती है लेकिन बड़े पैमाने पर होने वाले भ्रष्टाचार के मामले में कमी आई है.

पिछली सूची में भारत का ईमानदारी सूचकांक 3.0 था जो इस बार सुधरकर 3.5 हो गया है.

ट्रांसपरेंसी इंटरनेशनल के भारतीय ईकाई के प्रमुख आरएच तहिल्यानी ने कहा है कि भारत में दस लाख से अधिक ग़रीब लोग ऐसे हैं जो भ्रष्टाचार से सबसे ज़्यादा प्रभावित होते हैं क्योंकि वे खाना और ईंधन आदि जुटाने के लिए घूस नहीं दे पाते.

हालांकि संस्था की एक और अधिकारी अलेक्ज़ेंड्रा रैज भारत को लेकर आशानवित हैं. वे कहती हैं कि पिछले पाँच सालों में भारत में भ्रष्टाचार को लेकर एक सकारात्मक परिवर्तन आया है.

उनका कहना है कि भारत में व्यावसायियों ने भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ खड़ा होना शुरु कर दिया है लेकिन सरकारों का रवैया अभी भी ढीला-ढाला है.

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