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रविवार, 22 फ़रवरी, 2004 को 15:51 GMT तक के समाचार
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'भ्रष्टाचार ख़त्म करने के लिए जनजागृति ज़रुरी'

टीएसआर सुब्रमण्यम
सुब्रमनियन मानते हैं कि जनता के दबाव से ही राजनीतिक बदलेंगे
भारत सरकार में कैबिनेट सचिव रह चुके टीएसआर सुब्रमनियन का मानना है कि देश से भ्रष्टाचार ख़त्म करने के लिए जनजागृति ज़रुरी है.

'आपकी बात बीबीसी के साथ' कार्यक्रम में श्रोताओं के सवालों के जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार की जड़ राजनीति है और राजनीति जनता के दबाव से चलती है इसलिए जनता का जागरुक होना ज़रुरी है.

उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार को लेकर न्यायपालिका का सक्रिय होना भी ज़रुरी है.

एक श्रोता के सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार आसान सवाल नहीं है क्योंकि राजनीति के रास्ते भ्रष्टाचार नौकरशाही और प्रशासन तक पहुँच चुका है.

 लोगों को यह समझना होगा कि जब तक देश से भ्रष्टाचार ख़त्म नहीं होगा देश का विकास नहीं हो सकता और ग़रीबी नहीं हट सकती
टीआरएस सुब्रमनियन

राजनीतिक दलों के भ्रष्टाचार के सवाल पर टीएसआर सुब्रमनियन का कहना था कि वे किसी एक राजनीतिक दल के बारे में बात नहीं करना चाहते लेकिन हर राजनीतिक दल कालेधन से चलती है और इसीलिए वे भ्रष्टाचार के बारे में बात नहीं करते.

एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि ख़तरनाक बात यह है कि देश की जनता यह स्वीकार करने लगी है कि भ्रष्टाचार अब जीवन का अंग है.

उन्होंने कहा, ''लोगों को यह समझना होगा कि जब तक देश से भ्रष्टाचार ख़त्म नहीं होगा देश का विकास नहीं हो सकता और ग़रीबी नहीं हट सकती.''

सुधार

उनका कहना था कि प्रशासन और सरकारें वर्तमान व्यवस्था में सुधार नहीं करना चाहते. पूर्व नौकरशाह सुब्रमनियन का कहना था कि सूचना का अधिकार मिलना चाहिए और 'ऑफ़िशियल सीक्रेट एक्ट' ख़त्म होना चाहिए.

उन्होंने कहा कि इसे राजनीतिक मुद्दा बनाना होगा और जनता को कहना होगा कि अगर जीते तो ये 10 सुधार करने होंगे.

एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि न्यायपालिका को सक्रिय होना पड़ेगा तभी देश में जाँच पड़ताल की गुणवत्ता में सुधार होगा और भ्रष्टाचार कम होगा.

उन्होंने लालू प्रसाद यादव और जयललिता का नाम लेकर कहा कि वे दोषी हैं या नहीं यह तय करने में 12-15 साल का समय क्यों लगना चाहिए.

उनका सुझाव था कि न्यायपालिका को यह तय करना होगा कि भ्रष्टाचार का कोई भी मामला छह महीने में पूरा हो जाएगा. तीन महीने जाँच के और तीन महीने सुनवाई के.

भारत की प्रशासनिक व्यवस्था पर किताब लिख चुके टीएसआर सुब्रमनियन ने कहा कि वे आशावादी हैं और उन्हें उम्मीद है कि आने वाले एक-दो, पाँच या दस सालों में भष्ट्राचार ज़रुर दूर हो जाएगा.

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